भारत अब 800 किमी रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइल खरीदेगी, लंबी दूरी की मिसाइलों की अहमियत क्यों बढ़ रही है?

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नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत भी अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है। दरअसल, बदलते युद्ध की स्थिति को देखते हुए अब लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले मिसाइलों की जरूरत महसूस होने लगी है। भारत का पाकिस्तान के साथ बिगड़ते संबंध और चीन के साथ सीमा पर लगातार विवाद के चलते अब उन्नत किस्म की हथियार अब जरूरत बनते जा रहे हैं। इस बीच भारतीय सेना अब 800 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी में है।

फिलहाल सेना के पास 450 किमी तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल मौजूद है। सूत्रों के मुताबिक सेना इस नए वर्जन का जल्द ही बड़ा ऑर्डर देने की योजना बना रही है। रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी भी मिल सकती है। बता दें कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान जंग के दौरान ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान एयरफोर्स के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। अब 800 किमी की रेंज वाले नई मिसाइलों के आने के बाद दिल्ली से ही पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को निशाना बनाया जा सकेगा। दिल्ली और इस्लामाबाद की हवाई दूरी 700 किमी है। इधर, भारतीय सेना एक समर्पित मिसाइल फोर्स बनाने और मिसाइलों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है। सेना अपने वर्कशॉप में ड्रोन का बड़े पैमाने पर निर्माण भी कर रही है। 

नई पीढ़ी की युद्ध की जरूरतों के हिसाब से हथियार जरूरी

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग ने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की अहमियत को और बढ़ा दिया है। नई पीढ़ी के युद्ध को देखते हुए सेना बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल शामिल कर रही है। इसके तहत आर्टिलरी और इन्फैंट्री यूनिट्स में स्पेशल ड्रोन रेजिमेंट और प्लाटून बनाए जा रहे हैं।

खासियत: हवा, समुद्र और जमीन से हमले करने में सक्षम है

बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल मिसाइल तीनों सेनाओं के पास है और इसे हवा, समुद्र और जमीन से हमले के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत और रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जिसका अधिकांश हिस्सा अब स्वदेशी हो चुका है। ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी इंटरप्राइज एनपीओएम के बीच साझा समझौते के तहत विकसित किया गया है। 

किस तरह की मिसाइल है ब्रह्मोस

ब्रह्मोस एक मध्यम श्रेणी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इस मिसाइल को जहाज, पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट या फिर धरती से लॉन्च किया जा सकता है। रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मोस का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि इस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है।

नई रणनीति पर काम कर रहा है भारत

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध समेत हालिया वैश्विक घटनाओं को देखते हुए भारत भी नई रणनीति पर काम कर रहा है। सैन्य क्षमता को बढ़ाना और उसे ज्यादा मजबूती देना अब जरूरत बन गई है। लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन के रणनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है। इसी दिशा में भारतीय सेना भी अपने हथियारों के बेड़े में लंबी दूरी की मिसाइलों और ड्रोन को शामिल करने पर जोर दे रही है। सेना ने व्यापक फोर्स री-स्ट्रक्चरिंग के तहत आर्टिलरी और इन्फैंट्री रेजिमेंट्स में विशेष ड्रोन रेजिमेंट और प्लाटून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, एक समर्पित मिसाइल फोर्स बनाने और मिसाइलों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।

भारतीय सेना ने अपने वर्कशॉप्स में बड़े पैमाने पर ड्रोन निर्माण भी शुरू कर दिया है। युद्ध में ड्रोन की भूमिका काफी अहम साबित हो रही है। वहीं, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत बनाई जाती है, जिसमें अब इसके अंतिम चरण का स्वदेशीकरण भी किया जा चुका है।

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