ज्ञान होना अच्छा है, लेकिन ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से मिला हुआ नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी; शशि थरूर का किया उल्लेख

Hindi Khabarchhe Picture
On

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह सभी प्रसिद्ध लेखकों और विचारकों के विचारों का सम्मान करता है, लेकिन ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से प्राप्त जानकारी या ज्ञान को अदालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। धार्मिक स्थलों (जैसे केरल में सबरीमाला मंदिर) पर महिलाओं के साथ भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार और उसकी सीमाओं से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई करते समय 9 जजों की संवैधानिक पीठ द्वारा यह दिलचस्प टिप्पणी की गई।

इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई कर रही 9 सदस्यीय संवैधानिक पीठ का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत कर रहे हैं। इसके अलावा इस पीठ में न्यायाधीश B.V. नागरत्ना, M.M. सुंदरश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना B. वराले, R. महादेवन और जोयमाल्या बागची शामिल हैं।

supreme-court3
deshbandhu.co.in

सुनवाई के दौरान, दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रमुख की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल उपस्थित थे। अपनी दलीलें पेश करते समय उन्होंने कांग्रेस नेता और लेखक शशि थरूर के एक लेख का उल्लेख किया, जिसमें धार्मिक मामलों और राहत से जुड़े मुद्दों में ‘न्यायिक संयम’ (अदालत द्वारा हस्तक्षेप से बचना) की अपील की गई थी।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘हम सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों, न्यायशास्त्रियों आदि का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत राय केवल एक व्यक्तिगत राय ही होती है।’

इसके जवाब में कौल ने कहा कि ज्ञान किसी भी स्रोत से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘यदि ज्ञान और बुद्धिमत्ता किसी भी स्रोत, किसी भी देश या किसी भी विश्वविद्यालय से आती है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। हमारी सभ्यता इतनी समृद्ध है कि हम हर प्रकार के ज्ञान और जानकारी को सहजता से स्वीकार कर सकते हैं।’

कौल की टिप्पणी पर न्यायाधीश B.V. नागरत्ना ने हल्के अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा, ‘हाँ, बिल्कुल, लेकिन ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ वाला नहीं।’

sabarimala
indianexpress.com

इस पर कौल ने कहा कि वे यह बहस नहीं करना चाहते कि कौन-सी विश्वविद्यालय अच्छी है या खराब, लेकिन उनका मुख्य मुद्दा यह था कि ज्ञान जहाँ से भी मिले, उसे स्वीकार करना चाहिए।

एक दिन पहले, बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी अदालत या न्यायिक मंच के लिए यह तय करना बहुत कठिन, बल्कि लगभग असंभव है कि किसी विशेष धर्म की कौन-सी प्रथाएँ ‘अनिवार्य’ हैं और कौन-सी ‘अनिवार्य नहीं’।

इस पूरी सुनवाई की जड़ें 2018 के फैसले में हैं। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने 4:1 के बहुमत से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। उस निर्णय में केरल के सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर सदियों पुराना प्रतिबंध हटा दिया गया था। अदालत ने इस हिंदू धार्मिक प्रथा को अवैध और असंवैधानिक घोषित किया था। इस फैसले के बाद दाखिल की गई पुनर्विचार याचिकाओं और अन्य धर्मों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े इसी तरह के मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए 9 जजों की इस बड़ी पीठ का गठन किया गया था।

About The Author

More News

अभी भी मैच से पहले कार्टून देखते हैं वैभव सूर्यवंशी, LSG के खिलाफ मैच के बाद किया खुलासा

Top News

अभी भी मैच से पहले कार्टून देखते हैं वैभव सूर्यवंशी, LSG के खिलाफ मैच के बाद किया खुलासा

वैभव सूर्यवंशी अपनी आदत से मजबूर हैं। कोई और नहीं, वही आदत जो हर घर के बच्चे की कहानी होती...
खेल 
अभी भी मैच से पहले कार्टून देखते हैं वैभव सूर्यवंशी, LSG के खिलाफ मैच के बाद किया खुलासा

गुजरात निकाय चुनाव: चुनाव प्रचार का शोर आज थम जाएगा, अंतिम दिन सभी पार्टियों ने झोंकी अपनी पूरी ताकत

अहमदाबाद। गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव के प्रचार का आज आखिरी दिन है। प्रचार थमने से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक...
राष्ट्रीय  
गुजरात निकाय चुनाव: चुनाव प्रचार का शोर आज थम जाएगा, अंतिम दिन सभी पार्टियों ने झोंकी अपनी पूरी ताकत

पश्चिम बंगाल में टूटा वोटिंग का रिकॉर्ड: बंपर मतदान से 'दीदी' की सत्ता बरकरार रहेगी या खिलेगा कमल?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान ने इस बार राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टियों को चौंका दिया है।...
राष्ट्रीय  
पश्चिम बंगाल में टूटा वोटिंग का रिकॉर्ड: बंपर मतदान से 'दीदी' की सत्ता बरकरार रहेगी या खिलेगा कमल?

ज्ञान होना अच्छा है, लेकिन ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से मिला हुआ नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी; शशि थरूर का किया उल्लेख

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह सभी प्रसिद्ध लेखकों और विचारकों के विचारों का...
राष्ट्रीय  
ज्ञान होना अच्छा है, लेकिन ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से मिला हुआ नहीं! सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी; शशि थरूर का किया उल्लेख

बिजनेस

Copyright (c) Khabarchhe All Rights Reserved.