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हमें यह तय करना है कि व्यापार बंद रहना अधिक गंभीर है या रसोई बंद रहना: दिलीप संघाणी
फिलहाल ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच युद्ध चल रहा है। आज युद्ध को 13 दिन हो चुके हैं। 3 देशों के इस युद्ध के बीच दुनिया भर में बेचैनी देखने को मिल रही है। क्रूड ऑयल और गैस की कमी महसूस की जा रही है। इसका असर गुजरात सहित पूरे देश में देखने को मिल रहा है। गुजरात के कई शहरों में गैस सिलेंडर लेने के लिए लोग घंटों तक लाइन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। वहीं खाने-पीने की दुकानों पर भी ताले लगाने की नौबत आने जैसी स्थिति बन गई है। कमर्शियल सिलेंडर देना बंद कर दिया गया है। सरकार गैस संकट से निपटने और जमाखोरी रोकने के लिए कदम भी उठा रही है।
खाड़ी देशों में तनाव के कारण गैस सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है, जिसका सीधा असर अब सूरत के टेक्सटाइल उद्योग पर देखने को मिल रहा है। सूरत के वीविंग उद्योग में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी पैदा हो गई है। खासकर ट्विस्टेड यार्न का उपयोग करने वाली लगभग 10,000 वीविंग यूनिट्स इस कमी से सीधे प्रभावित हुई हैं। वीविंग उद्योग में कपड़े के उत्पादन से पहले यार्न (धागे) पर प्रक्रिया करना अनिवार्य होता है।
दक्षिण गुजरात वीविंग उद्योग के चेयरमैन और वीवर अग्रणी अशोक जीरावाला के अनुसार, 1200 RPM से अधिक स्पीड वाली मशीनों पर कपड़ा बनाने से पहले यार्न को हीट (गर्मी) देना पड़ता है। इस प्रक्रिया के बिना हाई-क्वालिटी कपड़ा बनाना असंभव है। फिलहाल गैस की कमी के कारण यह हीटिंग प्रक्रिया प्रभावित हुई है, जिसके कारण उत्पादन प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। सूरत में कुल लगभग 55,000 वीविंग यूनिट्स कार्यरत हैं, जिनमें से सभी में भाप का उपयोग नहीं होता, लेकिन लगभग 30% यूनिट्स ऐसी हैं जहाँ ट्विस्टेड यार्न का उपयोग होता है और वहां स्टीम देना अनिवार्य है। इस हिसाब से लगभग 10,000 इकाइयां गैस की कमी के कारण बड़े पैमाने पर प्रभावित होने की संभावना है।
गैस की कमी की समस्या पर IFFCO और NCUI के चेयरमैन दिलीप संघाणी ने बड़ा बयान दिया है। आज द सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) द्वारा सूरत के सरसाणा स्थित प्लेटिनम हॉल SIECC में ‘कोऑपरेटिव कॉन्क्लेव 26’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। सहकारी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में IFFCO और NCUI के चेयरमैन दिलीप संघाणी उपस्थित रहे। यहाँ उन्होंने गैस के वितरण को लेकर सरकारी नीति को स्पष्ट किया।
एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि, 'सरकार के पास जो भी स्टॉक उपलब्ध है, उसमें घरेलू गैस को पहली प्राथमिकता दी गई है। किसी भी परिस्थिति में लोगों की रसोई में खाना पकाने वाली गैस बंद नहीं होनी चाहिए। अस्पतालों और जीवन आवश्यक सेवाओं को पहले गैस मिले, ऐसे लोकहित के निर्णय लिए गए हैं। गैस की यह समस्या स्थानीय नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध की स्थिति के कारण पैदा हुई है। समुद्री मार्ग प्रभावित होने से सप्लाई चेन पर इसका सीधा असर पड़ा है, जिसके कारण सिर्फ गुजरात ही नहीं बल्कि पूरे देश में यह स्थिति देखने को मिल रही है।'
कमर्शियल गैस सिलेंडर के बारे में उन्होंने कहा कि, 'कमर्शियल शब्द ही उसकी श्रेणी स्पष्ट करता है। हमें यह तय करना है कि व्यापार बंद रहना ज्यादा गंभीर है या रसोई बंद रहना? सरकार ने रसोई को प्राथमिकता दी है, जो स्वागत योग्य कदम है। जब तक युद्ध की स्थिति शांत नहीं होती, तब तक हमें सामूहिक प्रयास करके इस परिस्थिति का सामना करना होगा।'
बाजार में गैस सिलेंडर की कमी के बीच काला बाजारी और जमाखोरी की शिकायतों पर संघाणी ने कहा कि, 'सरकार द्वारा कल भी कई जगहों पर छापे मारकर स्टॉक जब्त किया गया है। काला बाजारी करने वाले तत्वों के खिलाफ प्रशासन बेहद सख्त कार्रवाई कर रहा है और किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा,' ऐसी उन्होंने पुष्टि की।

