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राम मंदिर दान विवाद में अचानक क्या हुआ? PMO तक पहुंची शिकायत, महंत बोले- संदेह पैदा हो रहा है
राम मंदिर में दान राशि की कथित हेराफेरी का मामला अब केवल स्थानीय विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह विवाद प्रधानमंत्री कार्यालय ((PMO) तक पहुंच चुका है, क्योंकि भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को शिकायत पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र का अचानक अयोध्या दौरा चर्चा का विषय बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नृपेंद्र मिश्र सोमवार को अयोध्या पहुंचे और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों तथा मंदिर प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया और इसकी कार्यसूची को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई। ऐसे में उनके दौरे को चल रहे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि मंदिर की व्यवस्थाओं तथा विवाद से संबंधित रिपोर्ट शीर्ष स्तर तक पहुंच सकती है।
इसी बीच, इस मामले में एक और प्रमुख संत की एंट्री हुई है। महंत कमल नयन दास ने कहा कि यदि दान व्यवस्था में कहीं भी कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जांच एजेंसियों और जांच करने वालों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। उनके अनुसार, आरोप-प्रत्यारोप के इस माहौल में सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने भी चढ़ावे की राशि में अनियमितता की खबरों को निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से करोड़ों रुपये की अनियमितताओं की खबरें सामने आना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो भी जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं के मन में पैदा हुआ भ्रम दूर हो सके।
उधर, भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है, इसलिए दान, चढ़ावे और मंदिर प्रशासन से जुड़े किसी भी आरोप की पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो सच्चाई सामने आनी चाहिए, लेकिन यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पूरे मामले ने अब जवाबदेही, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को केंद्र में ला दिया है।

