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गांधीनगर में ACB का एक्शन: 9.5 लाख की रिश्वत लेते नायब मामलतदार और पूर्व कर्मचारी गिरफ्तार
गुजरात की राजधानी में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। गांधीनगर कोर्ट पार्किंग के पास फिल्मी अंदाज़ में ऑपरेशन अंजाम देकर ACB ने नायब मामलतदार और पूर्व कर्मचारी को लाखों की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया है। इस कार्रवाई से सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार करने वाले बाबुओं में हड़कंप मच गया है।
गांधीनगर कलेक्टर कार्यालय में भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पिछले 5 वर्षों में इस कार्यालय और उससे जुड़े दफ्तरों के लगभग 12 से अधिक कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं। पहले भी नायब मामलतदार और क्लर्क स्तर के अधिकारी ACB के जाल में फंस चुके हैं।
गांधीनगर कलेक्टर कार्यालय में जमीन आवंटन शाखा के नायब मामलतदार बिपिनचंद्र परमार और सेवानिवृत्त पटावाला दिनेश वालंद को ACB ने 4.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया था। ACB ने गांधीनगर कोर्ट की पार्किंग में जाल बिछाया था और वे उसमें फंस गए। गांधीनगर कोर्ट की पार्किंग के पास फिल्मी अंदाज़ में रचे गए जाल के दौरान रिश्वत की रकम स्वीकार करते ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एक व्यक्ति ने अपने रिश्तेदार के मकान का प्रॉपर्टी कार्ड बनवाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में आवेदन किया था। इस काम में कोई त्रुटि न निकालने और अच्छा अभिमत देने के लिए नायब मामलतदार की ओर से पूर्व पटावाले ने 9.50 लाख रुपये की मांग की थी। मोलभाव के बाद पहले किश्त के रूप में 4.50 लाख रुपये देने का तय हुआ था। शिकायतकर्ता ने इस बारे में ACB को सूचना दी, जिसके बाद पीआई के.के. देसाई ने अपनी टीम के साथ जाल बिछाया।
कोर्ट पार्किंग के पास शिकायतकर्ता की गाड़ी में बैठकर जब आरोपियों ने रिश्वत को लेकर बातचीत की और फिर रकम स्वीकार की, तभी ACB की टीम ने छापा मारकर दोनों को पकड़ लिया। ACB ने पूरी रिश्वत राशि बरामद कर ली है और फिलहाल दोनों आरोपियों के निवास स्थान पर जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें आय से अधिक संपत्ति मिलने की संभावना है।
इससे पहले सोमवार को अहमदाबाद में 80 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले एक रेलवे क्लर्क को 100 रुपये की रिश्वत लेते ACB ने गिरफ्तार किया था। ऐसे में गुजरात में बढ़ते भ्रष्टाचार के मामलों को रोकने के लिए सरकार को उचित कदम उठाना आवश्यक हो गया है।

