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महाराष्ट्र में स्कूलों के पास स्टिंग, रेड बुल जैसी एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक
महाराष्ट्र सरकार ने छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने स्कूलों के पास प्रसिद्ध एनर्जी ड्रिंक 'स्टिंग' की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। महाराष्ट्र सरकार के खाद्य और औषधि मंत्री नरहरि जिरवाल ने राज्य के चल रहे मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में आधिकारिक तौर पर यह बड़ा एलान किया। सरकार के इस फैसले के तहत अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे के भीतर इस ड्रिंक को बेचने की अनुमति नहीं होगी।
क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टिंग एनर्जी ड्रिंक में कैफीन की मात्रा सामान्य से काफी अधिक पाई गई है, जो बच्चों के सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। इसी वजह से सरकार को यह कदम उठाना पड़ा।
इसके अलावा, हाल ही में खाद्य नियामक संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने गलत ब्रांडिंग और भ्रामक दावों के आरोप में स्टिंग बनाने वाली कंपनी सहित छह प्रमुख एनर्जी ड्रिंक ब्रांडों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों में शामिल हैं:

रेड बुल एनर्जी ड्रिंक (Red Bull)
पेप्सिको की एड्रेनालाईन रश एनर्जी ड्रिंक (Adrenaline Rush)
रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कैम्पा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट (Campa Energy)
स्टिंग एनर्जी ड्रिंक (Sting)
हेल एनर्जी (Hell Energy)
कोका-कोला समर्थित मॉन्स्टर एनर्जी (Monster Energy)
विधानसभा में किसने और क्या उठाया सवाल?
इस गंभीर मुद्दे को श्रीगोंदा-नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते ने सदन के सामने रखा। उन्होंने विधानसभा में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक को लेकर चिंता जताते हुए कहा:
"इस पेय का बच्चों के स्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल और बुरा प्रभाव पड़ रहा है। स्टिंग की बोतल पर स्वयं यह साफ-साफ लिखा होता है कि यह छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं है, इसके बावजूद धड़ल्ले से इसे बच्चों को ही बेचा जा रहा है।"

पाचपुते ने यहां तक दावा किया कि यह ड्रिंक शराब से भी अधिक नुकसानदायक है, इसलिए इसकी बिक्री पर तत्काल और सख्त नियंत्रण लगाना अनिवार्य है।
इस पर जवाब देते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवळ ने स्वीकार किया कि स्कूलों के आसपास स्टिंग की बड़े पैमाने पर बिक्री हो रही है। उन्होंने सदन में तुरंत घोषणा की कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के नशीले पदार्थों के साथ-साथ अब स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
राज्य में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई है?
सदन में जब स्टिंग एनर्जी ड्रिंक पर यह महत्वपूर्ण चर्चा चल रही थी, तब खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के नए आयुक्त तुकाराम मुंढे भी खुद विधानसभा में मौजूद थे।
उनके नेतृत्व में इस समय पूरे महाराष्ट्र में प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला के खिलाफ एफडीए की एक विशेष और आक्रामक कार्रवाई जारी है। आयुक्त मुंढे के सख्त निर्देशों के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले राज्य के कई होटलों, रेस्टोरेंट और ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।
क्या अन्य फ्लेवर ड्रिंक्स और उत्पादों की भी होगी जांच?
सदन में इस कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की मांग भी उठी। भाजपा विधायक राहुल कुल ने मांग की कि सिर्फ स्टिंग ही नहीं, बल्कि:
स्कूलों के आसपास ऊर्जा बढ़ाने के नाम पर बेचे जा रहे अन्य सभी पेय पदार्थों, फ्लेवर पान की आड़ में बेचे जा रहे नशीले पदार्थों, और फ्लेवर मिल्क के नाम पर अत्यधिक चीनी व कृत्रिम रसायनों के इस्तेमाल की भी पूरी जांच कराई जाए। इस मांग पर मंत्री नरहरी जिरवाल ने सदन को आश्वस्त किया कि एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में इन सभी मामलों की जांच पहले से ही सक्रियता से की जा रही है।
मुंबई के कई बड़े होटलों और क्लबों पर गाज
खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफडीए ने मुंबई में एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। हाल ही में मुंबई के छह प्रमुख होटलों, रेस्टोरेंटों, बेकरियों और नामचीन क्लबों के खिलाफ नियमों की धज्जियां उड़ाने पर सख्त कार्रवाई की गई है।
नरीमन पॉइंट का 'फ्लिंट एंड वार्सा' रेस्टोरेंट: 27 जून को हुई जांच में यहां खाद्य पदार्थों की गलत ब्रांडिंग पाई गई, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत इसका फूड सेफ्टी लाइसेंस निलंबित (Suspend) कर दिया।
बोरीवली स्थित एमके बेकरी: इस बेकरी में नवीनीकरण का काम चलने के दौरान भी बेहद गंदगी के बीच खाद्य पदार्थों का उत्पादन जारी रखा गया था, जिस पर कड़ी कार्रवाई हुई।
इसके अलावा भांडुप, सांताक्रूज और बांद्रा स्थित कई नामी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी एफडीए का डंडा चला है।
नए कमिश्नर तुकाराम मुंढे का एक्शन मोड

