ट्रंप के टैरिफ रद्द होने से भारत को फ़ायदा होगा या नुकसान? जानें

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US सुप्रीम कोर्ट का प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को गैर-कानूनी घोषित करने का फ़ैसला ग्लोबल ट्रेड के समीकरणों को बदलने के लिए है, जिसका सीधा और बड़ा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। गुरुवार को 6-3 के इस ऐतिहासिक फ़ैसले में कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि प्रेसिडेंट ट्रंप ने कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाकर अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

इस फ़ैसले से लगभग $175 बिलियन (Rs 14.5 लाख करोड़) के टैरिफ़ रिफंड की संभावना बढ़ गई है, जिसे भारत जैसे बड़े एक्सपोर्ट करने वाले देशों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। यह ख़बर भारत के लिए इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि US उसका सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। फ़ाइनेंशियल ईयर 2025-26 के पहले 10 महीनों में भारत ने US को $72.46 बिलियन का सामान एक्सपोर्ट किया।

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ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के लगाए गए टैरिफ का सीधा असर भारत के कुल US एक्सपोर्ट के लगभग 55% पर पड़ा, जिससे US मार्केट में भारतीय सामान महंगा हो गया और उनकी कॉम्पिटिटिवनेस कम हो गई। इस वजह से, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और केमिकल्स जैसे खास सेक्टर्स में कई बड़े ऑर्डर वियतनाम और बांग्लादेश जैसे कॉम्पिटिटिव देशों को जा रहे थे।

खास सेक्टर्स पर असर और उम्मीद के मुताबिक सुधार

US ने स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50% तक और ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% तक टैरिफ लगाया था। इन टैरिफ के हटने से टाटा स्टील, JSW स्टील और भारत फोर्ज जैसी बड़ी कंपनियों के एक्सपोर्ट में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इन टैरिफ से भारत में लगभग 2 मिलियन नौकरियां खतरे में पड़ गई थीं। अब, बढ़े हुए एक्सपोर्ट से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में फिर से जान आने और रोजगार के मौके बनने की उम्मीद है। भारत का US के साथ ट्रेड सरप्लस है, और टैरिफ हटने से एक्सपोर्ट वॉल्यूम में बढ़ोतरी से भारत का ट्रेड बैलेंस और मजबूत हो सकता है।

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भविष्य की चुनौतियां और रिस्क

हालांकि यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी जीत जैसा लग रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। कोर्ट का फैसला IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ तक ही सीमित है। US एडमिनिस्ट्रेशन के पास अभी भी सेक्शन 232 और सेक्शन 301 जैसे कानूनी नियम हैं, जिनका इस्तेमाल वह नए टैरिफ लगाने के लिए कर सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में दूसरे देशों के साथ कॉम्पिटिशन और बढ़ सकता है। यह फैसला भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए एक सुनहरा मौका लेकर आया है, लेकिन इसके लंबे समय के फायदे US सरकार की भविष्य की ट्रेड पॉलिसी पर निर्भर करेंगे।

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