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EV वाहन लेने से पहले सोचिए... दुनिया की बड़ी कार कंपनियों ने EV उत्पादन रोकने पर विचार शुरू किया
वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आ गया है। Honda, Ford, General Motors (GM), Stellantis और Volkswagen जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) योजनाओं में लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये (लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर) के निवेश को राइट-डाउन कर दिया है। इसका मतलब है कि इन कंपनियों ने EV उत्पादन के कुछ बड़े प्लानों को अस्थायी रूप से रोक दिया है या अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रही हैं।
इस निर्णय का मुख्य कारण EV की मांग में अचानक मंदी और अत्यधिक ऊंची उत्पादन लागत है। विश्लेषकों के अनुसार EV वाहनों की कीमत में बैटरी का हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत है। लिथियम-आयन बैटरियों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता और उसके दामों में उतार-चढ़ाव एक बड़ी समस्या है। इसके अलावा, अधिकांश बैटरी उत्पादन क्षमता चीन पर निर्भर होने के कारण सप्लाई चेन में अस्थिरता आई है।

एक मुख्य चुनौती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भी है। यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में भी पर्याप्त फास्ट चार्जिंग स्टेशनों की कमी है, जिससे ग्राहक लंबी यात्रा के लिए हिचकिचाते हैं। साथ ही EV बैटरियों के उत्पादन और निपटान प्रक्रिया से पर्यावरण को नुकसान होता है, जिसके कारण कुछ समूहों में EV को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल मानने में संकोच है।
इस स्थिति के कारण कंपनियां अब हाइब्रिड वाहनों की ओर मुड़ रही हैं। जापानी ऑटो दिग्गज टोयोटा ने वर्षों से इस रणनीति को अपनाकर सफलता हासिल की है। हाइब्रिड वाहन पेट्रोल और इलेक्ट्रिक इंजन का मिश्रण होते हैं, जो कम लागत में अधिक माइलेज देते हैं और चार्जिंग की आवश्यकता कम करते हैं। Ford और GM जैसी कंपनियां भी अपने बड़े EV मॉडलों को सीमित करके हाइब्रिड पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

भारत के संदर्भ में यह वैश्विक रुझान एक महत्वपूर्ण सबक है। भारत सरकार FAME-II और PLI योजनाओं के माध्यम से EV उत्पादन और अपनाने को प्रोत्साहित कर रही है। लेकिन भारत में भी चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी रीसाइक्लिंग और स्वदेशी उत्पादन विकसित करने की आवश्यकता है। यदि वैश्विक कंपनियां भी सावधानी बरत रही हैं, तो भारतीय ऑटोमेकर्स को भी हाइब्रिड और EV के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।
यह विकास दर्शाता है कि EV ट्रांजिशन एक रात में नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से होगा। तकनीक में सुधार जैसे सस्ती और अधिक कुशल बैटरियां और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। इसके साथ ही पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। फिलहाल हाइब्रिड वाहन एक व्यावहारिक विकल्प साबित हो रहे हैं।

