- Hindi News
- टेक और ऑटाे
- ओला के साथ आखिर क्या हुआ? ₹53,000 करोड़ की कंपनी का वैल्यूएशन 99% तक लुढ़का
ओला के साथ आखिर क्या हुआ? ₹53,000 करोड़ की कंपनी का वैल्यूएशन 99% तक लुढ़का
अब ओला के लिए समय कठिन है। कंपनी ईवी स्कूटर बिक्री में TVS, Bajaj और Ather से काफी पीछे जा चुकी है। कई वादों के बावजूद उसके सर्विस सेंटर सूरत से लेकर जमशेदपुर तक स्कूटरों के कब्रिस्तान बन गए हैं। लेकिन अब कंपनी के मूल्यांकन में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। उसका बाजार मूल्य 99 प्रतिशत घट गया है। कुछ साल पहले $7.3 बिलियन के मूल्यांकन के साथ देश के सबसे मूल्यवान स्टार्टअप्स में से एक रही कंपनी का मूल्य अब घटकर $70 मिलियन रह गया है।
अमेरिका स्थित एसेट मैनेजमेंट फर्म वैनगार्ड ने यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) में दाखिल रिपोर्ट में खुलासा किया है कि उसने राइड-हेलिंग कंपनी ओला कंज्यूमर का मूल्यांकन घटाकर लगभग $70.3 मिलियन कर दिया है। यह मूल्यांकन ओला में वैनगार्ड की लगभग $728,000 की हिस्सेदारी पर आधारित है। वैनगार्ड ने 2015 में कंपनी में लगभग $51.7 मिलियन का निवेश किया था, जब ओला का मूल्य लगभग $5 बिलियन था। उसकी हिस्सेदारी के नवीनतम मूल्यांकन के आधार पर, ओला का मूल्य उस स्तर से लगभग 99 प्रतिशत गिर गया है जिस पर वैनगार्ड ने प्रारंभ में निवेश किया था।
यह पहली बार नहीं है जब वैनगार्ड ने एक समय भारत के एलन मस्क कहे जाने वाले भाविश अग्रवाल की कंपनी का मूल्यांकन घटाया हो। एंट्रेकर की रिपोर्ट के अनुसार, मैनेजमेंट फर्म ने पहले 2024 में मूल्यांकन घटाकर $1.88 बिलियन और 2025 में $1.25 बिलियन कर दिया था। जैसा कि हमने पहले बताया, 2021 में जब ओला पूरी रफ्तार में थी, तब उसका मूल्यांकन लगभग $7.3 बिलियन यानी ₹53,000 करोड़ था। आज की तारीख के हिसाब से यह आंकड़ा ₹670 करोड़ रह गया है।
हालांकि, यहां एक बात ध्यान में रखना जरूरी है। म्यूचुअल फंड और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा अपनी निजी संपत्तियों को दिए गए मूल्यांकन किसी कंपनी के वास्तविक बाजार मूल्य को पूरी तरह नहीं दर्शाते। ऐसे मूल्यांकन आंतरिक पद्धतियों, लिक्विडिटी डिस्काउंट, बाजार की स्थितियों और अन्य मान्यताओं से प्रभावित हो सकते हैं। ओला ने एंट्रेकर की रिपोर्ट पर कोई बयान जारी नहीं किया है।
मूल्यांकन में यह गिरावट ऐसे समय हुई है जब कंपनी अपना IPO लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की परिचालन आय 42 प्रतिशत घटकर ₹1,171 करोड़ रह गई, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹2,012 करोड़ थी। उसका शुद्ध घाटा भी ₹329 करोड़ से बढ़कर ₹662 करोड़ हो गया है। कंपनी को सड़क पर उबर और रैपिडो जैसे प्रतिस्पर्धियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। विनफास्ट जैसी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों ने भी टैक्सी कारोबार में प्रवेश कर लिया है। ओला के लिए आगे का रास्ता धुंधला नजर आ रहा है।

