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वीवीआईपी उड़ानों में अब चलेगा केवल पायलट का फैसला, हालात ठीक नहीं तो ना कह सकते हैं…जानिए नई गाइडलाइन में क्या है?
राज्यपाल, मुख्यमंत्री, लोकसभा स्पीकर, सीजेआई पर भी लागू होगा यह नियम
नई दिल्ली। वीआईपी या वीवीआईपी उड़ानों के लिए अब पायलट पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। हालात यदि अनुकूल नहीं हैं तो पायलट सीधे मना कर सकते हैं। वीवीआईपी पायलट पर दबाव नहीं बना सकते हैं। दरअसल, वीवीआईपी को ले जाने वाले नॉन शेड्यूल्ड विमान और हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स के लिए नई इडलाइन जारी की गई है। इसमें विमानन नियामक डीजीसीए ने साफ कहा है कि फ्लाइट क्रू पर किसी भी तरह का दबाव नहीं डाला जाए, ताकि सुरक्षा से समझौता न हो। डीजीसीए के मुताबिक वीआईपी की जरूरत के नाम पर आखिरी वक्त में होने वाले बदलाव सीधे क्रू से नहीं, सिर्फ ऑपरेटर्स मैनेजमेंट के जरिए ही कराए जाएं। मौसम से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। क्रू के फैसले का सम्मान करना होगा। दरअसल, इस साल 28 जनवरी को बारामती एयरपोर्ट पर प्लेन क्रैश में अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत हुई थी। जिसके बाद से डीजीसीए ने वीआईपी मूवमेंट्स को लेकर नियमों में बदलाव किया है।
नई गाइडलाइन: वीआईपी मूवमेंट में पायलट थकावट का शिकार न हों
नई गाइडलाइन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि वीआईपी मूवमेंट के चक्कर में पायलट थकावट का शिकार न हों। अब अगर कोई नेता दबाव डालता है, तो पायलट सीधे मना कर सकता है और उसकी जवाबदेही मैनेजमेंट की होगी, न कि व्यक्तिगत पायलट की। इससे पायलटों पर अनावश्वक दबाव कम होगा और वीवीआईपी की सुरक्षा भी पुख्ता होगी।
खराब मौसम में उड़ान के नियम सख्त किए
नई गाइडलाइन के मुताबिक विमान में किसी भी तरह की तकनीकी खराबी हुई तो उड़ान की अनुमति नहीं होगी। खराब मौसम में उड़ान के नियम भी सख्त किए गए हैं। इसमें कोई ढील नहीं दी जाएगी। केवल अनुभवी पायलट (लगभग 2000 घंटे उड़ान अनुभव) ही वीवीआईपी विमान उड़ाएंगे। वहीं चुनाव के दौरान उड़ान को हाई-रिस्क माना जाएगा, जिसमें अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। नए सुरक्षा नियम के मुताबिक हर उड़ान से पहले अनिवार्य सुरक्षा जोखिम आकलन किया जाएगा। दूरदराज के हेलीपैड पर उड़ान से पहले सख्त जांच होगी।
इन-इन लोगों पर लागू होंगे ये नियम
ये नियम लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उपसभापति, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, सीजेआई, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य के कैबिनेट मंत्री समेत विशेष व्यक्तिों के उड़ान पर ये नियम लागू होंगे।
इसलिए बनाए गए ये नियम
चुनाव और वीआईपी उड़ानों में पहले कई दुर्घटनाएं और नियम उल्लंघन पाए गए हैं। अब उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। 1981 और 2014 के निर्देशों को रद्द करके नया आदेश लागू किया गया है ताकि सुरक्षा से किसी तरह का समझौत न हो।
वीआईपी को दी जाने वाले जानकारी और प्रशासन की जिम्मेदारी
वीआईपी को विमान की क्षमता और सीमाओं की जानकारी दी जाएगी। उड़ान की योजना और संचालन पायलट और इंजीनियर का अंतिम निर्णय होगा। इस प्रक्रिया में किसी बाहरी दबाव की अनुमति नहीं होगी। वहीं, जिला/राज्य प्रशासन को हेलीपैड की स्थिति, लोकेशन, सुरक्षा और बचाव व्यवस्था की जानकारी समय पर देनी होगी। साथ ही सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित होने के बाद ही लैंडिंग अनुमति जारी होगी।
इधर, अजित पवार प्लेन हादसे में बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज
महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत के मामले में बेंगलुरु में जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। उनके भतीजे और एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई है। उन्होंने हादसे को आपराधिक साजिश बताया है। रोहित ने कहा कि उन्होंने मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन, बारामती पुलिस और महाराष्ट्र सीआईडी से संपर्क किया, लेकिन कहीं भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने 23 मार्च को बेंगलुरु में जीरो पर एफआईआर दर्ज कराई। दरअसल, जीरो एफआईआर का मतलब है- जहां अपराध हुआ है उसे छोड़कर देश के किसी भी थाने में उस अपराध की एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इसे फिर संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

