चैत्र नवरात्रि आज से, हिंदुओं का बदल जाएगा आज से कैलेंडर, जानिए नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा क्यों की जाती है?

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सूरत। नवरात्रि की शुरुआत आज से यानी गुरुवार से हो गई है। हिंदू नववर्ष के साथ शुरू होने के कारण ये साल की पहली नवरात्रि होती है। वहीं, आज से हिंदुओं का कैलेंडर भी बदल जाएगा। विक्रम संवत 2083 की शुरुआत हो चुकी है। वहीं, नवरात्रि 19 से 27 मार्च तक रहेगी। पहले दिन घट स्थापना के लि

ए 8 मुहूर्त रहेंगे। इन दिनों देवी पूजा के साथ व्रत पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इसकी मूल वजह है मौसम में बदलाव। इसलिए इस मौसम में खानपान पर ध्यान देने से पूरे साल बीमार नहीं होते हैं। देवी पुराण के अनुसार साल में दो नवरात्रि बहुत खास होती है। पहली मार्च-अप्रैल में होती है। इसे चैत्र नवरात्र कहते हैं। दूसरी सितंबर-अक्टूबर में आती है। इसे शारदीय नवरात्र कहते हैं।
अब जानते हैं कि नौ दिनों की पूजा विधि कैसे की जाती है
- हर दिन पूजा से पहले खुद पर गंगाजल छिड़कें, तिलक लगाएं और दीपक जलाएं।
- पहले गणेशजी फिर देवी पार्वती, कलश और उसके बाद देवी दुर्गा की पूजा करें। हर दिन देवी लक्ष्मी, सरस्वती और कालिका की पूजा करें।
- कुमकुम, चावल, हल्दी, फूल और इत्र सहित अन्य बताए चीजों से देवी पूजा करें। पूजा खत्म होने पर नैवेद्य लगाएं फिर आरती करने के बाद प्रसाद बांटें।

नवरात्रि के 9 दिनों में किस दिन कौन-सी देवी की पूजा होती है और उनका महत्व, आइए अब ये भी जानते हैं
पहला दिन- मां शैलपुत्री
महत्व: शक्ति और स्थिरता का प्रतीक
इस दिन कलश स्थापना की जाती है
दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी
महत्व: तपस्या, संयम और धैर्य
ज्ञान और शक्ति के लिए पूजा

तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा
महत्व: साहस और शांति
भय और नकारात्मकता दूर करती हैं
चौथा दिन- मां कूष्मांडा
महत्व: सृष्टि की रचयिता
ऊर्जा और स्वास्थ्य देती हैं
पांचवां दिन- मां स्कंदमाता
महत्व: मातृत्व और करुणा
सुख-शांति और समृद्धि
छठा दिन- मां कात्यायनी
महत्व: शक्ति और साहस
विवाह और रिश्तों के लिए शुभ
सातवां दिन- मां कालरात्रि
महत्व: बुराई का नाश
डर और बाधाओं को खत्म करती हैं
आठवां दिन- मां महागौरी
महत्व: शुद्धता और शांति
जीवन में सुख-समृद्धि लाती हैं
नौवां दिन- मां सिद्धिदात्री
महत्व: सिद्धि और सफलता देने वाली
सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं

खास बात: 

  • अष्टमी और नवमी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं
  • इन दिनों कन्या पूजन किया जाता है

कलश स्थापना क्यों है इतना खास

मिट्टी का कलश पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। इसमें जल और वायु तत्व होते हैं और पास रखा दीपक अग्नि तत्व का प्रतीक होता है। कलश में आकाश तत्व यानी ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करना ही घट स्थापना कहलाता है। जल से सृष्टि की उत्पत्ति मानी गई है और जल में सभी देवी-देवताओं का निवास माना जाता है, इसलिए कलश में शक्ति का आह्वान किया जाता है। इसके अलावा देवी भागवत के अनुसार नवरात्रि में हर दिन देवी दुर्गा के ही एक रूप की पूजा होती है। इस ग्रंथ में कहा है कि नवरात्रि में देवी को नौ रूपों में पूजना चाहिए। वहीं, मार्कंडेय पुराण में ब्रह्मा जी ने नौ दुर्गाओं के नाम और उनका महत्व बताया है। ये नवदुर्गा ही देवी के नौ रूप है। नवदुर्गा-पूजन एक पुरानी शास्त्रीय परंपरा है, जिसका जिक्र 8वीं सदी में मिले ग्रंथों में मिलता है।

नवरात्रि व्रत से खानपान में संयम रखना सिखाता है

नवरात्रि व्रत से खानपान की आदतों में संयम आता है। व्रत के दौरान कम भोजन मिलने पर शरीर अपनी कमजोर कोशिकाओं को तोड़कर ऊर्जा बनाता है। इससे अच्छी कोशिकाएं बची रहती हैं और शरीर स्वस्थ रहता है। यही नहीं, शरीर की क्षमता बढ़ती है और उम्र बढ़ने की संभावना भी ज्यादा होती है। खास बात यह है कि व्रत में केवल खानपान का ही नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म का भी संयम रखा जाता है। इससे शारीरिक और मानसिक, दोनों सेहत अच्छी रहती है। मानसिक व्रत में काम, क्रोध और लोभ जैसे विचारों का त्याग किया जाता है।

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