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सुरेंद्रनगर के निलंबित नायब मामलतदार के पास मिली 1.22 करोड़ की अवैध संपत्ति, केस दर्ज
सुरेंद्रनगर जिले में जमीन NA घोटाले में शामिल और वढवाण में रहने वाले तथा नायब मामलतदार के रूप में कार्यरत चंद्रसिंह भूपतसिंह मोरी के खिलाफ एक और शिकायत दर्ज की गई है। चंद्रसिंह मोरी की संपत्ति की जांच ACB विभाग द्वारा की गई थी, जिसमें यह सामने आया कि उन्होंने अवैध रूप से सत्ता का दुरुपयोग करके गैरकानूनी आय अर्जित की थी और उनके पास आय से अधिक संपत्तियां पाई गई हैं।
सुरेंद्रनगर जिले के जमीन NA घोटाले में संलिप्त और निलंबित नायब मामलतदार चंद्रसिंह भूपतसिंह मोरी के खिलाफ ACB ने एक और शिकायत दर्ज की है। जांच में उनके पास ₹1,22,27,658 की आय से अधिक संपत्ति होने का खुलासा हुआ है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, वढवाण निवासी चंद्रसिंह मोरी सुरेंद्रनगर कलेक्टर कार्यालय में नायब मामलतदार के रूप में कार्यरत थे। यह भी सामने आया कि वे तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र पटेल द्वारा किए गए जमीन घोटाले के मुख्य सूत्रधार थे। इस घोटाले के बाद उनकी संपत्तियों की जांच शुरू की गई थी।
ACB की जांच में सामने आया कि चंद्रसिंह मोरी ने अवैध रूप से सत्ता का दुरुपयोग करके आय अर्जित की थी। उनके पास उनकी वैध आय से 56.89 प्रतिशत अधिक, यानी कुल ₹1,22,27,658 की आय से अधिक संपत्ति पाई गई। ये संपत्तियां उनके अपने नाम के साथ-साथ रिश्तेदारों के नाम पर भी खरीदी गई थीं। प्रारंभिक जांच में स्थावर और जंगम संपत्तियों में बड़े पैमाने पर निवेश का खुलासा हुआ है।
इस मामले में सुरेंद्रनगर ACB द्वारा एक और शिकायत दर्ज की गई है। इस पूरे मामले की जांच सुरेंद्रनगर ACB के PI एम.डी. पटेल को सौंपी गई है। पहले गठित SIT द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच करने वाले अधिकारियों में पी.ए. कावडिया और ACB के सहायक निदेशक जे.डी. मेवाडा तथा उनकी टीम शामिल हैं।
ACB ने लोगों से भी अपील की है कि यदि चंद्रसिंह मोरी द्वारा किसी प्रकार के अवैध लेन-देन किए गए हों तो उसके सबूत दें, ताकि उनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सके। ACB ने इस मामले को केवल रिश्वत का नहीं, बल्कि वर्षों से किए गए संगठित भ्रष्टाचार का परिणाम बताया है।
ACB की SIT ने 1 अप्रैल 2013 से 31 दिसंबर 2025 तक के 12 वर्षों की अवधि को ‘चेक पीरियड’ मानकर विस्तृत विश्लेषण किया है। इसी अवधि में करोड़ों की आय से अधिक संपत्तियां अर्जित की गई थीं। जांच के दौरान कुल ₹1,22,27,658 की ऐसी संपत्तियां मिलीं जिनका कोई वैध स्रोत अधिकारी नहीं बता सके। इस मामले में केवल ACB ही नहीं, बल्कि ED दिल्ली द्वारा भी पत्राचार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की सूचना दी गई थी।
क्या है NA घोटाला?
1500 करोड़ के जमीन NA (गैर-कृषि) घोटाले के मामले में ED ने 23 दिसंबर 2025 को सुरेंद्रनगर कलेक्टर और अन्य उच्च अधिकारियों के आवासों पर छापेमारी की थी। इसके बाद इस मामले में ACB और ED ने सुरेंद्रनगर कलेक्टर राजेंद्र महेंद्र पटेल, नायब मामलतदार चंद्रसिंह मोरी, कलेक्टर कार्यालय के क्लर्क मयूर गोहिल और कलेक्टर के निजी सहायक जयराजसिंह झाला के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
23 दिसंबर को दिल्ली स्थित ED की विशेष टीम ने सुरेंद्रनगर जिले के नायब मामलतदार चंद्रसिंह मोरी के यहां छापा मारा था। इस छापेमारी के दौरान उनके आवास परिसर में PMLA की धारा 17 के तहत की गई तलाशी में 67.50 लाख रुपये नकद बरामद कर जब्त किए गए थे। यह नकदी उनके बेडरूम में छिपाई गई थी। आरोपी चंद्रसिंह मोरी ने 23 दिसंबर 2025 को दर्ज अपने बयान में स्वीकार किया था कि जब्त की गई नकदी जमीन के उपयोग परिवर्तन के आवेदनों के त्वरित या अनुकूल निपटारे के लिए सीधे या बिचौलियों के माध्यम से आवेदकों से ली गई रिश्वत की रकम है।
यह घोटाला चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) यानी उपयोग परिवर्तन के तहत आने वाले आवेदनों से जुड़ा था। नायब मामलतदार चंद्रसिंह मोरी के पास जमीन को NA करने की शक्ति थी, जिसका दुरुपयोग किया गया। योजनाबद्ध तरीके से जमीन को NA करने के बदले पैसे लिए जाते थे। स्पीड मनी के जरिए बिना आवेदन को लंबित रखे काम कर दिया जाता था। आवेदन के आधार पर प्रति वर्गमीटर के हिसाब से राशि तय की जाती थी। यह राशि बिचौलियों के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। सुरेंद्रनगर कलेक्टर कार्यालय में चल रहे इस संगठित NA घोटाले की कार्यप्रणाली भी चौंकाने वाली है। ED की जांच में खुलासा हुआ कि बिचौलियों और एजेंटों के माध्यम से जमीन NA कराई जाती थी। योजनाबद्ध तरीके से वसूली और अवैध लाभ के जरिए यह घोटाला चलाया गया।
गौरतलब है कि पहले दर्ज मामले के आरोपी चंद्रसिंह मोरी फिलहाल अहमदाबाद ग्रामीण की सत्र अदालत की न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। अब आय से अधिक संपत्ति का नया मामला दर्ज होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले की आगे की जांच मोरबी ACB के PI पी.ए. डेकावडिया कर रहे हैं, जबकि पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में राजकोट ACB के सहायक निदेशक जे.डी. मेवाडा हैं।

