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खाड़ी देशों में युद्ध का असर…भारत में गैस की किल्लत बढ़ी, फैक्ट्रियां भी प्रभावित, बड़ा सवाल- हालात कब सुधरेंगे?
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति और तेल-गैस की किल्लत की वजह से भारत के कई राज्यों में परेशानी बढ़ गई है। इधर, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग की वजह से देशभर में एलपीजी की किल्लत बढ़ गई है। गैस सिलेंडर एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं। इसके अलावा गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी तेजी से होने लगी है। बिहार में घरेलू गैस सिलेंडर 1800 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर ब्लैक में 4000 रुपए में बिक रहा है। सूरत में भी कमर्शियल सिलेंडर 4 से 5 हजार में बिक रहे हैं।
कुछ होटलों में तो कमर्शियल गैस सिलेंडर की किलल्त की वजह से इंडक्शन पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि रसोई गैस को लेकर कोई दिक्कत नहीं है। इसका उत्पादन बढ़ा दिया गया है। ढाई दिन में रसोई गैस की सप्लाई हो रही है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि लोग पैनिक न करें, देश में हालात अभी बेहतर हैं। बता दें कि सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी थी। सूरत में पहले जहां 858 रुपये में सिलेंडर मिल रहा था, अब वहीं इसकी कीमत बढ़कर 918 रुपये हो गई है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई थी। वहीं 19 किग्रा वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम 1 मार्च को 115 रुपए बढ़ाए गए थे। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है।
इधर, जंग के बीच ईरान से अच्छी खबर आई है कि भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सकेंगे। ईरान सरकार ने इसकी इजाजत दे दी है। इससे पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले शिप्स पर हमले की धमकी दी थी। होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
वहीं सरकार इस संकट से निपटने केलए लगातार जरूरी कदम उठा रही है-
पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। वहीं, गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू कर दिया है। यही नहीं, सरकार ने घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे।
गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट ओटीपी या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही सरकार ने पहले ही सभी ऑयल रिफाइनरीज को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। बता दें कि सरकार ने कंपनियों को उत्पादन 10% बढ़ाने को कहा था।
क्या इस संकट से जल्द बाहर आ जाएंगे
इंडियन ऑयल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और घबराहट में सिलेंडर बुकिंग न करें। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जी7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।
क्यों बढ़ गई है संकट?
उल्लेखनीय है कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। इसलिए युद्ध के दौरान इस रूट के बंद होने से संकट बढ़ गई है। वहीं, ईरान के हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने एलएनजी प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। अपनी जरूरत का 40 फीसदी गैस भारत कतर से ही आयात करता है।

