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पितृ दोष लगने के ये हैं 10 कारण
पितृ दोष कुंडली में एक दोष है, जो पितरों की असंतुष्टि के कारण होता है। पितृ दोष के कारण व्यक्ति को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और जीवन में उथल-पुथल की स्थिति बनी रहती है। पितृ दोष के कई कारण हो सकते हैं।
पितरों की अधूरी इच्छाएं: अगर किसी कारणवश हमारे पितरों की इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं और हम उन्हें पूरा नहीं कर पाते, तो यह पितृ दोष का एक प्रमुख कारण हो सकता है। ऐसा अधिकतर अकाल मृत्यु के कारण होता है।
श्राद्ध न करना: जो लोग श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण या श्राद्ध कर्म नहीं करते, उन्हें पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है। पिंडदान या श्राद्ध न करने से पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती और वे असंतुष्ट रहते हैं।
पितरों का अपमान: जो लोग जीवित रहते हुए अपने पितरों का अकारण अपमान करते हैं, उनके माता-पिता का सम्मान नहीं करते, उनकी इच्छाओं की अनदेखी करते हैं, इससे पितृ दोष लग सकता है।
उचित अंतिम संस्कार न करना: जिन लोगों का अंतिम संस्कार ठीक से नहीं किया जाता, उनकी आत्माएं तृप्त नहीं होतीं, जिसके कारण परिवार को पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है।
किसी असहाय व्यक्ति की हत्या करना: यदि कोई किसी असहाय व्यक्ति की हत्या करता है, तो उस व्यक्ति को पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है।
पवित्र वृक्षों को काटना: किसी भी पवित्र या पूजनीय वृक्ष को काटने से पितृ दोष लग सकता है। पीपल, बरगद या नीम जैसे पवित्र वृक्षों को काटने से पितृ दोष लग सकता है।
अंतिम संस्कार में त्रुटि: किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार विधि-विधान से न करने या उसकी उपेक्षा करने से पितृ दोष लगता है, क्योंकि इससे आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती।
पशु-हत्या: जो लोग बिना किसी कारण के पशुओं की हत्या करते हैं या उनका अपमान करते हैं, उन्हें पितृ दोष लग सकता है। पशु-हत्या पितृ दोष का कारण हो सकती है।
छल: जो लोग अपने मन में छल-कपट की भावना रखते हैं, या बदले की भावना रखते हैं, या किसी को धोखा देते हैं या संपत्ति के कारण गलत कदम उठाते हैं।
धार्मिक नियमों का पालन न करना: जो लोग अपने धार्मिक नियमों का पालन नहीं करते हैं। व्रत, त्यौहार, अमावस्या के दिन तामसिक भोजन और मांस-मदिरा का सेवन करते हैं, उन्हें पितृ दोष का सामना करना पड़ता है।
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