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150 करोड़ की जमीन के मामले में कांग्रेस नेता जगदीश ठाकोर के खिलाफ FIR रद्द करने का कोर्ट का आदेश, पुलिस पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा- लगता है पुलिस को वेतन कम पड़ता है
गांधीनगर के खोरज गांव की करीब 150 करोड़ रुपये की जमीन के विवाद में कांग्रेस नेता जगदीश ठाकोर समेत अन्य लोगों को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने जगदीश ठाकोर समेत अन्य के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
क्या था पूरा मामला?
खोरज गांव की सीमा में स्थित सर्वे नंबर 232 की संयुक्त हिस्सेदारी वाली जमीन को दूसरे खरीदारों को बेचने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। आरोप है कि अहमदाबाद के रवि ठाकोर ने शिकायतकर्ता पक्ष को धमकी दी थी कि यह जमीन केवल जगदीश ठाकोर को ही बेची जाए।
बीती 29 अगस्त को जब शिकायतकर्ता काजलबेन के पति पोपटजी ठाकोर, उनके भाई हर्षदभाई और अन्य सह-मालिक गांधीनगर के सेक्टर-11 स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जमीन का दस्तावेज बनवाने पहुंचे, तभी रवि ठाकोर और उसके साथियों गाभुभाई रबारी तथा बलदेवभाई रबारी ने सरकारी कार्यालय में घुसकर गाली-गलौज की और दस्तावेज की प्रक्रिया रुकवा दी।
इसके बाद आरोपियों ने पोपटजी और हर्षदभाई का कथित तौर पर जबरन कार में अपहरण कर लिया और पुलिस में शिकायत नहीं करने पर काजलबेन को जान से मारने की धमकी दी। उसी रात अपहरणकर्ताओं ने हर्षदभाई को हाईवे पर छोड़ दिया था, लेकिन पोपटजी ठाकोर को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाकर बंधक बनाए रखने की आशंका के बीच पुलिस ने जांच शुरू की थी।
गांधीनगर नगर निगम चुनाव के दौरान कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी ने इस जमीन विवाद का मुद्दा उठाया था। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि गांधीनगर पुलिस गरीब किसानों की जमीन अपने नाम करवाने के लिए उन पर दबाव बना रही है। हालांकि, इसके बाद जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ ही पुलिस स्टेशन में हंगामा करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई थी।
गांधीनगर के अडालज पुलिस थाने में अक्टूबर महीने में कांग्रेस नेता जगदीश ठाकोर समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि खोरज गांव में उनकी जमीन है और वे इसे चतुरसिंह पटेल तथा हरिसिंह गोहिल को बेचना चाहते हैं। लेकिन रवि ठाकोर नाम का व्यक्ति उन पर यह दबाव बना रहा था कि जमीन केवल जगदीश ठाकोर को ही बेची जाए। आरोप था कि जगदीश ठाकोर के कहने पर ही महिला के पति का अपहरण किया गया था।
हालांकि, यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। जगदीश ठाकोर, रवि ठाकोर समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने शिकायतकर्ता की सहमति से FIR रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता महिला, उसके पति और आरोपी सभी अदालत में मौजूद थे।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि शिकायतकर्ता अपनी जमीन रतिलाल और हरिसिंह को बेचना नहीं चाहती थी, बल्कि पुलिस उन पर इन लोगों को जमीन बेचने के लिए दबाव बना रही थी।
वहीं, शिकायतकर्ता ने अदालत में कहा कि FIR में बताई गई कोई भी घटना वास्तव में नहीं हुई थी। पुलिस ने खुद ही शिकायत लिखकर उस पर उसके हस्ताक्षर ले लिए थे। याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि इस जमीन की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये है और आरोप लगाया कि पुलिस की दिलचस्पी पैसे लेने में है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता के पति का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह पुलिस से बचने के लिए इधर-उधर घूम रहा था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि पुलिस को वेतन कम पड़ता है। हालांकि, सरकारी वकील ने शिकायतकर्ता के हलफनामे में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम लेकर लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई। इसके बाद अधिकारी का नाम हटाकर केवल 'उच्च पुलिस अधिकारी' शब्द का इस्तेमाल किया गया।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस पैसे लेती है, यह बात अदालत को भी पता है। पुलिस रुपये लेकर अदालत का काम नहीं कर सकती। आखिरकार, हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने की याचिका स्वीकार कर ली।
गांधीनगर के खोरज गांव की करीब 150 करोड़ रुपये की जमीन के विवाद में अपने खिलाफ दर्ज शिकायत रद्द होने के बाद कांग्रेस नेता जगदीश ठाकोर ने कहा, 'हमें अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद थी और वह पूरी हुई है। किसान की पत्नी को पुलिस अपने साथ ले गई थी और पुलिस ने ही शिकायत लिखकर महिला तथा उसके पति के हस्ताक्षर लिए थे। इन दोनों ने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस तरह की बात कही थी। इसके बाद FIR में जिन लोगों के नाम थे, उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे मंजूरी मिलने के बाद शिकायत रद्द हो गई है।'
दूसरी ओर, हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम हटाकर केवल 'उच्च पुलिस अधिकारी' शब्द इस्तेमाल किए जाने के बारे में पूछे जाने पर ठाकोर ने टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि तीन FIR में एक व्यक्ति ने उनका नाम लिया है, इसलिए इस मामले में फिलहाल इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।

