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सियासत का 'महाभारत': चुनावी रण में सगे भाई आमने-सामने, कौन मारेगा बाजी? एक तो पहले 2 बार विधायक रह चुके हैं
इस बार की स्थानीय स्वराज्य की चुनाव कई कारणों से चर्चा में रही है। इस चुनाव में एक ही परिवार से दो-दो लोग अलग-अलग पार्टियों की टिकट लेकर चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। कहीं सास-बहू के बीच मुकाबला है तो कहीं देवर-भाभी, तो कहीं देवरानी-जेठानी आमने-सामने चुनाव लड़ रही हैं। इसी में अब दो परमार भाइयों का नाम सामने आया है, जो अलग-अलग पार्टियों की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
तारापुर नगरपालिका वार्ड नंबर–6 से दो सगे भाई चुनाव मैदान में हैं। एक तरफ चंदुभाई माधाभाई परमार भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ पूनमभाई माधाभाई परमार कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। एक समय था जब दोनों भाई मिलकर सार्वजनिक जीवन में कार्य करते थे, लेकिन अब राजनीतिक विचारों और पार्टी भेद के कारण वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी बन गए हैं।
गौरतलब है कि पूनमभाई परमार दो बार विधायक रह चुके हैं। वे एक बार फिर कांग्रेस के बैनर तले अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं चंदुभाई परमार, अमूल के साथ अपने अनुभव के कारण लोकप्रिय हैं, और वे भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।
यह चुनावी मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच नहीं है, बल्कि यह रिश्तों और राजनीति के बीच टकराव का भी प्रतिबिंब है। एक ही घर के दो सदस्य अलग-अलग पार्टियों और विचारधाराओं के साथ चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे स्थानीय राजनीति में भी गर्मी आ गई है। यहां एक बात यह भी है कि नगरपालिका की पहली ही चुनाव में ऐसी स्थिति बनने से तारापुर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लोगों में चर्चा है कि इस बार मतदाता क्या चुनेंगे—परिवार का रिश्ता या राजनीतिक विचारधारा? अब यह बात तो मतदाता ही तय करेंगे और चुनाव के परिणाम के बाद ही पता चलेगा कि यहां से कौन बाजी मारने में सफल होता है।

