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देश के संतों के बीच ये क्या चल रहा है… शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले आशुतोष महाराज पलटे
बोले- दबाव में दर्ज कराया गया मुकदमा, उन्होंने अब एक और संत पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए कौन हैं वो?
मथुरा। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण मामले में अब नया मोड़ आ गया है। दरअसल, उनके खिलाफ दो बटुकों से यौन शोषण का मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज पलट गए हैं। इस बार उन्होंने जो सोशल मीडिया पर अपना वीडियो डाला है और उसमें जो बातें कही है, वह काफी चौंकाने वाला है। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि यह मुकदमा दबाव में दर्ज कराया गया था। उनका कहना है कि उन्हें गुमराह किया गया और इस पूरे मामले में कुछ लोगों के साथ-साथ कुछ अधिकारियों की भी भूमिका रही है।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने उन पर दबाव बनाया था, जिसके कारण शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जरिए एक फर्जी मामला दर्ज करवाया गया। यही नहीं आशुतोष का कहना है कि उनके पास इस संबंध में सबूत और व्हाट्सएप चैट मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करेंगे और बताएंगे कि उन्हें इस विवाद में किस तरह शामिल किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य को कोई नुकसान पहुंचता है तो इसके लिए रामचंद्र दास जिम्मेदार होंगे।
वीडियो में आशुतोष ब्रह्मचारी ने रामचंद्र दास पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रामचंद्र दास उनके गुरु भाई हैं, लेकिन वह ढोंगी और फ्रॉडी हैं। आशुतोष ने कहा कि यह उनका दुर्भाग्य है कि वह उनके संपर्क में आए। उन्होंने यह भी कहा कि वह जगद्गुरु रामभद्राचार्य का सम्मान करते हैं और जीवनभर करते रहेंगे, लेकिन उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है।
आशुतोष महाराज ने अब रामचंद्र दास पर लगाए गंभीर आरोप
आशुतोष ने दावा किया कि रामचंद्र दास ने फर्जी वसीयत बनाकर श्री देव बाबा जी आश्रम पर कब्जा किया है। इस संबंध में उन्होंने मथुरा के एसएसपी को शिकायत भेजने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि पुलिस इस मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं करती है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि वह सत्य की लड़ाई लड़ेंगे और जिस तरह अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी, उसी तरह रामचंद्र दास के खिलाफ भी अदालत में जाएंगे। हालांकि, मथुरा के एसएसपी श्लोक कुमार ने कहा है कि उन्हें इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद
बता दें कि विवाद की शुरुआत प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान हुई थी। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके आठ दिन बाद, 24 जनवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी। शिकायत में माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे। आशुतोष ने बाद में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। इसके बाद 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को दो बच्चों को अदालत में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज किए गए। उसी दिन अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था मामला
उल्लेखनीय है कि एफआईआर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और दो से तीन अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में 25 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य और मुकुंदानंद को अग्रिम जमानत दे दी थी। इसके खिलाफ आशुतोष ब्रह्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत रद्द करने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
आशुतोष महाराज बार-बार रामचंद दास का नाम क्यों ले रहे हैं
आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा था कि यदि उनके गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य की हत्या होती है तो उसके लिए रामचंद्र दास जिम्मेदार होंगे। उन्होंने दावा किया था कि रामचंद्र दास उनके गुरु के खिलाफ साजिश कर रहे हैं और उनके पास इसके सबूत भी हैं। आशुतोष ने यह भी आरोप लगाया था कि रामचंद्र दास पहले भी गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं, लेकिन कुछ अधिकारियों ने उन्हें बचा लिया। साथ ही उन्होंने कहा था कि किसी भी बटुक या अन्य व्यक्ति के साथ यौन शोषण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और वह ऐसे मामलों में कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य का इस मामले में क्या कहना है?
आशुतोष महाराज के आरोपों पर तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का कहना है कि आशुतोष उनकी, उनकी पीठ और उनके उत्तराधिकारी रामचंद्र दास की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। रामभद्राचार्य ने कहा था कि आशुतोष का आपराधिक इतिहास जानने के बाद उन्हें डर लगने लगा है। उन्होंने कहा कि आशुतोष खुद को उनका शिष्य बताते हैं, लेकिन उन्हें उसके स्वभाव और मंशा की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी शिष्य द्वारा अपने गुरु की हत्या की आशंका जताना दुर्भाग्यपूर्ण है। रामभद्राचार्य ने कहा था कि उनके, उनकी पीठ और उनके उत्तराधिकारी की सुरक्षा को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे गंभीर हैं। उन्होंने संकेत दिया था कि इस मामले की जांच के लिए प्रशासन से भी बात की जाएगी और जो संवैधानिक रूप से उचित होगा, वही किया जाना चाहिए।
यदि मामला गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़ा हो तो उसे वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति जरूरी होती है। इसके लिए संबंधित पक्षों को अदालत में आवेदन देना पड़ता है और अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य भी पेश करने होते हैं। यदि यह साबित हो जाए कि किसी ने झूठी शिकायत या फर्जी एफआईआर दर्ज कराई थी, तो अदालत संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दे सकती है। इसके अलावा, जिस व्यक्ति को नुकसान पहुंचा है, वह मुआवजे और मानहानि का दावा भी कर सकता है।

