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भारत में गैस की किल्लत, लेकिन शिर्डी में बिना परेशानी 40 हजार भक्तों के लिए हर रोज बन रहा है भोजन, आखिर कैसे?
शिर्डी। ईरान और अमेरिका-इजराइल जंग की वजह से ईंधन की आपूर्ति सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। इसका असर भारत में भी देखने को मिला है। लोग रसोई गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं। गुजरात समेत कई राज्यों में सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनें दिख रही है। कहीं-कहीं तो रात ही लोगों की लाइन लग जा रही है। सबसे ज्यादा परेशानी होटलों और रेस्टोरेंट चलाने वालों को हो रही है। कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पाने की वजह से कई होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं। कई इंडक्शन पर शिफ्ट हो चुके हैं। अस्पतालों और कॉलेजों में चलने वाले कैंटीन भी मुश्किल में आ गए हैं। दरअसल, आपूर्ति का दबाव बढ़ने से रसोई गैस सिलेंडर समय से डिलीवर नहीं हो पा रहे हैं।
इस बीच शिर्डी स्थित श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट इन चिंताओं से बिल्कुल मुक्त हैं। यहां हजारों लोगों का भोजन हर दिन पकाया जाता है, इसके बावजूद यहां कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, यहां का सोलर कुकिंग सिस्टम एक मिसाल बन गया है। सौर ऊर्जा से चलने वाले इस सिस्टम से रोज हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन पकाया जा रहा है। इस सोलर सिस्टम से हर दिन करीब 2,000 किलो खाना बनाया जाता है, जो लगभग 40 हजार श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त होता है। अब 40 हजार लोगों के लिए अगर गैस पर हर रोज खाना पकाया जाता है तो करीब 200 किलो गैस की खपत होती है। यानी हर रोज करीब 200 किलो गैस की बचत भी हो रही है। इस अनोखी पहल को देखते हुए मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी ने भी इस प्रोजेक्ट को देश के एक यूनिक मॉडल के रूप में सम्मानित किया है।
रोज 75 से 80 हजार श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं
बता दें कि शिर्डी में रोज औसतन 75 से 80 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। खास बात यह है कि साईं संस्थान के प्रसादालय में श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन दिया जाता है और लगभग 40 हजार लोग हर दिन इसका लाभ लेते हैं। पहले इतनी बड़ी मात्रा में खाना बनाने के लिए काफी ज्यादा गैस की जरूर पड़ती। ऐसे संकट के समय में संस्थान को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता। यही नहीं संस्थान पर काफी आर्थिक बोझ पड़ता। इसलिए जंग के बीच भी शिर्डी में भक्तों के लिए आज भी वैसे ही भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
2009 में सोलर कुकिंग सिस्टम शुरू हुआ
हर रोज 40 हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करना इतना आसान नहीं होता। इसके लिए काफी खर्च भी आता है। इसके लिए बहुत ज्यादा गैस की भी जरूरत पड़ती है। ऊर्जा बचत और बढ़ते खर्च को देखते हुए संस्थान के ट्रस्टी मंडल ने जुलाई 2009 में सोलर कुकिंग सिस्टम लगाने का फैसला किया। इस प्रोजेक्ट पर करीब 1 करोड़ 37 लाख रुपए खर्च हुए। यह सिस्टम सिर्फ भक्तों के लिए ही नहीं बल्कि ट्रस्ट के लिए भी वरदान साबित हुआ।
प्रसादालय परिसर में 73 सोलर डिश लगाई गई हैं
बता दें कि प्रसादालय परिसर जहां भक्तों को भोजन कराया जाता है, वहीं सोलर सिस्टम लगाई गई है। इसमें 73 सोलर डिश लगाई गई हैं, जिनकी मदद से सोलर कुकर में भोजन तैयार किया जाता है। इस व्यवस्था से न सिर्फ ऊर्जा की बचत हो रही है, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए गर्म पानी की सुविधा
इसके अलावा साईं संस्थान ने सौर ऊर्जा से श्रद्धालुओं के लिए गर्म पानी की सुविधा भी शुरू की है। इससे नए श्रद्धालु निवास, द्वारावती और साईं आश्रम जैसी जगहों पर रोज 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को 24 घंटे मुफ्त गर्म पानी मिल रहा है।
15 क्विंटल चावल रोज पक रहा है
इस प्रसादालय में 150 लीटर क्षमता के 10 बड़े कुकर लगाए गए हैं। इस सिस्टम के जरिए एक समय में 15 क्विंटल चावल, 5 क्विंटल दाल और 5 क्विंटल सब्जी पकाई जा सकती है। 2009 से 2026 तक की अवधि में इस प्रणाली के कारण दो लाख किलो से अधिक गैस की बचत हुई है। यही नहीं, संस्थान की दो करोड़ रुपये से ज्यादा की आर्थिक बचत हुई है।
पर्यावरण संरक्षण में भी मिल रही है मदद
इस सिस्टम के लगने से न केवल आर्थिक रूप से बचत हा रही है बल्कि शिर्डी की सामाजिक संरचना को मजबूत कर रही है। वहीं, पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सोलर कुकिंग सिस्टम से ना केवल ईंधन की बचत हो रही है, बल्कि यह एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो रहा है।

