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अगर आपको अच्छी नींद नहीं आती, तो दांत भी चेक करवा लीजिए!
यह हेडलाइन पढ़कर शायद आपको लगे कि नींद और दांत का क्या संबंध है। लेकिन दोनों के बीच सीधा संबंध है। कई लोगों के दांत घिसे हुए होते हैं और टूट जाते हैं। उन्हें पता नहीं चलता कि ऐसा क्यों होता है। क्योंकि वे दांतों की बहुत देखभाल करते हैं। नियमित ब्रश करते हैं, फिर भी दांत क्यों घिसते या टूट जाते हैं। तो इसके पीछे का कारण है नींद। जिन लोगों को अच्छी नींद नहीं आती, उनके दांत घिसने की पूरी संभावना होती है।
क्योंकि कई बार नींद की समस्या का मूल कारण यही हो सकता है।
तो चलिए समझते हैं कि समस्या क्या होती है। मेडिकल साइंस में एक शब्द है ब्रुक्सिज़्म (Bruxism)। यह समस्या मतलब नींद के दौरान दांत पीसने की आदत। अब सवाल यह उठता है कि कोई व्यक्ति नींद में दांत क्यों पीसता है। तो इसका जवाब है कि
जब हम रात में सोते हैं, तब हमारी चेतना में बदलाव होता है। हम चेतना की ऐसी अवस्था में होते हैं जब हमारी इंद्रियां शांत होती हैं, लेकिन शरीर और मस्तिष्क लगातार काम कर रहे होते हैं। उस दौरान कई बार मस्तिष्क सामान्य से थोड़ा अधिक सक्रिय हो जाता है, जिसे माइक्रो अराउज़ल (micro-arousals) कहा जाता है। जब थोड़े समय के लिए मस्तिष्क अचानक जागता है—तो जबड़े की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं। इस स्थिति को स्लीप ब्रुक्सिज़्म (Sleep bruxism) कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप दांत कटकटाने लगते हैं, जबड़े में तनाव आता है और नींद बार-बार टूटती रहती है।

जब आप नींद से उठते हैं, तो सुबह जबड़े में दर्द, दांत संवेदनशील लगना, सिरदर्द रहना, नींद पूरी होने के बावजूद थकान महसूस होना—ये सिर्फ नींद की समस्या नहीं हैं, बल्कि दांत और जबड़े की समस्या के संकेत हैं।
कई मामलों में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) भी जिम्मेदार होता है। इस समस्या में शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे नींद में सांस कुछ समय के लिए रुक जाती है। शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है—जबड़े को हिलाकर हवा के रास्ते को खोलने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया के दौरान दांत पीसने की समस्या बढ़ती है और नींद और खराब हो जाती है।

ऐसा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आम तौर पर माना जाता है कि मानसिक तनाव भी एक कारण हो सकता है। चिंता, गुस्सा, दबे हुए भाव—यह सब सीधे जबड़े पर असर करते हैं। जब मन शांत नहीं होता, तो शरीर रात में उसका प्रभाव दिखाता है।
अगर आपको अच्छी नींद नहीं आती, तो केवल स्लीपिंग पिल्स की ओर न भागें। डेंटिस्ट के पास जाकर दांत और जबड़े की जांच भी करवा लें। क्योंकि अगर ब्रुक्सिज़्म समय पर पकड़ में आ जाए, तो दांत बच सकते हैं और नींद भी बेहतर हो सकती है।
तो इस समस्या का समाधान कैसे हो? निश्चित समाधान तो वही डेंटल एक्सपर्ट बता सकता है जिसने नींद के बारे में भी अध्ययन किया हो। हालांकि, कुछ ऐसे उपकरण हैं जो उपयोगी होते हैं। इन उपकरणों में स्लीप एप्लायंसेस या डेंटल गार्ड शामिल हैं। इससे दांत बचने के साथ-साथ नींद में भी सुधार होता है।
कभी-कभी शरीर छोटे संकेत देता है-सवाल यह है कि क्या हम उन्हें समझते हैं या नहीं। अगर अच्छी नींद नहीं आती… तो दांत चेक करवाना मत भूलिए।
About The Author
Dr. Risshi Bhatt is a dental surgeon specializing in TMJ disorders and facial pain. He leads the RR Dental and Maxillofacial Clinic, known for its integrated approach to jaw and sleep-related conditions. Passionate about patient education and preventive care, Dr. Bhatt bridges the gap between dentistry and overall wellness.

