ब्रिटेन में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, PM की घोषणा

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ब्रिटेन सरकार 16 वर्ष से कम आयु के किशोरों के लिए कई सोशल मीडिया एप्लिकेशनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगी। सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए ब्रिटिश PM कीर स्टारमर ने इस निर्णय को ‘देश के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा क्षण’ बताया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए PM स्टारमर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय के खिलाफ कोई प्रौद्योगिकी कंपनी बाधा खड़ी करेगी, तो सरकार उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगी। उन्होंने कहा, ‘मैं हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी खुशियों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूं।’ सरकार का यह निर्णय बच्चों को इंटरनेट पर उपलब्ध हानिकारक सामग्री और अत्यधिक स्क्रीन समय (Excessive Screen Time) से बचाने के लिए लिया गया है।

ब्रिटेन का यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के वैश्विक अभियान का हिस्सा है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राज़ील और इंडोनेशिया जैसे देश या तो इस संबंध में कानून बना चुके हैं या बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर आयु-आधारित प्रतिबंध लागू कर चुके हैं। इसके अलावा फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इस प्रकार के कानून लाने के लिए अध्ययन और तैयारी कर रहे हैं।

PM स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन जो कदम उठाने जा रहा है, वह ऑस्ट्रेलिया के प्रतिबंध से भी ‘कुछ अधिक सख्त’ हो सकता है। उल्लेखनीय है कि ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर प्रतिबंध है और यदि टेक कंपनियां ऐसे अकाउंट नहीं हटाती हैं, तो उन पर करोड़ों डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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ब्रिटेन सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंध स्नैपचैट (Snapchat), टिकटॉक (TikTok), यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook) और एक्स (X - पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्मों पर लागू होगा। हालांकि, व्हाट्सऐप (WhatsApp) और सिग्नल (Signal) जैसी मैसेजिंग सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है।

इसके साथ ही PM ने कहा कि गेमिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों पर अजनबी लोग बच्चों से संपर्क न कर सकें, इसके लिए भी सरकार कड़े कदम उठाएगी। यह कानून अगले वर्ष की शुरुआत में ही लागू हो जाएगा।

लगभग दो वर्ष पहले ही सत्ता में आए PM कीर स्टारमर इस समय अपनी ही पार्टी के सदस्यों के भारी दबाव का सामना कर रहे हैं। पार्टी के कुछ नेता उनके कमजोर नेतृत्व से नाराज़ हैं और आने वाले दिनों या हफ्तों में उनके नेतृत्व को चुनौती दी जा सकती है। ऐसी स्थिति के बीच वे एक ऐसा बड़ा और निर्णायक कानून लाना चाहते हैं जो उनकी स्थायी पहचान (Legacy) बन सके।

अपने दो किशोर बच्चों के पिता होने का उल्लेख करते हुए PM ने कहा कि इस प्रतिबंध की सफलता तभी मानी जाएगी जब ‘सोशल मीडिया पर बच्चों की संख्या में बड़ा कमी आए’ और समाज में ऐसा ‘सांस्कृतिक परिवर्तन हो कि बच्चे सोशल मीडिया के बिना भी अलग तरीके से बड़े हो सकें।’

कुछ बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की शंकाओं के बावजूद, स्टारमर ने दृढ़ता से कहा कि सरकार को पूरा विश्वास है कि यह प्रतिबंध प्रभावी साबित होगा।

यह निर्णय लेने से पहले सरकार ने जनता से राय मांगी थी, जिसमें अभिभावकों, टेक इंडस्ट्री और बच्चों की ओर से लगभग 1,16,000 प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं। ब्रिटेन के इतिहास में वर्ष 2012 में समलैंगिक विवाह के संबंध में मांगी गई राय के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा जनप्रतिसाद है।

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सरकार ने घोषणा की है कि राय देने वालों में से 90% से अधिक लोग 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए इस प्रतिबंध के पक्ष में थे।

पीड़ित परिवार का स्वागत, लेकिन अन्य सुविधाओं की भी मांग

वर्ष 2023 में ऑनलाइन हानिकारक सामग्री देखकर उकसाए गए दो किशोरों के हाथों जान गंवाने वाली 16 वर्षीय ब्रिआना घे की मां, एस्थर घे ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध से ‘संभवतः कई निर्दोष बच्चों की जान बचाई जा सकेगी,’ लेकिन इसके साथ अन्य पूरक कदम भी आवश्यक हैं।

BBC से बातचीत में उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, ‘यह अच्छी बात है कि सरकार अब स्कूल के बाद की अन्य गतिविधियों (After-school Clubs) में निवेश कर रही है, क्योंकि हम बच्चों से केवल चीजें छीन नहीं सकते, उन्हें विकल्प भी देने होंगे।’

इस कानून के कारण ब्रिटेन और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में चेतावनी दी है कि ऐसे नियम सीमित होने चाहिए ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आंच न आए। अमेरिका ने यह चिंता भी व्यक्त की है कि इन नियमों से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा।

हालांकि, PM स्टारमर ने कहा कि वे सोमवार से फ्रांस में शुरू हो रहे G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं सचमुच मानता हूं कि दुनिया के सभी नेताओं में यह स्वीकार्यता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। इसमें कोई विवाद नहीं है। हां, इसकी सीमाएं क्या हों और नियम कैसे हों, इस पर चर्चा अवश्य हो सकती है, लेकिन मैं इसे कोई बड़ी समस्या नहीं मानता।’

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दूसरी ओर, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के कम्युनिकेशन सिस्टम्स के प्रोफेसर जॉन क्रॉक्रॉफ्ट का मानना है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का समर्थन करने वालों का उद्देश्य अच्छा हो सकता है, लेकिन यह दृष्टिकोण शायद गलत है। ऐसे बदलावों के कारण बच्चे अपने काम या आवश्यक वेबसाइटों से भी वंचित हो सकते हैं।

प्रोफेसर क्रॉक्रॉफ्ट ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘इस प्रतिबंध के कारण यह बड़ा जोखिम पैदा होगा कि उपयोगकर्ता और भी खराब या डार्क साइट्स की ओर चले जाएंगे। इसके अलावा, बच्चों के व्यक्तिगत उपकरणों (मोबाइल-टैबलेट) पर निगरानी रखना तकनीकी रूप से लगभग असंभव है। इसके बजाय प्लेटफॉर्मों पर नियंत्रण लागू करना अधिक आसान है, यदि नियामक थोड़ी मेहनत करने को तैयार हों।’

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