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डेंटल ट्रीटमेंट के लिए भारत क्यों आ रहे हैं विदेशी मरीज? खर्च में कितना अंतर
दुनिया भर में दांतों की चिकित्सा तेजी से महंगी होती जा रही है और इसी वजह से भारत डेंटल टूरिज्म का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। आज केवल एनआरआई ही नहीं बल्कि अमेरिका, यूरोप, मध्य-पूर्व और अफ्रीका के हजारों विदेशी मरीज भी डेंटल ट्रीटमेंट के लिए भारत आ रहे हैं।
ताजा मार्केट रिसर्च के अनुसार भारत का डेंटल टूरिज्म उद्योग अगले दशक में तेजी से बढ़ने वाला है। वर्ष 2024 में भारत का डेंटल टूरिज्म बाजार लगभग 1.33 अरब डॉलर (करीब ₹11,000 करोड़) का था। अनुमान है कि वर्ष 2033 तक यह बाजार बढ़कर लगभग 7.16 अरब डॉलर (करीब ₹59,000 करोड़) तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 से 2033 के बीच इस क्षेत्र में लगभग 20.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हो सकती है।

भारत में आधुनिक डेंटल क्लीनिक, डिजिटल स्कैनिंग तकनीक, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के इम्प्लांट सिस्टम और अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध होने के कारण विदेशी मरीज यहां भरोसे के साथ इलाज कराते हैं। कम खर्च, बेहतर तकनीक और कम समय में इलाज मिलना भारत को डेंटल ट्रीटमेंट के लिए आकर्षक बनाता है।
खर्च में कितना अंतर
डेंटल इम्प्लांट
अमेरिका या यूरोप में एक डेंटल इम्प्लांट का खर्च आमतौर पर ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक होता है। भारत में यही इलाज लगभग ₹30,000 से ₹55,000 में हो जाता है। यानी एक इम्प्लांट में ही मरीज लाखों रुपये की बचत कर सकते हैं।
रूट कैनाल ट्रीटमेंट
अमेरिका और ब्रिटेन में रूट कैनाल का खर्च ₹80,000 से ₹1.2 लाख तक होता है, जबकि भारत में यह इलाज लगभग ₹8,000 से ₹12,000 में किया जा सकता है।
डेंटल क्राउन
पश्चिमी देशों में पोर्सिलेन या सिरेमिक क्राउन का खर्च लगभग ₹1 लाख से ₹1.5 लाख होता है। भारत में यही उपचार लगभग ₹10,000 से ₹25,000 में उपलब्ध है।

स्माइल मेकओवर
अमेरिका में स्माइल मेकओवर के लिए ₹8 लाख से ₹20 लाख तक खर्च हो सकता है। भारत में यह उपचार लगभग ₹1.2 लाख से ₹3.5 लाख के बीच उपलब्ध है।
दांत सफेद करना
पश्चिमी देशों में दांत सफेद करने की प्रक्रिया ₹50,000 से ₹80,000 तक हो सकती है, जबकि भारत में यह इलाज ₹8,000 से ₹12,000 के बीच किया जा सकता है।
TMJ और TMD उपचार के लिए भी भारत बना केंद्र
दांतों के इलाज के अलावा भारत अब TMJ (Temporomandibular Joint) और TMD यानी जबड़े से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए भी एक बड़ा वैश्विक केंद्र बन रहा है। इन समस्याओं के कारण जबड़े में दर्द, मुंह खोलने में दिक्कत और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में भारत में TMJ उपचार का खर्च लगभग 60 से 80 प्रतिशत तक कम होता है। उदाहरण के तौर पर भारत में स्प्लिंट थेरेपी लगभग ₹5,000 से ₹25,000 में हो सकती है, जबकि आर्थ्रोस्कोपी जैसी सर्जरी लगभग ₹80,000 से ₹1.5 लाख में हो सकती है। गंभीर मामलों में जबड़े के जॉइंट रिप्लेसमेंट की लागत लगभग ₹4 लाख से ₹8 लाख तक हो सकती है।
भारत में CBCT स्कैन, डिजिटल बाइट एनालिसिस (T-Scan) और इलेक्ट्रोमायोग्राफी जैसी आधुनिक जांच तकनीकों के कारण मरीजों को सटीक निदान और उपचार मिल पाता है।
विदेशी मरीज भारत क्यों चुनते हैं
भारत में इलाज सस्ता होने का मतलब यह नहीं है कि गुणवत्ता कम है। देश में बड़ी संख्या में ऐसे डेंटिस्ट हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। कई क्लीनिकों में विश्वस्तरीय उपकरण उपलब्ध हैं। इसके अलावा पश्चिमी देशों में इलाज के लिए कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि भारत में अक्सर कुछ ही दिनों में जांच और उपचार दोनों संभव हो जाता है।

डेंटल टूरिज्म के प्रमुख शहर
भारत में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहर डेंटल टूरिज्म के बड़े केंद्र बन चुके हैं। गुजरात में भी अहमदाबाद और सूरत जैसे शहर इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक डेंटल टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
About The Author
Dr. Risshi Bhatt is a dental surgeon specializing in TMJ disorders and facial pain. He leads the RR Dental and Maxillofacial Clinic, known for its integrated approach to jaw and sleep-related conditions. Passionate about patient education and preventive care, Dr. Bhatt bridges the gap between dentistry and overall wellness.

