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‘राम-कृष्ण में भेद करने वाला महापापी’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भड़के संत
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना को लेकर विवादों में आ गए हैं। उन्होंने राम को सीधा और कृष्ण को टेढ़ा बताया था। शास्त्री ने एक कथा के दौरान कहा था कि कृष्ण तीन जगहों से टेढ़े हैं और बांसुरी बजाना कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन धनुष चलाना एक बड़ा काम है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। धीरेंद्र शास्त्री की इस टिप्पणी पर संत समाज की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। आइए जानते हैं कि संत समाज उनके इस बयान पर क्या कह रहा है।
धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि राम और कृष्ण के बीच भेद करना सनातन परंपरा के खिलाफ है। भगवान एक ही हैं, बस अपनी लीलाओं के अनुसार रूप बदलते हैं। व्यास पीठ से इस तरह की तुलना करना भक्तों में भ्रम पैदा करता है। उन्होंने कहा कि वृंदावन के संत समाज को इस बयान से गहरी ठेस पहुंची है और धीरेंद्र शास्त्री को अपने शब्दों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्हें सनातन धर्म को विभाजित करने वाले बयान नहीं देने चाहिए। हम सभी संत एक हैं और ईश्वर भी एक ही हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद महाराज ने कहा कि राम और कृष्ण में मेरा-तेरा कहना गलत है। ईश्वर एक हैं। वही 'ब्रह्म' हैं, वही 'परमात्मा' हैं और वही भगवान हैं। भागवत पुराण की भ्रमर गीता में गोपियां कहती हैं कि यही कृष्ण त्रेतायुग में भगवान राम थे, जिन्होंने एक बार छिपकर बाली का वध किया था। वही आज कृष्ण हैं। नारायण के चरणों के नाखूनों से गंगा निकली, जिससे संसार पापमुक्त होता है। उनके चरणों की धूल से ही अहिल्या का उद्धार हुआ था। जो कोई राम, शिव और कृष्ण के बीच भेद करता है, वह महापापी होता है। भक्तों को राम भक्त और कृष्ण भक्त के रूप में बांटना नहीं चाहिए।
साध्वी कृष्ण प्रिया ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ईश्वर एक ही हैं और राम-कृष्ण भी एक ही हैं। उनके बीच कोई भेद नहीं है। गोपियों ने अगर गालियां दीं, तो वह प्रेम की पराकाष्ठा थी, भेदभाव नहीं। राम और कृष्ण के बीच अंतर करने से सनातन परंपरा की एकता को खतरा हो सकता है और विधर्मियों को सनातन धर्म का मजाक उड़ाने का मौका मिल सकता है। व्यास पीठ की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। कृष्ण सुदर्शन चक्र भी चलाते हैं और धनुष भी, वे बांसुरी भी बजाते हैं। उन्होंने भरी सभा में द्रौपदी की लाज भी बचाई थी। ऐसा कोई सामान्य मनुष्य नहीं कर सकता।
वहीं, आध्यात्मिक गुरु आचार्य बद्रीश महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जबकि कृष्ण लीला पुरुषोत्तम हैं। कृष्ण का स्वरूप बचपन से ही टेढ़ा है, इसलिए उन्हें बांके बिहारी कहा जाता है। उनका मुकुट टेढ़ा है, बांसुरी टेढ़ी है और चितवन भी टेढ़ी है। राम नाम सीधा और सरल है, जबकि कृष्ण का नाम लेने में भाव की जरूरत होती है। जिस तरह बांसुरी मन रूपी मछली को अपनी ओर खींच लेती है, उसी तरह श्रीकृष्ण मन को हर लेते हैं। शास्त्रीजी ने यह बात 'रसिक भाव' और विनोद में कही है। इसमें कोई विवाद नहीं है। इसमें गहरा रस और आनंद है।

