महंगाई और कितना रुलाएगी…उच्चतम स्तर पर खुदरा महंगाई दर, खाने-पीने की चीजें और परिवहन कर रहा जेबी ढीली, आगे भी राहत के आसार नहीं

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नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान जंग की वजह से महंगाई का असर अब आम आदमी की जेब पर सीधे दिखने लगा है। रसोई का बजट बढ़ रहा है, सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम ऊंचे बने हुए हैं, जबकि आने-जाने का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। दरअसल, गैस और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने से केंद्र सरकार सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा कर रही है। इस बीच आम आदमी के लिए एक और परेशानी बढ़ाने वाली खबर आई है। मई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% लक्ष्य के बेहद करीब है। जनवरी में महंगाई 2.74% थी, जो हर महीने बढ़ते हुए मई तक 3.93% हो गई। खाद्य वस्तुओं, परिवहन और कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी ने महंगाई को ऊपर धकेला है, जिससे आने वाले महीनों में आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 

महंगाई इसलिए तेजी से बढ़ रही है…

मई में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं और परिवहन लागत में तेजी रही। खाद्य महंगाई दर अप्रैल के 4.20% से बढ़कर 4.78% हो गई। वहीं ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन सेवाओं और अन्य वस्तुओं की लागत पर भी दिखाई देने लगा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मौसम संबंधी अनिश्चितताएं आने वाले महीनों में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। 

ग्रामीण इलाकों में भी महंगाई ने बढ़ाई परेशानी

मई के आंकड़ों में एक अहम बात यह भी सामने आई कि ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई शहरी इलाकों की तुलना में अधिक रही। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 4.85% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% रही। इससे संकेत मिलता है कि गांवों में रहने वाले परिवारों पर महंगाई का असर अपेक्षाकृत अधिक पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग की घरेलू बचत तथा खर्च करने की क्षमता पर पड़ता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है।

सोना-चांदी और धातुओं की बढ़ती कीमतों ने भी बढ़ाया दबाव

महंगाई के विभिन्न घटकों में सबसे तेज वृद्धि कीमती धातुओं और आभूषणों से जुड़ी श्रेणी में दर्ज की गई। सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण ज्वेलरी से जुड़ी वस्तुएं काफी महंगी हुई हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ने से सोने की कीमतों में लगातार मजबूती बनी हुई है। 

आरबीआई के लिए बढ़ रही है चुनौती, अपना सकता है सख्त रुख

महंगाई का बढ़ता रुझान RBI की मौद्रिक नीति समिति  के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि मौजूदा महंगाई अभी भी RBI के 2% से 6% के दायरे के भीतर है, लेकिन लगातार बढ़ते आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि मूल्य दबाव मजबूत हो रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि खाद्य और ईंधन महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो केंद्रीय बैंक को आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल RBI ने रेपो दर को स्थिर रखा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 

मानसून और तेल कीमतों पर टिकी नजर

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा काफी हद तक मानसून और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है या अल नीनो का असर बढ़ता है, तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर खाद्यान्न कीमतों पर पड़ेगा।
वहीं यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई और ऊपर जा सकती है। कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि ऐसी स्थिति में खुदरा महंगाई 5% के स्तर को भी पार कर सकती है। 

महंगाई को इस तरह से समझा जा सकता है

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) वह पैमाना है जिससे यह मापा जाता है कि आम उपभोक्ता द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसमें भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी श्रेणियां शामिल होती हैं। इसी के आधार पर खुदरा महंगाई दर तय की जाती है। RBI का महंगाई लक्ष्य 4% है। सरकार ने केंद्रीय बैंक को 4% महंगाई बनाए रखने का लक्ष्य दिया है, जिसमें 2% ऊपर या नीचे की छूट है। यानी 2% से 6% के बीच की महंगाई RBI के टॉलरेंस बैंड में मानी जाती है। मई 2026 में 3.93% की महंगाई इस दायरे के भीतर है, लेकिन यह लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच चुकी है। इसे ऐसे समझा जा सकता है…मान लीजिए कि यदि मई 2025 में कोई सामान 10 रुपये का था तो औसतन वही सामान मई 2026 में लगभग 13.93 रुपये का हो जाएगा। इसी तरह अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों से यह आकलन किया जा सकता है कि महंगाई किस तरह से आपकी जेब ढीली कर रहा है।

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