- Hindi News
- राष्ट्रीय
- बिजनौर: पैन कार्ड के जरिए बड़ा खेल; डिलीवरी बॉय के नाम पर किया करोड़ों का लेन-देन, अब उसके घर आई IT
बिजनौर: पैन कार्ड के जरिए बड़ा खेल; डिलीवरी बॉय के नाम पर किया करोड़ों का लेन-देन, अब उसके घर आई IT की नोटिस
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गरीब डिलीवरी बॉय के पैन कार्ड का दुरुपयोग करके उसके नाम पर करोड़ों रुपये का धोखाधड़ी का धंधा दिखाया गया था। पीड़ित न्याय के लिए एक जगह से दूसरी जगह भागदौड़ कर रहा है, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण वह मानसिक रूप से टूट गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धामपुर तहसील के पृथ्वीपुर बनवारी गांव के निवासी फिरोज अहमद अमेज़न में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करते हैं। 2020-21 में उनके पैन कार्ड का उपयोग नकली GST पंजीकरण प्राप्त करने के लिए किया गया था। इस नकली फर्म का नाम 'WYN IMPEX' था और इसका रजिस्ट्रेशन 14 जुलाई, 2020 से सक्रिय दिखाया गया था।
हैरान करने वाली बात यह है कि अगले ही महीने, अगस्त 2020 में, GST पोर्टल पर ₹9,49,19,616 की धोखाधड़ी का लेनदेन दर्ज किया गया था, जबकि पीड़ित को इस लेनदेन की कोई जानकारी नहीं थी और उसे कोई पैसा नहीं मिला था।
इस पूरी धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब आयकर विभाग ने फिरोज अहमद को नोटिस भेजा। पहली बार नोटिस मिलने के बाद वह हैरान रह गया और जब उसने GST विभाग से जानकारी मांगी, तब पूरा मामला सामने आया। इसके बाद, 28 जून, 2025 को आयकर विभाग ने दूसरी नोटिस भेजी, जो उसे 3 जुलाई, 2025 को मिली।
जांच में सामने आया कि GST पंजीकरण के दौरान इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, दस्तावेज, शपथपत्र और हस्ताक्षर पूरी तरह से नकली थे और उनका पीड़ित से कोई संबंध नहीं था।
पीड़ित फिरोज अहमद ने बताया कि वह एक गरीब मजदूर है और जन्म से ही अपने गांव में रहता है। उसने 13 अगस्त, 2025 को पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही उसे आवेदन की एक प्रति दी गई। लगातार मिल रही नोटिसों के कारण, आर्थिक और मानसिक दबाव तथा प्रशासनिक उदासीनता की वजह से पीड़ित अब भारी तनाव में है।
यह मामला केवल पहचान की चोरी का गंभीर उदाहरण ही नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे की ओर भी संकेत करता है। इस मामले में प्रशासन को संज्ञान लेने और पीड़ित को न्याय दिलाने में कितना समय लगेगा, यह देखना बाकी है।

