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नीतीश कुमार का 'पॉलिटिकल यू-टर्न': 21 साल बाद फिर वहीं खड़े, जहां से शुरू किया था सफर
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक ऐसी पहेली बन चुके हैं जिसको समझना बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के लिए भी मुश्किल है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले चुके हैं। अगले तीन से चार दिनों के अंदर वह अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगे। उनके हाल ही के राजनीतिक फैसलों ने एक दिलचस्प स्थिति पैदा कर दी है। 21 साल के लंबे समय के बाद नीतीश कुमार आज ठीक वहीं खड़े नजर आ रहे हैं, जहां से उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। यह सफर 'दिल्ली से शुरू होकर पटना होते हुए फिर दिल्ली' पहुंचने की एक राेचक कहानी है।
2003-2004 दिल्ली की सत्ता का रसूख
नीतीश कुमार के राजनीतिक कदम की नींव जेपी आंदोलन (1974) में पड़ी थी, लेकिन उनकी राष्ट्रीय पहचान 90 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती सालों में बनी। 21 साल पहले, यानी 2003-04 के दौरान नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति का चमकता सितारा थे। वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री जैसे कद्दावर पद पर थे। उस समय वे बीजेपी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी थे और केंद्र में बैठकर बिहार की सत्ता पलटने की कोशिश रहे थे।
कैसा रहा पटना का सफर: 'सुशासन बाबू' का दौर (2005-2013)
2005 में नीतीश कुमार ने दिल्ली का आराम छोड़कर पटना का रुख अपनाया। बीजेपी के साथ मिलकर उन्होंने बिहार में 15 साल के लालू-राबड़ी राज काे खत्म किया। यह नीतीश के जीवन का सबसे स्वर्णिम काल था। उन्होंने बिहार की सड़कों, स्कूलों और कानून-व्यवस्था में सुधार कर 'सुशासन बाबू' की छवि बनाई। उस समय माना जाता था कि नीतीश और बीजेपी का साथ अटूट है।
नीतीश के 'वाया पटना' वाले सफर में पहला बड़ा मोड़ 2013 में आया। नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में उन्होंने 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया। यहीं से उनकी 'दिल्ली' की ओर वापसी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा जागृत हुई।
इसके बाद शुरू हुआ समझौतों और यू-टर्न का वो सिलसिला, जिसने उन्हें 'पलटूराम' का तमगा दिलवाया
- 2015: धुर विरोधी लालू यादव से हाथ मिलाया और महागठबंधन बनाया।
- 2017: भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लालू का साथ छोड़ा और फिर एनडीए (बीजेपी) में आ गए।
- 2022: बीजेपी पर जेडीयू को तोड़ने का आरोप लगाया और फिर से तेजस्वी यादव के साथ सरकार बना ली।
जनवरी 2024 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर पाला बदला। जिस 'INDIA' गठबंधन की नींव उन्होंने खुद रखी थी, उसे छोड़कर वे वापस एनडीए में शामिल हो गए। आज 2024 में स्थिति यह है कि केंद्र की मोदी सरकार नीतीश कुमार के समर्थन पर टिकी है। 21 साल पहले वे वाजपेयी सरकार में एक विश्वसनीय सहयोगी थे, और आज वे मोदी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण 'किंगमेकर' हैं।

