अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म होने से भारत को कितना बड़ा फायदा? क्या ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने से महंगाई से मिलेगी राहत?

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और जंग अब समाप्त हो चुका है। दोनों देशों के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौत पर हस्ताक्षर हो गए हैं। फ्रांस के वर्साय पैलेसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इससे जुड़े एमओयू पर साइन किये। खास बात यह रही कि ट्रम्प के साइन के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी अपने देश से ही इलेक्ट्रॉनिक दस्तखत किये। इस साइन के साथ ही यह समझौता तत्काल प्रभाव के साथ लागू हो गया। यह खबर भारत के लिए बड़ी राहत भरी है। इसका सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।   बता दें कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम और समझौते की दिशा में हुई प्रगति से भारतीय शेयर बाजार में उल्लास का माहौल है। शेयर बाजार एक बार फिर से झूमने लगा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध समाप्त होने से भारत को तेल आयात, महंगाई नियंत्रण, व्यापार, निवेश और समुद्री परिवहन जैसे कई क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। 

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। पश्चिम एशिया से आने वाले तेल का महत्वपूर्ण भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के दौरान इस समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति बाधित होने की हो गई थी। हालिया समझौते के बाद इस मार्ग के सामान्य होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत को राहत मिल सकती है। 

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अब कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित होने लगता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। कुछ वित्तीय संस्थानों ने भी तेल कीमतों के अनुमान घटाए हैं और माना है कि आपूर्ति सामान्य होने पर बाजार में स्थिरता लौट सकती है। 

तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारत को

तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारत को मिलेगा। सरकार का आयात बिल कम होगा और विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा। इससे चालू खाते का घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर भी सरकार कुछ राहत दे सकती है। ऊर्जा लागत कम होने से उद्योगों का उत्पादन खर्च घटेगा और उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।
बता दें कि युद्ध के दौरान तेल महंगा होने पर परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादों तक पहुंचता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष की वजह से अतंरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में काफी उछाल आया था, इसका असर भारत पर भी देखने को मिला था। इसलिए संघर्ष समाप्त होने से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।

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होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए कितना उपयोगी है?

भारत के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू समुद्री व्यापार है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। युद्ध के दौरान जहाजरानी, बीमा और माल ढुलाई लागत बढ़ जाती है। शांति स्थापित होने पर शिपिंग लागत में कमी आ सकती है, जिससे भारत के आयात-निर्यात कारोबार को फायदा मिलेगा। 

भारत में विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ेगा

विदेशी निवेश के मोर्चे पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। जब वैश्विक तनाव कम होता है, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। स्थिर अंतरराष्ट्रीय माहौल उभरती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश को प्रोत्साहित करता है। भारत जैसे बड़े बाजार को इसका लाभ मिल सकता है, क्योंकि विदेशी निवेशक जोखिम कम होने पर पूंजी निवेश बढ़ा सकते हैं, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा।

उर्वरक की सप्लाई भी सामान्य होने से किसानों को राहत

उर्वरक क्षेत्र में भी भारत को राहत मिलने की संभावना है। पश्चिम एशिया से आने वाले कई कच्चे पदार्थ और उर्वरक उत्पाद युद्ध के कारण प्रभावित हुए थे। हालांकि उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन संघर्ष समाप्त होने से उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को स्थिरता मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि क्षेत्र को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

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विशेषज्ञों का युद्ध विराम पर क्या कहना है?

हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि केवल युद्ध विराम की घोषणा से सभी आर्थिक समस्याएं तुरंत समाप्त नहीं होंगी। तेल और गैस आपूर्ति, बंदरगाह संचालन तथा उत्पादन इकाइयों को पूरी तरह सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। इसलिए भारत को ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और रणनीतिक भंडार बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी रखने होंगे।  कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति स्थापित होने पर भारत को सबसे बड़ा लाभ सस्ते तेल, कम महंगाई, सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति, बेहतर व्यापारिक माहौल और मजबूत निवेश वातावरण के रूप में मिल सकता है। यही कारण है कि वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत भी इस क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद कर रहा है।

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