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अचानक ऐसा क्या हुआ कि संसद में कागज़ फेंकने वाले 7 सांसदों का सस्पेंशन स्पीकर ने रद्द कर दिया
लोकसभा में कागज़ फाड़कर अध्यक्ष पर फेंकने की घटना के बाद, कांग्रेस के 7 सहित आठ विपक्षी सांसदों को बजट सत्र के बाकी समय के लिए निलंबित किया गया था। अब इन सांसदों का सदन से वनवास का समय समाप्त हो गया है। संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों पक्षों में सीज़फायर के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सस्पेंशन रद्द करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया, जो ध्वनि मत से पारित हो गया। अध्यक्ष ओम बिरला ने आसन से घोषणा की कि सांसदों का सस्पेंशन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।
मंगलवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को सदन के कुछ नेताओं के साथ कल हुई चर्चाओं के बारे में प्रस्ताव पेश करने को कहा था। उन्होंने कहा, आपको सिर्फ प्रस्ताव रखना है बस। इसके बाद स्पीकर ने कांग्रेस सांसद के. सुरेश की ओर मुड़कर पूछा कि, ‘क्या आप इस बारे में कुछ कहना चाहते हैं? सुरेश जी, आप सदन से क्या आग्रह करना चाहते हैं?’ कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने सांसदों के सस्पेंशन को रद्द करने की अपील की। इसके बाद स्पीकर ने पूछा कि वे सदन के अंदर अनुशासन बनाए रखने के बारे में क्या कहना चाहते हैं।

स्पीकर की इस बात पर कांग्रेस सांसद सुरेश ने कहा कि, ‘कल स्पीकर के चैंबर में चर्चा हुई थी। हमने तय किया है कि हम यह प्रस्ताव पेश करेंगे। हम सदन चलाने में सहयोग करेंगे।’ समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने जोर देकर कहा कि, ‘हमने सदन की मर्यादा पार नहीं की है और न ही करेंगे।’ उन्होंने सांसदों के सस्पेंशन को रद्द करने के लिए के. सुरेश द्वारा पेश प्रस्ताव का समर्थन किया। एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने टिप्पणी की कि कल की बैठक के दौरान यह तय किया गया था कि सदन व्यवस्थित रूप से चले और इसे सुनिश्चित करने के प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किए जाएं। एक ‘लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए।’
जनता दल (यूनाइटेड) का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि सुप्रिया सुले ने जो बात कही है उस पर सर्वसम्मति बनी है, ‘लक्ष्मण रेखा’ कोई पार नहीं करेगा। उन्होंने आगे कहा कि महासचिव की टेबल पर जिस प्रकार का व्यवहार देखा गया वह सदन की गरिमा के खिलाफ है। ललन सिंह ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने के बारे में लिया गया निर्णय सुरेश जी ने नहीं पढ़ा। इसके बाद अध्यक्ष के आसन से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का नाम लिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, ‘हम हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहते हैं। कल की बातचीत का बहुत उल्लेख हुआ है। हम कुछ मुद्दों पर सामूहिक रूप से सहमति पर पहुंचे थे। इस प्रस्ताव को पेश करने से पहले ‘सदन की भावना’ तय होनी चाहिए थी; यह सर्वोपरि होती है। आप इस सदन के रक्षक हैं। सदन सर्वोच्च है।’ किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि, अगर कोई सहमति है, तो मैं दो या तीन मुद्दे रखना चाहता हूं। स्पष्टता आ जाए तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। हमने अतीत में कभी सदन के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है, और भविष्य में भी नहीं करेंगे।’
उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान लक्ष्मण रेखा खींचने की बात तय हुई थी। कोई नहीं चाहता कि कोई सस्पेंड होकर सदन से बाहर रहे। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि जनता ने हर सदस्य को चुना है और यहां भेजा है। यहां कागज़ फाड़कर फेंकने, मारपीट करने या टेबल पर चढ़ने के लिए नहीं भेजा है। किरेन रिजिजू ने कहा कि शुरुआत में के. सुरेश द्वारा पेश प्रस्ताव में ‘अफसोस’ शब्द का उपयोग किया गया है, लेकिन माफी नहीं मांगी गई है। फिर भी हम इसे स्वीकार करते हैं। हम कुछ हद तक इसे मानने के लिए तैयार हैं। हालांकि, सदन चलाने के लिए नियमों का पालन करने हेतु स्पीकर के रूलिंग और संसदीय परंपराओं का पालन सुनिश्चित करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएंगे, इस पर हम स्पष्टता चाहते हैं।’

संसदीय कार्य मंत्री ने आगे कहा कि, ‘हमने कल ही कह दिया था कि जो भी निर्णय लिया जाएगा वह हमें स्वीकार होगा। हम विस्तार में नहीं जाएंगे; हम सिर्फ सदन के कामकाज को चलाने में आपका सहयोग चाहते हैं, और हम आपको आश्वस्त करते हैं कि हम कभी स्पीकर के रूलिंग और आपके किसी सदस्य को डिस्टर्ब नहीं करेंगे।’ उन्होंने कहा कि, यहां तक कि हम सहयोग करेंगे और लक्ष्मण रेखा कहां खींचनी है, इस पर थोड़ी स्पष्टता दे दें। इस पर विपक्ष की ओर से प्रतिबद्धता आनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि आपकी ओर से नियमों के पालन और सदन के संचालन में सहयोग को लेकर स्पष्टता दी जाए।
कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि वे सदन में प्लेकार्ड लेकर नहीं आएंगे। मकरद्वार पर विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे; इसके बजाय, वे सदन की सुचारु कार्यवाही में सहयोग करेंगे। जब के. सुरेश यह टिप्पणी कर रहे थे, तब उनके पीछे बैठीं सुप्रिया सुले ने उनके कान में कुछ कहा, जिसके बाद सुरेश ने कहा कि, आपका निवेदन है कि सांसदों का सस्पेंशन रद्द किया जाए। के. सुरेश द्वारा ऐसा कहने के बाद ओम बिरला ने आसन से सदन को संबोधित किया।

अध्यक्ष के आसन से बोलते हुए उन्होंने कहा कि कल की बैठक के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और भव्य परंपराओं को बनाए रखने में सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई थी। उन्होंने आग्रह किया कि संसद परिसर के अंदर या बाहर नकली फोटोग्राफ, एआई-जनरेटेड फोटो, बैनर या पोस्टर प्रदर्शित न करें। यह आग्रह आधिकारिक बुलेटिन में भी किया गया है। स्पीकर ने कहा कि संसद दुनिया में लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है, और हमें मिलकर सहज सहयोग करना चाहिए। स्पीकर के इन बयानों के बाद, किरेन रिजिजू ने सदस्यों के सस्पेंशन को रद्द करने के लिए सदन में प्रस्ताव पेश किया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नियम 374(2) के तहत 8 सदस्यों के सस्पेंशन को रद्द करने के लिए सदन में प्रस्ताव पेश किया। इन सांसदों को 3 फरवरी को निलंबित किया गया था। स्पीकर ओम बिरला ने सदन में इस प्रस्ताव पर मतदान कराया। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से ध्वनि मत द्वारा पारित हो गया। इसके बाद, स्पीकर ने घोषणा की कि विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि निलंबित सांसदों में कांग्रेस के सदस्य मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी एडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले और किरण कुमार रेड्डी तथा लेफ्ट के एस. वेंकटेशन शामिल थे।

