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सूरत टेक्सटाइल इंडस्ट्री को फिर से पटरी पर लाने की कवायद, घर लौट चुके श्रमिकों को वापस लाने के लिए बड़ा प्लान तैयार
गैस की किल्लत और ग्लोबल तनाव के चलते दो से ढाई लाख श्रमिक सूरत छोड़ कर जा चुके हैं
सूरत। सूरत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले टेक्सटाइल श्रमिकों की वापसी के लिए उद्योग जगत ने बड़ा कदम उठाया है। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और गैस संकट के कारण सूरत का टेक्सटाइल एवं वीविंग उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसके चलते लगभग ढाई लाख श्रमिक अपने गृह राज्यों की ओर लौट गए थे, जिससे शहर की कई फैक्ट्रियां लगभग ठप पड़ गईं। अब हालात में सुधार के संकेत मिलते ही उद्योग संगठनों ने श्रमिकों को वापस लाने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है।
फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन और साउथ गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने घोषणा की है कि जिन श्रमिकों के पास वापस आने के लिए साधन नहीं हैं, उनके लिए उद्योग स्वयं परिवहन की व्यवस्था करेगा। इस पहल से सूरत के औद्योगिक क्षेत्र में एक बार फिर से उम्मीद की किरण जगी है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर प्रोसेसिंग और वीविंग यूनिट पर पड़ा
पिछले कुछ समय से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजार पर साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई, जिसका सीधा प्रभाव सूरत के प्रोसेसिंग और वीविंग यूनिट पर पड़ा। गैस की कीमतें बढ़ने और सप्लाई में कमी के कारण कई टेक्सटाइल यूनिट्स को उत्पादन में कटौती करनी पड़ी। उद्योग जगत के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुई, क्योंकि उत्पादन घटने से न केवल व्यापार प्रभावित हुआ बल्कि श्रमिकों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया। इसी वजह से बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांव और गृह राज्यों की ओर लौट गए।
ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा से मिली बड़ी राहत
हालांकि, अब ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता की पहल हुई है और 15 दिनों के सीजफायर की घोषणा की गई है। इस खबर के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में प्रति बैरल 15 से 20 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे उद्योग जगत को बड़ी राहत मिली है।
सरकार भी उद्योगों की मजबूती के लिए ठोस कदम उठा रही है
श्रमिकों के पलायन का एक प्रमुख कारण गैस की कमी और बढ़ी हुई कीमतें थीं। इस गंभीर समस्या को देखते हुए उद्योगपतियों ने राज्य सरकार और डिप्टी मुख्यमंत्री से सीधा संपर्क किया। सरकार ने उद्योगों को पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। फिलहाल जिन फैक्ट्रियों को तुरंत गैस की आवश्यकता है, उनकी सूची तैयार कर ली गई है। बताया जा रहा है कि 2,200 से 2,500 सिलेंडरों की तत्काल जरूरत वाले यूनिट्स का डेटा प्रशासन को सौंप दिया गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा सिलेंडर वितरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय के चलते अब फैक्ट्रियों तक सीधे गैस सिलेंडर पहुंचाने का काम तेज़ी से किया जा रहा है।
श्रमिकों की वापसी के लिए हो रही है तैयारी
फोगवा के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जो श्रमिक आर्थिक तंगी या परिवहन सुविधा के अभाव में अपने वतन में फंसे हुए हैं, उन्हें वापस लाने के लिए उद्योगपति स्वयं वाहन भेजने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह कोविड काल में उद्योगों ने अपने खर्च पर श्रमिकों को सूरत वापस बुलाया था, उसी तरह अब भी जरूरत पड़ने पर निजी बसों और अन्य साधनों की व्यवस्था की जाएगी। उद्योग संगठनों का कहना है कि श्रमिक केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसे हैं। उनके बिना मशीनों को चलाना और उत्पादन को पटरी पर लाना संभव नहीं है।
अब लाखों श्रमिकों की राह देख रही हैं फैक्ट्रियां
उद्योग जगत के अनुसार, हालिया संकट के चलते लगभग 2.50 लाख श्रमिक सूरत छोड़कर अपने गृह स्थानों पर चले गए थे। अब जब यार्न की कीमतों में स्थिरता आने लगी है और उत्पादन कटौती वापस ली जा रही है, तब फैक्ट्रियों में श्रमिकों की भारी कमी महसूस हो रही है। फैक्टरी मालिक अपने पुराने और विश्वसनीय कारीगरों को लगातार फोन कर हालात सामान्य होने की जानकारी दे रहे हैं और जल्द वापस लौटने की अपील कर रहे हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि श्रमिक हमारे परिवार के समान ही हैं। उनकी मेहनत से ही सूरत का टेक्सटाइल उद्योग देशभर में पहचान बना पाया है।
प्रशासन और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय
जिला कलेक्टर, डीएसओ और डिप्टी कलेक्टर के साथ उद्योग से जुड़े कारोबारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं। जिन इकाइयों को गैस की जरूरत है और जिन श्रमिकों की वापसी सुनिश्चित करनी है, उनका पूरा डेटा प्रशासन के साथ साझा किया गया है। इस बेहतर तालमेल के कारण आने वाले सप्ताह में सूरत के औद्योगिक क्षेत्रों में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। उद्योग जगत को विश्वास है कि श्रमिकों की वापसी और गैस आपूर्ति सामान्य होते ही उत्पादन पूरी क्षमता से शुरू हो जाएगा।

