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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर क्यों मचा है बवाल, अब भाजपा के नेता ने ही पीएम को पत्र लिखकर जांच की मांग की
अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर मामला अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर में आए चढ़ावे में 7 करोड़ रुपए तक की कथित चोरी के दावे पर पीएमओ ने बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दरअसल, इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों जैसे सीबीआई और ईडी से कराई जाए, ताकि आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।
पूरा मामला क्या है, पहले यह जानना जरूरी है…
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के चढ़ावे में 5 करोड़ से लेकर साढ़े 7 करोड़ रुपए तक की चोरी हुई है। इसके बाद अखिलेश यादव ने भी मामले को उठाते हुए कहा था कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और मामले का संज्ञान अदालत को लेना चाहिए। इसी बीच मंगलवार को राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के सदस्यों के साथ बैठक की। यह बैठक राम मंदिर परिसर के एक बंद कमरे में करीब चार घंटे तक चली। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मंदिर को मिलने वाले चढ़ावे, उसके उपयोग और लेखा-जोखा से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को उठ रहे हैं
विपक्ष की ओर से भी राम मंदिर के चढ़ावे में घालमेल को लेकर लगातार मामला उठाया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर कथित चोरी के मामले पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि देश की सनातन आस्था से जुड़े इस विषय पर पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और यदि आरोप गलत हैं तो स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही।
मंदिर ट्रस्ट का इस मामले में क्या कहना है?
हालांकि, मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को लेकर सफाई दी है। ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह निगरानी और ऑडिट प्रक्रिया के तहत संचालित होती है। उन्होंने बताया कि समय-समय पर ट्रस्ट का आंतरिक ऑडिट कराया जाता है, जिसमें ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि शामिल रहते हैं। उनके अनुसार, अब तक ऑडिट में किसी प्रकार की अनियमितता सामने नहीं आई है।
भाजपा नेता डॉ. रजनीश ने आरोप की निष्पक्ष जांच की मांग की
भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने अपने पत्र में कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान, चढ़ावे और मंदिर प्रशासन से जुड़े किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि चढ़ावे की राशि एकत्र करने, उसकी गिनती, सुरक्षित रखरखाव और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराया जाए। साथ ही यदि किसी व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग
अखिलेश यादव ने सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यदि पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में होती है तो फुटेज जारी करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने चढ़ावे की गिनती जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
बता दें कि राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। बैंक कर्मचारी ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चढ़ावे की राशि की गिनती करते हैं। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है। गिनती के बाद रकम को रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और मंदिर परिसर में बने सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है। इसके बाद अगले दिन राशि बैंक खाते में जमा कर दी जाती है। ट्रस्ट का मुख्य बैंक खाता अयोध्या धाम स्थित भारतीय स्टेट बैंक में संचालित होता है। चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन के ऑडिट की निगरानी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) द्वारा की जाती है। मंदिर में प्राप्त होने वाले कुल चढ़ावे की जानकारी ट्रस्ट की बैठकों में साझा की जाती है।
दिसंबर 2025 में दी गई थी रकम की पूरी जानकारी
दिसंबर 2025 में हुई बैठक में बताया गया था कि ट्रस्ट को गठन के बाद से अब तक कुल 4,575 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। इनमें से मंदिर निर्माण, श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विस्तार, भूमि और भवन खरीद सहित विभिन्न कार्यों पर 2,475 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। उस समय ट्रस्ट के पास लगभग 2,100 करोड़ रुपए शेष थे।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है
गौरतलब है कि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी। इसके बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। मंदिर की आय का मुख्य स्रोत श्रद्धालुओं द्वारा दिया जाने वाला दान और बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी आरोप ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। फिलहाल आरोपों और दावों को लेकर विभिन्न पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि अब तक किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है।

