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गुजरात में तूफ़ान और जल्दी बुआई को लेकर अंबालाल पटेल की भविष्यवाणी
गुजरात में इस समय मिश्रित मौसम का माहौल बना हुआ है। मार्च महीने की शुरुआत से ही मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ गर्मी की शुरुआत हो रही है, तो दूसरी ओर सक्रिय हुए ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ के कारण राज्य में एक बार फिर बेमौसम बारिश की आशंका बनी हुई है।
प्रसिद्ध मौसम विशेषज्ञ अंबालाल पटेल ने बताया है कि 24 मार्च के आसपास एक नया विक्षोभ बनने से मौसम बदलेगा। उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात और कच्छ में बादल छाए रहेंगे। 25 से 28 मार्च के दौरान छिटपुट बारिश की संभावना है। अगले 3 दिनों में तापमान 2 से 3 डिग्री बढ़ने की भी संभावना है।
अप्रैल और मई में तूफानी मौसम रहेगा
अंबालाल पटेल के अनुसार, केवल मार्च ही नहीं बल्कि अप्रैल महीना भी प्राकृतिक आपदाओं से भरा रहेगा:
अप्रैल: 4 से 8 अप्रैल और फिर 8 से 10 अप्रैल के दौरान प्री-मॉनसून गतिविधियों के तहत बारिश के छींटे पड़ सकते हैं। हवा की गति 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
गर्मी का पारा: 26 अप्रैल के बाद गर्मी तेज हो जाएगी और तापमान 43 से 45 डिग्री तक पहुंच सकता है।
मई-जून: मई महीने में आंधी-तूफान की संभावना है। 24 मई से 4 जून के बीच फिर से बारिश का माहौल बनेगा।
अरबी समुद्र में तूफान का खतरा और जल्दी बुवाई
मौसम विशेषज्ञ ने समुद्री गतिविधियों को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी है:
चक्रवात की संभावना: 17 मई के बाद अरबी समुद्र में गतिविधि बढ़ेगी। 8 जून से हवा की दिशा बदलने के कारण 20 जून तक तूफान बनने की संभावना है।
जल्दी बुवाई: इस साल मानसून जल्दी आने के संकेत हैं, जिसके कारण गुजरात में बुवाई जल्दी हो सकती है।
मौसम विभाग का अनुमान
फिलहाल पाकिस्तान के ऊपर बने अपर एयर सर्कुलेशन के कारण अहमदाबाद सहित कई क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे। हालांकि, विभाग के अनुसार आने वाला एक सप्ताह मुख्य रूप से शुष्क रहेगा, लेकिन 28 से 30 मार्च के बीच गरज-चमक और हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
किसानों और जनता के लिए सलाह
दोपहर में तेज गर्मी और शाम को बारिश जैसी ‘ड्यूल सीजन’ स्थिति के कारण स्वास्थ्य खराब होने और फसलों को नुकसान होने की आशंका है। किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए पहले से कदम उठाने की सलाह दी गई है।
ऑयल क्राइसिस से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों ने उठाए ये कदम
वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप की सरकारों ने अपने-अपने देशों में ईंधन बचाने के उपाय करना शुरू कर दिया है। मिडल ईस्ट से तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरी दुनिया मुश्किल में पड़ गई है।

