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AAP की सभाओं में गोपाल..गोपाल के नारे क्यों लग रहे हैं!
फिलहाल स्थानीय स्वराज की चल रही चुनावों में आम आदमी पार्टी की प्रचार सभाओं में एक नई बात देखने को मिल रही है। विसावदर से आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया जब मंच पर बोलने के लिए खड़े होते हैं, तब गोपाल..गोपाल.. के नारे लोग लगा रहे हैं। गोपाल इटालिया गुजरात के युवा नेताओं में एक सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभर रहे हैं।
हमने गुजरात की राजनीति में अब तक सिर्फ एक व्यक्ति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे लगते देखे हैं। जब नरेंद्रभाई मंच पर भाषण देने जाते हैं, तब मोदी..मोदी.. के नारे लगते हैं। ऐसी ही स्थिति अब विधायक गोपाल इटालिया के लिए देखने को मिल रही है। गोपाल इटालिया के प्रशंसकों की संख्या पूरे गुजरात में बढ़ती नजर आ रही है।
गोपाल इटालिया के लिए नारे लगने के पीछे के कारण देखें तो वे विधायक बनने से पहले ही अपने प्रशंसकों और फॉलोअर्स का समूह बना चुके थे। वे आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति में सक्रिय थे। लेकिन तब उनकी इतनी लोकप्रियता नहीं थी। लेकिन जब उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री को जूता मारा, उसके बाद वे काफी चर्चा में आ गए। इसके बाद वे सूरत में कानूनी कथाओं के माध्यम से लोगों के बीच काम कर रहे थे। उन्होंने लगातार लोगों के बीच रहकर कुछ न कुछ काम किया। इसके बाद वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। उनकी इमेज को सबसे ज्यादा बढ़ावा सूरत महानगरपालिका की वर्ष 2021 की चुनाव में मिला। उनकी अगुवाई में आश्चर्यजनक रूप से पार्टी ने 27 कॉर्पोरेटरों को जिताया। इस बात ने पूरे देश में चर्चा पैदा की। नई पार्टी देश के एक महत्वपूर्ण शहर में, वह भी भाजपा के गढ़ में इतना बड़ा झटका दे, यह सबके लिए आश्चर्य था। फिर आई विधानसभा की चुनाव। इस चुनाव में गोपाल खुद नहीं जीत सके, लेकिन 5 विधायकों को जरूर जिताया। इसमें भी गोपाल का योगदान बड़ा था। फिर आई विसावदर की उपचुनाव। इस चुनाव में भाजपा के मजबूत उम्मीदवार को 17000 मतों से हराकर गोपाल ने खुद को एक राज्यस्तरीय सफल राजनेता के रूप में साबित किया।
गोपाल इटालिया की खासियत है निडरता। वे किसी भी बड़े या शक्तिशाली नेता के सामने स्पष्ट रूप से बोलने से नहीं डरते। इस कारण कई बार विवाद भी खड़े होते हैं। इसके अलावा वे सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग करना जानते हैं। किस समय क्या बयान देना है, किसके खिलाफ बयान देना है, कौन सा मुद्दा उठाना है, इसमें उन्हें महारत हासिल हो गई है। इसके अलावा वे लगातार सोशल मीडिया पर लाइव आकर लोगों से जुड़े रहते हैं। उनकी भाषण देने की शैली भी प्रभावशाली है। बहुत ही तार्किक तरीके से सरल उदाहरण देकर वे लोगों को अपनी बात समझाते हैं।
विसावदर की चुनाव के बाद विधायक बनने पर अभिवादन सभा में गोपाल इटालिया ने जब वराछा में भाषण दिया, तो इस भाषण का सार यह था कि उन्होंने सिर्फ विसावदर की चुनाव नहीं जीती, बल्कि मानो पूरा गुजरात जीत लिया हो। वे पूरे गुजरात के एक मजबूत युवा नेता के रूप में उभरकर सामने आए। शायद पहली बार तभी लोगों में से गोपाल..गोपाल.. के नारे लगने शुरू हुए। इसके बाद वर्तमान में चल रही चुनावों में भी ये नारे जारी हैं। अगर पाटीदार युवा नेताओं की बात करें तो एक समय था जब हार्दिक पटेल के नारे लगते थे। उनकी लोकप्रियता बहुत थी, लेकिन अब वे पीछे धकेल दिए गए हैं। आज अगर पूरे गुजरात में सबसे लोकप्रिय पाटीदार युवा नेताओं के नाम तय करने हों, तो गोपाल इटालिया का नाम सबसे आगे होगा, यह तय है। तो क्या गोपाल इटालिया गुजरात के केजरीवाल बन गए हैं...

