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इथेनॉल ब्लेंड ईंधन से बढ़ी चिंता, 43% लोगों ने नई गाड़ी खरीदने का फैसला टाल सकते हैं
भारत में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को बढ़ावा देने की सरकार की पहल अब ग्राहकों पर असर डाल रही है। यह ईंधन केवल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन खरीदने वालों की सोच को भी प्रभावित कर रहा है। हाल ही में किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि इथेनॉल ब्लेंड ईंधन को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में लोग नया वाहन खरीदने का फैसला टालने पर विचार कर रहे हैं।
लोकलसर्कल द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, अगले वर्ष वाहन खरीदने की योजना बना रहे 43 प्रतिशत संभावित खरीदार E20 पेट्रोल और भविष्य में E30 ईंधन के लागू होने को लेकर असमंजस में हैं। ऐसे में वे अपनी खरीद को टाल सकते हैं या अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
यह सर्वे देशभर के 311 जिलों में किया गया था और इसमें 28,000 से अधिक संभावित वाहन खरीदारों की राय ली गई थी। सर्वे में पाया गया कि ग्राहक यह जानना चाहते हैं कि उनके वर्तमान या नए वाहन उच्च-इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए कितने उपयुक्त होंगे और इसका वाहन के प्रदर्शन, रखरखाव तथा दीर्घकालिक लागत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में भले ही बिक्री मजबूत दिखाई दे रही हो, लेकिन इथेनॉल ब्लेंड ईंधन को लेकर ग्राहकों की बढ़ती चिंताएं ऑटोमोटिव उद्योग के लिए एक नई चुनौती बन रही हैं। सर्वे के परिणामों के अनुसार, कई लोग उपयुक्त ईंधन को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण नया वाहन खरीदने से बच रहे हैं।
सर्वेक्षणकर्ताओं ने बताया कि कम माइलेज, इंजन की टिकाऊपन और संभावित रूप से बढ़ा हुआ रखरखाव खर्च उनकी सबसे बड़ी चिंताएं हैं। यही कारण है कि कई संभावित खरीदार नए वाहन की खरीद का निर्णय टालने या उस पर पुनर्विचार करने का मन बना रहे हैं।
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र सरकार देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। E20 पेट्रोल, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है, पूरे देश में लागू किया जा चुका है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा और प्रदूषण में कमी की रणनीति के तहत सरकार ने E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च-इथेनॉल मिश्रित ईंधनों के लिए मानक भी प्रस्तावित किए हैं।

इस बदलाव के जवाब में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अप्रैल 2026 से E20 पेट्रोल के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) को इंजन प्रदर्शन, माइलेज और दीर्घकालिक प्रदर्शन पर E25 जैसे उच्च-इथेनॉल मिश्रित ईंधनों के प्रभाव का अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया है।
सर्वे में ये बातें सामने आईं: E20 और भविष्य के E30 ईंधन को लेकर बढ़ती अनिश्चितता वाहन खरीद के निर्णयों को प्रभावित कर रही है। 43 प्रतिशत संभावित खरीदार अगले 12 महीनों में नया वाहन खरीदना टाल सकते हैं या अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं। सर्वे में शामिल लोगों ने कम माइलेज, इंजन की आयु और बढ़े हुए रखरखाव खर्च को अपनी प्रमुख चिंता बताया। केवल 6 प्रतिशत लोगों ने नई पेट्रोल कार खरीदने में रुचि दिखाई, जबकि 7 प्रतिशत लोगों ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और 7 प्रतिशत लोगों ने हाइब्रिड वाहन खरीदने में रुचि दिखाई। इसका अर्थ है कि EV और हाइब्रिड वाहनों की कुल हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही, जो पेट्रोल वाहनों की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। 30 प्रतिशत लोगों ने फिलहाल वाहन खरीदने की कोई योजना नहीं बताई, जबकि 12 प्रतिशत खरीदार अभी भी निर्णय नहीं ले पाए हैं। हालांकि भारतीय ऑटो बाजार मजबूत बना हुआ है। FADA के अनुसार, मई 2026 में वाहन बिक्री 25 लाख यूनिट से अधिक रही, जबकि यात्री वाहन पंजीकरण पहली बार 4 लाख यूनिट से अधिक हो गया। 50,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक अन्य सर्वे में, पेट्रोल वाहन मालिकों में से आधे ने बताया कि 2025 की शुरुआत के बाद उनकी माइलेज 10 प्रतिशत से अधिक घट गई है। लगभग 30 प्रतिशत वाहन मालिकों ने फ्यूल पंप, इंजेक्टर और इंजन सिस्टम में घिसाव बढ़ने या रखरखाव खर्च बढ़ने की शिकायत की। 2023 से पहले खरीदे गए वाहनों के मालिकों ने माइलेज में कमी और रखरखाव खर्च में वृद्धि के कारण 5,000 रुपये से 25,000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च होने की जानकारी दी। कई ग्राहकों ने E0 या E10 जैसे कम-इथेनॉल मिश्रित ईंधन को जारी रखने की मांग की।

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है और इसे देशभर में मानक ईंधन के रूप में लागू किया गया है। यह मिश्रण भारत की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वहीं, E30 ईंधन में 30 प्रतिशत इथेनॉल और 70 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इसे भारत के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के अगले संभावित चरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाना तथा स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है।
देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, और सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा प्रदूषण कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है। यही कारण है कि इथेनॉल उत्पादन और इथेनॉल मिश्रण दोनों तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार के अनुसार, 31 अक्टूबर 2025 तक भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1,953 करोड़ लीटर प्रति वर्ष हो चुकी है।

