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बंगाल चुनाव: मछली के मुद्दे से लेकर मुस्लिम वोट बैंक तक, क्या 'फाइट टू फिनिश' में ढहेगा दीदी का गढ़?
पश्चिम बंगाल में आज पहले चरण का मतदान शुरू हो गया है। वहां जो चुनावी युद्ध चल रहा है उसमें फाइट फॉर फिश है और फाइट टू फिनिश भी है। फाइट फॉर फिश की बात करें तो बंगाल के चुनाव में इस बार मछली का मुद्दा बहुत जोर पकड़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक बंगाल में 65 प्रतिशत लोग मछली खाते हैं। इसमें सभी जातियों का समावेश होता है। वहां फिलहाल नेता हाथ में मछली लेकर घूम-घूमकर प्रचार कर रहे हैं। बीजेपी के बड़े नेता अनुराग ठाकुर ने तो मछली खाते हुए वीडियो भी वायरल कर दिए हैं।
मछली पॉलिटिक्स का कारण यह है कि ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी ऐसा प्रचार कर रही है कि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आएगी तो मछली खाने नहीं देगी। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषण में कहा कि ममता दीदी की सरकार ने बंगाल में मछली उत्पादन के लिए कुछ नहीं किया। पूरे देश में मछली का उत्पादन और एक्सपोर्ट दोगुना हो गया, लेकिन बंगाल अभी पीछे है। तो ममता दीदी ने कहा कि पहले बंगाल मछली आंध्र प्रदेश से मंगवाता था। आज जरूरत नहीं पड़ती। यानी मछली का उत्पादन बढ़ा है। बेचारी मछली ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसे इतना महत्व मिलेगा।

खैर, अब बात करते हैं फाइट टू फिनिश की। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार तय कर लिया है कि बंगाल में ममता दीदी का राज खत्म करना है। ममता दीदी चौथी बार जीतने के लिए जोर लगा रही हैं। वे 3 बार जीत चुकी हैं, इसलिए उनके खिलाफ गुजरात में बीजेपी की तरह एंटी-इंकंबेंसी है। हालांकि, वे बंगाल की अस्मिता और महिला वोटर्स के भरोसे जोर लगा रही हैं। इसके अलावा मुस्लिम वोटर्स भी उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी हथियार निकाल लिए हैं। ममता दीदी जिसका हर तरह से विरोध कर रही हैं, उस SIR के जरिए लगभग 27 लाख वोट कम हो गए हैं। घुसपैठियों का मुद्दा उछाला जा रहा है।
मुस्लिम वोटों के विभाजन के लिए हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम तैयार हैं। बंगाल के चुनाव खून-खराबे वाले होते हैं। इसलिए बंगाल के सभी अधिकारियों का ट्रांसफर हो चुका है। सुरक्षा के लिए पुलिस के अलावा केंद्रीय बल तैनात कर दिए गए हैं। बीजेपी के चाणक्य गृह मंत्री अमित शाह खुद वहां 15 दिनों का कैंप लगा चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इस बार कांटे की टक्कर है। फाइट टू फिनिश है। 1 मई को आने वाले बंगाल समेत तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के परिणाम देश की आने वाली राजनीति तय करेंगे।

