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भारतीय छात्रों को अचानक जापान जाकर पढ़ाई करना क्यों पसंद आ रहा है?
पिछले कुछ महीनों से मेरे काउंसलिंग रूम में एक सवाल बार-बार सुनने को मिल रहा है: “मैम, जापान के बारे में आपकी क्या राय है?”
दो साल पहले शायद ही कोई ऐसा सवाल पूछता था। लेकिन आज गुजरात और सूरत के ऐसे छात्र और अभिभावक, जिनकी विदेश में पढ़ाई के लिए अब तक पहली पसंद केवल अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया हुआ करती थी, वे अब अपनी सूची में पांचवें देश के रूप में जापान को भी शामिल कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या बदल गया है? आइए, समझते हैं कि आंकड़े क्या कहते हैं और मैं अभिभावकों को इस बारे में ईमानदारी से क्या सलाह देती हूं।
सबसे पहले, आंकड़ों की वास्तविकता समझिए
जापान अभी भारतीय छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर पसंदीदा स्टडी डेस्टिनेशन नहीं बना है। जापान स्टूडेंट सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन (JASSO) के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2024 में जापान में भारतीय छात्रों की संख्या केवल लगभग 1,685 थी। इसकी तुलना में चीन से करीब 1,23,000 और नेपाल से लगभग 65,000 छात्र जापान में पढ़ाई के लिए गए थे।
लेकिन चर्चा का विषय छात्रों की संख्या नहीं, बल्कि बदलती दिशा है। JASSO के अनुसार, मई 2025 तक जापान में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 4,08,069 हो गई थी, जो एक वर्ष में 21.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। जापान स्पष्ट रूप से इन छात्रों में भारतीयों की संख्या भी बढ़ाना चाहता है।
कारण 1: दूसरे देशों के विकल्प अब अधिक सीमित होते जा रहे हैं
वर्षों तक भारतीय छात्रों का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी भाषी कुछ चुनिंदा देशों की ओर जाता रहा है। अब यह स्थिति बदल रही है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2025 में अमेरिका ने नए स्टूडेंट वीजा पहले की तुलना में काफी कम जारी किए। भारत के विदेश मंत्रालय का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 5.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कई वर्षों बाद पहली बार ऐसा हुआ।
जब पारंपरिक विकल्पों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो समझदार परिवार दूसरे विकल्पों पर भी विचार करने लगते हैं।

कारण 2: भारत और जापान एक-दूसरे को सक्रिय रूप से आमंत्रित कर रहे हैं
दोनों देशों की सरकारों ने पांच वर्षों में 5 लाख से अधिक लोगों के बीच आदान-प्रदान का लक्ष्य घोषित किया है। इसमें जापान में काम करने जाने वाले 50,000 उच्च कौशल वाले भारतीयों को भी शामिल किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी जापान ने भारतीय छात्रों की संख्या हजारों तक बढ़ाने की बात कही है। इसके लिए जापान सरकार की MEXT स्कॉलरशिप सहित विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारत में जापान के दूतावास के माध्यम से भी MEXT स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया जा सकता है।
जनवरी 2026 में भारतीय वाइस चांसलर्स ने जापान का दौरा किया था।[4] JGU जैसे भारतीय विश्वविद्यालय भी जापानी शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी विकसित कर रहे हैं।[5]
कारण 3: जापान को प्रतिभाशाली युवाओं की जरूरत है
जापान में बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ रहा है और वहां लंबे समय से श्रमबल की कमी बनी हुई है। खासकर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में यह समस्या अधिक दिखाई देती है।
इस वजह से भारत जैसे देशों के शिक्षित और कुशल युवा जापान के विश्वविद्यालयों और कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बन रहे हैं। छात्रों के लिए इसका अर्थ यह हो सकता है कि वे ऐसे देश में पढ़ाई और करियर बना सकें, जो उनकी सफलता में रुचि रखता है।
कारण 4: विज्ञान और टेक्नोलॉजी में जापान की मजबूत स्थिति
जापान इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मटेरियल्स साइंस और अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान रखता है। इन क्षेत्रों में पढ़ाई करने वाले छात्र जापान की रिसर्च संस्कृति और वहां के विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए इसे एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
वास्तविकता: जापान में पढ़ाई करना किन कारणों से मुश्किल हो सकता है?
अगर मैं परिवारों को केवल आकर्षक पहलुओं के बारे में बताऊं, तो यह उनके साथ अन्याय होगा।
भाषा: कई छात्रों के लिए जापानी भाषा सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले कोर्स उपलब्ध हैं, लेकिन रोजमर्रा के जीवन और कई नौकरियों के लिए जापानी भाषा का ज्ञान जरूरी हो सकता है।
करियर का स्पष्ट रास्ता: जिन देशों में पढ़ाई के बाद काम करने की लंबे समय से स्थापित व्यवस्था है, उनकी तुलना में जापान में भारतीय स्नातकों के लिए करियर और वर्क परमिट की प्रक्रिया अभी विकसित हो रही है। भारत में भी नीतिगत स्तर पर इस प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और सरल बनाने की जरूरत व्यक्त की गई है।

छोटा भारतीय समुदाय: भारतीय छात्रों की संख्या कम होने के कारण, खासकर बड़े शहरों से बाहर, परिचित लोगों और सहयोगी नेटवर्क की कमी महसूस हो सकती है।
खर्च और संस्कृति: टोक्यो और ओसाका जैसे शहरों में रहने का खर्च अधिक हो सकता है। जापान की कार्यसंस्कृति, अनुशासन और सामाजिक व्यवहार के अनुरूप ढलने में भी समय लग सकता है।
पहले से योजना बनाना जरूरी: MEXT जैसी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया आमतौर पर काफी पहले शुरू होती है। इसलिए देर से तैयारी शुरू करने वाले छात्र अवसर गंवा सकते हैं।
किन छात्रों को जापान पर गंभीरता से विचार करना चाहिए?
इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, विज्ञान या डिजाइन क्षेत्र के ऐसे छात्र, जिनकी रिसर्च में रुचि है।
वे छात्र जो जापानी भाषा को केवल पढ़ाई की औपचारिकता नहीं, बल्कि गंभीरता से सीखने के लिए तैयार हैं।
ऐसे परिवार जो सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण को महत्व देते हैं और पहले से योजना बनाने के लिए तैयार हैं।
वे छात्र जिनके पास जापान चुनने के पीछे कोर्स, बजट और करियर का स्पष्ट उद्देश्य है।
शुरुआत करने के लिए पांच आसान कदम
सबसे पहले अपने कोर्स और करियर का उद्देश्य तय करें, उसके बाद देश चुनें।
अंग्रेजी और जापानी भाषा में पढ़ाए जाने वाले कोर्स की अलग-अलग सूची बनाएं।
स्कॉलरशिप की समय-सीमा कम से कम एक वर्ष पहले जांचें।
जापानी भाषा सीखना जल्द शुरू करें।
वीजा आवेदन के लिए वित्तीय दस्तावेज स्पष्ट, सुसंगत और व्यवस्थित तरीके से तैयार रखें।

अभिभावकों को मेरी सलाह
जापान एक आकर्षक विकल्प है, लेकिन यह कोई शॉर्टकट नहीं है। जो परिवार सही कारणों से जापान चुनते हैं, पहले से तैयारी करते हैं और निर्णय लेने से पहले किसी ईमानदार काउंसलर से सलाह लेते हैं, वे बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।
यदि आपके बच्चे की भाषा सीखने की तैयारी और पढ़ाई एवं करियर की योजना जापान के अनुकूल है, तो यह एक बेहतरीन और लाभदायक विकल्प साबित हो सकता है। यदि ऐसा नहीं है, तो विदेश में पढ़ाई के दूसरे विकल्प भी खुले हैं।
देश का चुनाव केवल किसी ट्रेंड को देखकर नहीं, बल्कि छात्र की क्षमता, रुचि, बजट और भविष्य की करियर संभावनाओं को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
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About The Author
Director – Purple Patch Education / OnTrack Education, Surat
Mamta Dhiren Jani is a seasoned international education professional with over 27+ years of experience in student counselling and global academic placements. Over the course of her career, she has guided more than 15,000 students toward higher education opportunities across Australia, New Zealand, USA, UK, UAE, Canada, Singapore, Europe, and beyond. Before founding OnTrack Education, Mamta served as Country Head at Planet Education, where she was instrumental in shaping the organisation’s early growth. Today, as Director of Purple Patch Education LLP and OnTrack Education, she leads a team dedicated to quality counselling, student preparedness, and building meaningful, long-term institutional partnerships. Her practice is rooted in three core values — trust, transparency, and genuine student success — which have earned her and her team the confidence of thousands of families across India and beyond.

