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पराक्रमसिंह जडेजा: साहस और उपलब्धि के ज़रिए #MakeInIndia का गौरव
(उत्कर्ष पटेल)
राजकोट की एक साधारण सी वर्कशॉप से शुरू हुआ यह सफ़र आज वैश्विक मंच पर चमक रहा है। ज्योति CNC ऑटोमेशन लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, पराक्रमसिंह घनश्यामसिंह जडेजा (P.G. जडेजा) एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी शख्सियत साहस, निर्णायक क्षमता और अथक परिश्रम का प्रतीक है। गुजरात की धरती पर जन्मे 57 वर्षीय इस व्यवसायी की आज कुल संपत्ति 1 अरब डॉलर (लगभग 8300 करोड़ रुपये) है और उनकी कंपनी का मार्केट कैप लगभग 18000 करोड़ रुपये है। वह महज़ एक व्यवसायी ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी व्यक्ति हैं जिन्होंने "Make in India" के सपने को हकीकत में बदला है। 
जोशीले रक्त और शांत सोच का एक अनूठा मेल, पराक्रमसिंह की शख्सियत को "Angry Young Man" के रूप में जाना जाता है। वह उत्साह, आक्रामकता और कभी हार न मानने वाले जज़्बे का एक समीकरण हैं। वह ओशो के दर्शन का पालन करते हैं और ध्यान भी करते हैं। उनका मानना है कि "बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज़ है, इसलिए वर्तमान में जिएँ।" वह टीम वर्क में विश्वास रखते हैं और उनकी सोच अपनी कंपनी को "प्रौद्योगिकी का मंदिर" बनाने की है। छोटी-छोटी चीज़ों से बड़े विचार गढ़ने की उनकी क्षमता असाधारण है। जब जापानी कंपनी Fanuc ने उनके साथ सही बर्ताव नहीं किया, तो उन्होंने कहा, "अब कभी नहीं!" और फिर Siemens के साथ एक दीर्घकालिक संबंध विकसित किया। इस तरह की निर्णायक क्षमता उनके व्यक्तित्व की दृढ़ता को दर्शाती है।
जीवन-संघर्ष के पथ पर चलते हुए, उन्होंने अपने सपनों को त्याग दिया और यथार्थ को अपना लिया। 1986 में, जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तब पराक्रमसिंह को एक अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए 25,000 रुपये की ज़रूरत थी। उनके पिता (जो नगर निगम के कर्मचारी थे) उन्हें इतनी रकम नहीं दे सके। इस घटना ने उनकी ज़िंदगी बदल दी। उन्होंने अपनी पढ़ाई और क्रिकेट खेलने के अपने सपने को छोड़ दिया। उन्होंने अपने चाचा के साथ एक लेथ मशीन पर काम करके यांत्रिक कौशल (mechanical skills) सीखे। 1989 में, उन्होंने अपने भाई सहदेवसिंह लालुभा जडेजा के साथ मिलकर, प्रधानमंत्री रोज़गार योजना के तहत महज़ 33,000 रुपये का कर्ज़ लेकर "ज्योति एंटरप्राइजेज़" की शुरुआत की। उन्होंने एक पुरानी (second-hand) लेथ मशीन और एक छोटे से कमरे से गियरबॉक्स बनाने और जॉब वर्क का काम शुरू किया। उस समय, राजकोट में 160 से ज़्यादा लेथ बनाने वाली कंपनियाँ थीं और CNC मशीनें जर्मनी और जापान से इम्पोर्ट की जाती थीं। पराक्रम सिंह ने इम्पोर्ट पर इस निर्भरता को खत्म करने का फैसला किया और दिन-रात मेहनत की।

1993 में लेथ मशीनें बनाना शुरू किया। 1997 में गुजरात का पहला CNC टर्निंग सेंटर बनाया और 2002 में पूरी तरह से CNC प्रोडक्शन शुरू कर दिया। 2007 में फ्रांस की मशहूर कंपनी 'ह्यूरॉन ग्राफेनस्टैट' को खरीद लिया, जिसकी शुरुआत 1857 में हुई थी। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी! आज, ज्योति CNC ने 60 से ज़्यादा देशों में 1,30,000 से ज़्यादा मशीनें लगाई हैं। उनकी मशीनों का इस्तेमाल डिफेंस, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और रेलवे जैसे सेक्टर में होता है। 2024 के IPO में कंपनी 12% प्रीमियम के साथ लिस्ट हुई। कंपनी में 2686 कर्मचारी हैं और इसकी सालाना प्रोडक्शन क्षमता 6,000 मशीनों की है। उन्होंने राजकोट में एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड प्लांट, R&D सेंटर और फाउंड्री बनाई है। उन्होंने 'वाइब्रेंट गुजरात' में 10,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है। उनके लक्ष्यों में भारत को CNC मशीनों के मामले में आत्मनिर्भर बनाना, हज़ारों युवाओं को रोज़गार देना और कंपनी को 'इंडस्ट्री 4.0' की ओर ले जाना शामिल है। उन्हें IMTMA का 'प्रीमियर आउटस्टैंडिंग एंटरप्रेन्योरशिप अवॉर्ड' (2013), 'हरक्यूलिस अवॉर्ड' और कई खास सम्मान मिले हैं।
साहस और लक्ष्य-केंद्रित मेहनत के धनी पराक्रम सिंह युवाओं से कहते हैं, "पढ़ाई ज़रूरी है, लेकिन हुनर, दूरदृष्टि और मेहनत उससे भी ज़्यादा ज़रूरी हैं।" उनकी काम करने की शैली यह संदेश देती है, "साहसी बनो, लक्ष्य तय करो और कड़ी मेहनत करो। सोच छोटी रखो, लेकिन सपने बड़े देखो। बुरे अनुभवों को प्रेरणा के तौर पर इस्तेमाल करो। बदलाव को अपनाओ और आज में जियो।" आज, पराक्रम सिंह उन युवा एंटरप्रेन्योर्स से कहते हैं जो एक छोटी सी वर्कशॉप से पैसे कमाना शुरू करते हैं, "अपने सपनों को मरने मत दो। कड़ी मेहनत और सब्र से, एक दिन तुम भी दुनिया बदल दोगे।"

गुजरात के राजकोट के इस हीरो ने गुजरात और भारत को दुनिया भर में गर्व महसूस कराया है। अगर आप भी एंटरप्रेन्योर बनना चाहते हैं, तो पराक्रम सिंह के नक्शेकदम पर चलें... सपने देखें, साहसी बनें और कड़ी मेहनत करें!
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

