यात्रियों की ये पीड़ा भी
यात्रियों का यह दर्द भी सामने आया है कि आसमानी गर्मी और अव्यवस्था के बीच बच्चे और बुजुर्ग फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतज़ार करने को मजबूर हैं। कई यात्रियों का कहना है कि महीनों पहले रिज़र्वेशन कराने के बावजूद उन्हें कन्फर्म टिकट नहीं मिल सका। लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण आखिरकार उन्हें जनरल कोच में ही सफर करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि सूरत जैसे औद्योगिक शहर से यूपी–बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों की संख्या मांग के अनुसार क्यों नहीं बढ़ाई जाती?
ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग
ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग तेज़ होती जा रही है। रेलवे की ओर से कुछ स्पेशल ट्रेनें जरूर चलाई गई हैं, लेकिन लाखों प्रवासियों के घर लौटने के लिए ये व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। यात्रियों का कहना है कि हर त्योहार पर हालात ऐसे ही बन जाते हैं, फिर भी अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। होली की खुशियों के बीच घर पहुंचने की यह जद्दोजहद कई सवाल खड़े करती है। जब तक प्रमुख रूटों पर ट्रेनों की संख्या और उनकी फ्रीक्वेंसी नहीं बढ़ाई जाती, तब तक हर त्योहार पर यही भीड़ और परेशानियां दोहराई जाती रहेंगी।

