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अब सूरत में पहला वर्ष पढ़कर विदेश से डिग्री प्राप्त कर रहे हैं विद्यार्थी
वैश्विक शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब छात्र अपने शहर में रहकर डिग्री का पहला वर्ष पूरा कर सकते हैं और बाद के वर्षों के लिए विदेश जाकर पढ़ाई जारी रख सकते हैं। यह हाइब्रिड शिक्षा मॉडल अब केवल कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविकता बन चुका है। सूरत में ऑन ट्रैक एजुकेशन के माध्यम से छात्रों को यह अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।
विदेशी शिक्षा के क्षेत्र में 27 वर्षों के अनुभव के आधार पर मेरा मानना है कि भारत की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के बाद यह उच्च शिक्षा में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है।
पहले विदेश में पढ़ाई का मतलब सीधे अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन या ऑस्ट्रेलिया जाकर अध्ययन करना होता था। लेकिन अब दुनिया भर की यूनिवर्सिटियाँ ब्रांच कैंपस, ड्यूल डिग्री, जॉइंट डिग्री, ट्विनिंग प्रोग्राम और ऑनलाइन-ऑफलाइन मिश्रित शिक्षा मॉडल के माध्यम से वैश्विक शिक्षा को अधिक सुलभ बना रही हैं।

इस व्यवस्था में छात्र सूरत में रहकर अपना पहला वर्ष पूरा कर सकते हैं और साथ ही उस देश की संस्कृति, भाषा, शिक्षण पद्धति और शैक्षणिक वातावरण को समझ सकते हैं। विदेश जाने के बाद उन्हें पढ़ाई, रहने और पार्ट-टाइम काम करने में भी अधिक आसानी होती है।
गुजरात के लिए यह अवसर क्यों महत्वपूर्ण है?
गुजरात देश के सबसे वैश्विक दृष्टिकोण वाले राज्यों में से एक है। हर वर्ष अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट और अन्य शहरों से 50,000 से अधिक छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं।
हालांकि, बढ़ती शिक्षा लागत, वीज़ा से जुड़ी अनिश्चितताएँ और विदेशों में बढ़ते जीवन-यापन खर्च ने कई परिवारों के लिए विदेशी शिक्षा को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में हाइब्रिड और ट्रांसनेशनल शिक्षा मॉडल एक किफायती और व्यावहारिक समाधान प्रदान करते हैं, विशेष रूप से मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए।
गुजरात के GIFT City में ऑस्ट्रेलिया की Deakin University और University of Wollongong पहले ही अपने कैंपस शुरू कर चुकी हैं। वहीं, ब्रिटेन की University of Southampton को भी भारत में संचालन की मंजूरी मिल चुकी है। ऑन ट्रैक एजुकेशन, The WorldGrad के सहयोग से छात्रों को ऐसे अंतरराष्ट्रीय डिग्री मार्ग उपलब्ध करा रहा है।
क्रेडिट ट्रांसफर: भविष्य की कुंजी
नई शिक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है क्रेडिट पोर्टेबिलिटी। Academic Bank of Credits (ABC) जैसी पहल के माध्यम से छात्र विभिन्न संस्थानों में अर्जित किए गए शैक्षणिक क्रेडिट को जमा और ट्रांसफर कर सकते हैं।

आने वाले समय में भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच क्रेडिट ट्रांसफर और भी आसान होगा। छात्र अपना पहला वर्ष सूरत या अहमदाबाद में पूरा करके आगे की पढ़ाई विदेश की यूनिवर्सिटी में जारी रख सकेंगे। जो कभी एक सपना लगता था, वह अब तेजी से वास्तविकता बन रहा है।
गुजरात जैसे औद्योगिक राज्य के लिए यह विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों के लिए वैश्विक स्तर के कुशल पेशेवर तैयार होंगे।
आने वाले पाँच वर्षों में उच्च शिक्षा का स्वरूप काफी बदलने वाला है। छात्रों को अब केवल “भारत या विदेश” जैसी पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर नए वैश्विक शिक्षा विकल्पों को अपनाना होगा।
भारत की नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण का जो सपना देखा गया था, वह अब धीरे-धीरे साकार होता दिखाई दे रहा है।
About The Author
Director – Purple Patch Education / OnTrack Education, Surat
Mamta Dhiren Jani is a seasoned international education professional with over 27+ years of experience in student counselling and global academic placements. Over the course of her career, she has guided more than 15,000 students toward higher education opportunities across Australia, New Zealand, USA, UK, UAE, Canada, Singapore, Europe, and beyond. Before founding OnTrack Education, Mamta served as Country Head at Planet Education, where she was instrumental in shaping the organisation’s early growth. Today, as Director of Purple Patch Education LLP and OnTrack Education, she leads a team dedicated to quality counselling, student preparedness, and building meaningful, long-term institutional partnerships. Her practice is rooted in three core values — trust, transparency, and genuine student success — which have earned her and her team the confidence of thousands of families across India and beyond.

