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गुजरात में किस दिन दस्तक देगा मानसून? अंबालाल पटेल ने बताया– बुवाई करना कब लाभदायक रहेगा
गुजरात के अधिकांश क्षेत्रों में गर्मी के कारण उमस भरा मौसम देखने को मिल रहा है। ऐसे में किसान मानसून की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान गुजरात में मौसम कुल मिलाकर शुष्क रहा। सौराष्ट्र-कच्छ तथा दीव, दमन, दादरा और नगर हवेली में भी मौसम सूखा रहा। गुजरात के तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। कच्छ के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहा, जबकि बाकी क्षेत्रों में मौसम सामान्य रहा। अहमदाबाद और राजकोट में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 41.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार, गुजरात के कुछ जिलों में आने वाले दिनों में बारिश से लोगों को राहत मिल सकती है। भारत में 4 जून को मानसून की शुरुआत दर्ज की गई थी, जिसके बाद से गुजरात में मानसून के आगमन का इंतजार किया जा रहा है। इस दौरान पिछले 24 घंटों में गुजरात का मौसम शुष्क रहा।
BBC गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग ने अपने ताजा बुलेटिन में भारत में मानसून की प्रगति और राज्य में आने वाले दिनों में बारिश की संभावना को लेकर जानकारी दी है। 4 जून से मानसून की शुरुआत के बाद, 8 जून 2026 को मानसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना के कुछ हिस्सों तक आगे बढ़ चुका है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में हरनाई, सोलापुर, कलबुर्गी और चेन्नई से होकर गुजर रही है। स्काइमेट वेदर के अनुसार, केरल में मानसून अरब सागर के प्रभाव के तहत विकसित होता है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मानसून की स्थिति बनने के लिए बंगाल की खाड़ी में कुछ मौसम प्रणालियों का बनना आवश्यक होता है। फिलहाल बंगाल की खाड़ी में ऐसी कोई प्रणाली सक्रिय नहीं है जो देश के दक्षिणी क्षेत्रों में मानसून को आगे बढ़ा सके।
पूर्व-पश्चिम ट्रफ रेखा कोंकण तट से उत्तर आंध्र प्रदेश तक महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बनी हुई है। इस ट्रफ रेखा के दोनों ओर 10 और 11 जून को प्री-मानसून वर्षा हो सकती है। हालांकि, इस वर्षा को मानसूनी गतिविधि का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के आंतरिक क्षेत्रों में मानसून को आगे बढ़ाने के लिए नई प्रणाली की आवश्यकता है। बंगाल की खाड़ी में एक सक्रिय मानसूनी प्रणाली का बनना बेहद जरूरी है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2-3 दिनों में अनुकूल परिस्थितियों के चलते मानसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, उत्तर भारत को लेकर मौसम विभाग ने बताया है कि 11 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके कारण दक्षिण-पश्चिमी से पश्चिमी हवाएं चल रही हैं।
गुजरात में आने वाले दिनों में कहां-कहां बारिश हो सकती है?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, गुजरात के कुछ क्षेत्रों में छिटपुट स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, 9 जून को दक्षिण गुजरात के डांग, तापी, नवसारी, वलसाड तथा दमन, दादरा और नगर हवेली में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम और गरज-चमक के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना है। वहीं उत्तर गुजरात, सौराष्ट्र-कच्छ और दीव, दमन, दादरा एवं नगर हवेली के अन्य क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है।
बुलेटिन के अनुसार, 10 जून को डांग, तापी, नवसारी, वलसाड तथा दमन, दादरा और नगर हवेली में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 11 जून को छोटाउदेपुर, नर्मदा, सूरत, डांग, तापी, नवसारी, वलसाड तथा दमन, दादरा और नगर हवेली में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है।
इसके अलावा गुजरात के अन्य क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। तापमान को लेकर मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले 7 दिनों के दौरान राज्य में तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान के मुताबिक गुजरात में 15 जून के बाद कभी भी आधिकारिक रूप से मानसून की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, मानसून के स्थापित होने से पहले ही राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियों के तहत जोरदार बारिश का माहौल देखने को मिल रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में अरब सागर और उसके आसपास एक साथ दो शक्तिशाली मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इन डबल सिस्टमों के सक्रिय होने के कारण अगले 3 दिनों तक पूरे गुजरात में हल्की से मध्यम बारिश की व्यापक संभावना जताई गई है। इनका सबसे अधिक प्रभाव सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के जिलों में देखने को मिलेगा, जहां तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं राज्य के अन्य भागों में बारिश के बावजूद गर्मी और असहनीय उमस बनी रह सकती है।
मौसम विशेषज्ञ अंबालाल पटेल ने कहा है कि गुजरात में 18 से 28 जून के बीच मानसून के प्रवेश की संभावना है। इसके बाद 29 जून से 7 जुलाई के बीच पूरा गुजरात मानसून के रंग में रंग जाएगा और विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा का माहौल देखने को मिलेगा। अंबालाल पटेल के अनुसार, 12 जून को दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। किसानों के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा है कि 22 जून के बाद ही बुवाई करना लाभदायक रहेगा, ताकि मानसून की स्थिरता और पर्याप्त नमी का उचित लाभ मिल सके।

