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‘आंटी’ कहना भारी पड़ गया! पुलिस बुलानी पड़ी; कोर्ट ने डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना लगाया
हम अक्सर मज़ाक में अपने बड़ों को ‘आंटी’ या ‘काका’ कह देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये शब्द आपको लाखों रुपये के पड़ सकते हैं? हां, लंदन में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां साथ काम करने वाली सहकर्मी को बार-बार ‘आंटी’ कहना एक पुरुष के लिए बहुत महंगा साबित हुआ। मामला इतना बढ़ गया कि केस कोर्ट तक पहुंच गया, और आखिर में कानून ने इसे सम्मान नहीं बल्कि उत्पीड़न करार दिया। यह खबर ऑफिस में शिष्टाचार की सीमा पार करने वालों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। तो आइए जानते हैं कि कोर्ट ने इस ‘प्यार से बोले जाने वाले’ शब्द पर जुर्माना क्यों लगाया।
दरअसल, यह पूरी घटना लंदन के वेस्ट लंदन NHS ट्रस्ट से सामने आई है, जहां हेल्थकेयर असिस्टेंट इल्डा एस्टेव्स ने अपने टीम लीडर चार्ल्स ओपोंग के खिलाफ मोर्चा खोला। इल्डा ने आरोप लगाया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी ओपोंग उन्हें बार-बार ‘आंटी’ कहकर बुलाते थे। इल्डा ने उन्हें कई बार उनके पहले नाम से बुलाने को कहा, लेकिन ओपोंग ने मना कर दिया। अपने बचाव में ओपोंग ने दलील दी कि घाना की संस्कृति में ‘आंटी’ शब्द का इस्तेमाल सम्मान के साथ किया जाता है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया और पेशेवर माहौल में इसे अनुचित माना।
इल्डा एस्टेव्स ने सितंबर 2023 में एक औपचारिक ई-मेल शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कहा गया था कि उनके मना करने के बावजूद उन्हें ‘आंटी’ कहा जा रहा है। जब उन्होंने आपत्ति जताई, तो ओपोंग ने व्यंग्य में टिप्पणी की, ‘तो आप जवान दिखना चाहती हैं।’ इस टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। एस्टेव्स ने पांच दावे दाखिल किए, जिनमें पीड़ा, उत्पीड़न और वेतन में गलत कटौती शामिल थी। कोर्ट ने पाया कि ‘आंटी’ कहकर बुलाना उम्र और लिंग के आधार पर सीधा उत्पीड़न है, क्योंकि इस शब्द का इस्तेमाल महिला की उम्र को निशाना बनाने के लिए किया गया था।
ट्रिब्यूनल जज जॉर्ज एलियट ने मामले में सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि चार्ल्स ओपोंग, एक स्टाफ नर्स और टीम लीडर के रूप में, एक जिम्मेदार पद पर थे और उन्हें ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए थीं। न्यायाधीश ने माना कि ऑफिस के गलियारों में और काम सौंपते समय ऐसे शब्दों का उपयोग अपमानजनक माहौल बनाता है। कोर्ट ने साफ किया कि भले ही कुछ संस्कृतियों में किसी को ‘आंटी’ कहना सम्मानजनक हो, लेकिन अगर वह व्यक्ति इसे पसंद नहीं करता तो इसे उस पर थोपा नहीं जा सकता।
वॉटफोर्ड एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में वेस्ट लंदन NHS ट्रस्ट को इल्डा एस्टेव्स को 1,425 पाउंड (लगभग 1.5 लाख रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि इल्डा का उत्पीड़न का दावा पूरी तरह जायज था। यह फैसला कार्यस्थल पर उन सभी लोगों के लिए एक उदाहरण है, जो अनौपचारिक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जिससे दूसरों को असहजता होती है। अब देखना यह है कि क्या यह सजा ऑफिस संस्कृति में बदलाव लाएगी और लोग दूसरों की उम्र या पसंद-नापसंद का सम्मान करना सीखेंगे? यह फैसला साफ संदेश देता है कि ऑफिस में आपकी पहचान आपका नाम है, आपके रिश्ते नहीं।

