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पहलगाम हमले का एक साल…जख्म आज भी हर हिंदुस्तानियों के दिलों में ताजा है; सेना बोली- भारत कुछ नहीं भूला है
पहलगाम। पहलगाम की यादों को एक बार फिर से ताजा करने का समय है। वैसे तो इस कभी भुलाया ही नहीं गया। हर हिंदुस्तानी के दिलों में आज भी यह जख्म गहरा है। बात हो रही है पहलगाम हमले की। इसकी पहली बरसी 22 अप्रैल को है। पिछले साल इसी तारीख को 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवादियों को कड़ा जवाब दिया था।
इधर, पहली बरसी के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जबकि सेना ने भी सख्त संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है, ‘देश इस हमले को भूला नहीं है।’
बैसरन घाटी में आतंकियों ने लाेगों को निशाना बनाया था
उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल 2025 को श्रीनगर से लगभग 95 किलोमीटर दूर स्थित बैसरन घाटी में आतंकियों ने 26 लोगों को निशाना बनाया था। इस घटना के बाद से बैसरन घाटी को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और आज तक वहां आम पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध कायम है।
पहलगाम के अन्य पर्यटन स्थल खुले हुए हैं
हमले के बाद से बैसरन घाटी में सुरक्षा के मद्देनजर एक निश्चित सीमा से आगे जाने की अनुमति नहीं है। हालांकि पहलगाम के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल पर्यटकों के लिए खुले हुए हैं। इसके बावजूद पर्यटन पर बड़ा असर पड़ा है। जानकारी के अनुसार, पहलगाम आने वाले पर्यटकों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आई है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि बैसरन घाटी अब तक क्यों बंद है। उनका कहना है कि इस फैसले से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है, जबकि आम लोगों का इस घटना से कोई संबंध नहीं था।
सेना: इंसानियत की हदें लांघी जाती हैं तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है
पहली बरसी से ठीक एक दिन पहले भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट जारी कर आतंकियों और उनके समर्थकों को चेतावनी दी। पोस्ट में लिखा गया कि कुछ सीमाएं कभी पार नहीं की जानी चाहिए और जब इंसानियत की हदें लांघी जाती हैं तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि न्याय किया जा चुका है और भारत पूरी तरह एकजुट है। इस संदेश के साथ एक तस्वीर भी साझा की गई, जिसमें भारत का नक्शा और सिंदूर की प्रतीकात्मक थीम दिखाई गई, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी थी।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने दिया था कड़ा जवाब
पहलगाम हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। 6 और 7 मई 2025 की रात 1:05 बजे भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एयर स्ट्राइक की। करीब 25 मिनट चले इस ऑपरेशन में सात शहरों में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया।
पर्यटकों की सुरक्षा के लिए नए उपाय किये गए
पहलगाम में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कई नए कदम उठाए हैं। सभी सर्विस प्रोवाइडर्स जैसे पोनी गाइड, टैक्सी ड्राइवर और अन्य स्थानीय कामगारों का वेरिफिकेशन किया गया है और उन्हें रजिस्टर किया गया है। हर व्यक्ति को एक यूनिक QR कोड दिया गया है, जिसमें उनकी व्यक्तिगत जानकारी और पहचान से जुड़ी डिटेल्स मौजूद हैं। ‘स्कैन मी’ सुविधा के जरिए इन लोगों की पहचान तुरंत की जा सकती है। अब तक करीब 7 हजार लोगों को इस सिस्टम से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा बैसरन घाटी जैसे संवेदनशील इलाकों में 15 से 20 जवानों की छोटी-छोटी टीमें तैनात की गई हैं, ताकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों से किसी भी संभावित घुसपैठ को रोका जा सके।
आदिल की बहादुरी: परिवार को बेटे पर गर्व
इस हमले में एक स्थानीय गाइड आदिल ने बहादुरी का परिचय देते हुए एक आतंकी को पकड़ने की कोशिश की थी, जिसमें उनकी जान चली गई। आदिल के गांव हापतनार में आज भी उनकी वीरता की चर्चा होती है। उनके पिता हैदर शाह ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, जिसने आखिरी सांस तक आतंकियों का सामना किया। उन्होंने बताया कि अब उनका गांव भी आदिल के नाम से पहचाना जाता है।
पहलगाम आज भी उस दर्द के साथ जी रहा है
पहलगाम आज भी उस दर्दनाक घटना की यादों के साथ जी रहा है। एक ओर जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग सामान्य जीवन और पर्यटन गतिविधियों की वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। पहली बरसी के मौके पर यह घटना एक बार फिर देश को याद दिलाती है कि सुरक्षा और सतर्कता कितनी जरूरी है। साथ ही यह भी कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में देश एकजुट है।

