- Hindi News
- धर्म ज्योतिष
- अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर योगी बोले- 15 दिनों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा; क्या
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर योगी बोले- 15 दिनों में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा; क्या सच सामने आएगा? जानें अब तक क्या हुआ?
अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और अगर किसी ने गड़बड़ी की है तो उसे किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक किसी तरह की अफवाह या अनावश्यक बयानबाजी से बचें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है और इसके बारे में बिना तथ्यों के टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और यह टीम अगले 15 दिनों के भीतर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने का काम करेगी।
वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अगर किसी के पास कोई सबूत या जानकारी है तो वह उसे जांच टीम को सौंपे। बिना सबूत के आरोप लगाने से केवल भ्रम की स्थिति पैदा होती है। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी।’
बोले- रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले आज उपदेश दे रहे हैं
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों और राम मंदिर की चिंता जताने की बात कर रहे हैं, उनका पुराना रिकॉर्ड सबके सामने है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारसेवकों और रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग आज राम मंदिर को लेकर उपदेश दे रहे हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को आत्ममंथन करना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस पर हमला बोलते हुए योगी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का रास्ता रोकने के लिए कांग्रेस ने हर संभव कोशिश की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने अदालत में भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वही लोग अब अयोध्या और राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
अयोध्या को बदनाम करने की साजिश नहीं होगी सफल
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग अयोध्या की बढ़ती पहचान और विकास को पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रही थी, लेकिन आज यह दुनिया के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल हो रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह के दुष्प्रचार या अफवाहों के बहकावे में न आएं। योगी ने कहा कि राम मंदिर और अयोध्या की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘रामभक्तों ने 500 वर्षों तक संघर्ष किया है। ऐसे में कुछ दिनों का और इंतजार कर लें। जांच पूरी होने दीजिए। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।‘
आइए जानते हैं कैसे शुरू हुआ चढ़ावा चोरी का विवाद?
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से 5 करोड़ से लेकर 7.5 करोड़ रुपए तक की रकम गायब हुई है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ट्रस्ट के पास ऐसी किसी चोरी की पुष्टि नहीं हुई है। मामले ने राजनीतिक रूप लिया तो भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी थी।
अब तक इस मामले में क्या-क्या कार्रवाई हुई
जांच के दौरान पांच लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर शामिल बताए जा रहे हैं। ये सभी किसी न किसी रूप में मंदिर की दान राशि की गिनती या उससे जुड़ी प्रक्रिया में शामिल रहे हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई में अब तक लगभग दो करोड़ रुपए की रिकवरी होने की बात सामने आई है। वहीं मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारी रामशंकर यादव के घर से सोना मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि बरामद सोने की मात्रा और उसकी वास्तविक स्थिति को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एसआईटी ने अब तक किन-किन लोगों से पूछताछ की
एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से पूछताछ की है। साथ ही उन कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई जिन पर शुरुआती स्तर पर संदेह जताया गया था। वहीं, जांच अधिकारियों ने बैंक प्रतिनिधियों और नोटों की गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के अधिकारियों से पूछताछ की। बैंक रिकॉर्ड और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले गए। एसआईटी ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से भी विस्तार से पूछताछ की। टीम ने दान राशि की गिनती, उसके रखरखाव और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया को समझा। इसके अलावा कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी जिम्मेदारियों को लेकर भी जानकारी जुटाई गई। अब पूरे मामले की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस मामले से जुड़े कुछ अहम बातें
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि जांच किसी दबाव में नहीं होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, कार्रवाई तय है।
- विपक्ष लगातार मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

