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लखनऊ: 'भाजपा के लिए धर्म नहीं, धन मायने रखता है' राम मंदिर मामले पर अखिलेश यादव का तंज
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती वस्तुओं के कथित गायब होने के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए तीखा हमला बोला है। इसके साथ ही उन्होंने सपा द्वारा जारी 'ऑडिट 2' के तहत 'राम नगरी में गोरखधंधा' बुकलेट का हवाला देते हुए गोरखपुर में प्राइमरी स्कूल बंद होने, दलितों के खिलाफ अपराध और पब्लिक हेल्थ से जुड़े आंकड़े पेश कर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म और आस्था का राजनीतिक लाभ लेने में लगी हुई है।
बुधवार को लखनऊ में स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यदि मंदिर में चढ़ावे या दान से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि मंदिर में चढ़ाई गई कीमती वस्तुओं और दान का पूरा हिसाब-किताब क्या है।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, 'भाजपा के लिए धर्म का मतलब सिर्फ धन रह गया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने धार्मिक भावनाओं को राजनीति का माध्यम बना लिया है और अब जब सवाल जवाबदेही का उठ रहा है तो सरकार और संबंधित संस्थाएं स्पष्ट जवाब देने से बच रही हैं।
सीसीटीवी गायब होने पर अखिलेश का तंज
सपा प्रमुख ने अयोध्या मामले पर चुटकी लेते हुए कहा कि जहां भी चुनावों गड़बड़ी हुई थी, वहां सीसीटीवी नहीं मिले थे। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी से 'सीसी' का राज खुल जाएगा, जिसका मतलब 'चढ़ावा चोरी' और 'चंदा चोरी' है। उन्होंने मांग की कि मंदिर में प्राप्त दान, चढ़ावे और बहुमूल्य वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए ताकि किसी प्रकार की आशंका या विवाद की गुंजाइश न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर में दान करते हैं। ऐसे में यदि चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े होते हैं तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय भी है।
हालांकि भाजपा और मंदिर प्रबंधन से जुड़े पक्षों की ओर से पहले भी ऐसे आरोपों को निराधार बताया जाता रहा है और कहा गया है कि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाती हैं। इसके बावजूद विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर बना हुआ है।
2027 चुनाव को लेकर रणनीति
समाजवादी पार्टी साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए की जा रही है। पार्टी कार्यालय में समाजवादी ब्राह्मण सभा के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। जिसमें पार्टी को मजबूत बनाने और 2027 चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई।

