ऑटो निर्माताओं के संगठन के समक्ष मारुति, टाटा और महिंद्रा ने E20 पेट्रोल में खामियों को लेकर चिंता व्यक्त की

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देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित होने की केंद्र सरकार की सार्वजनिक गारंटी के कुछ समय बाद, भारत के प्रमुख ऑटोमोबाइल संगठन ने ईंधन में मिश्रण को लेकर सरकार को भेजा गया एक सप्ताह पुराना पत्र वापस ले लिया था। संगठन ने दावा किया था कि पत्र में दिए गए कुछ आंकड़ों की और जांच की जरूरत है।

हालांकि Reuters द्वारा समीक्षा किए गए उद्योग उपक्रमों के अधिकारियों के बीच निजी संवाद दर्शाते हैं कि, पत्र वापस लिए जाने से पहले के दिनों में देश की अग्रणी ऑटो कंपनियों - मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) में गैर-जिम्मेदाराना मिश्रण और खामियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।

 सरकार ने प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात को कम करने के लिए पिछले साल से देशभर में E20 लागू करना शुरू किया है। इसके बाद यह ऑटोमोबाइल उद्योग द्वारा किया गया अब तक का सबसे व्यापक फ्यूल टेस्टिंग था। 1 अप्रैल से देश में कोई दूसरा साधारण पेट्रोल उपलब्ध नहीं होने के कारण, वाहनों के परफॉर्मेंस पर इसका क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर ग्राहकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

कार निर्माताओं द्वारा भेजे गए ईमेल से पहली बार खुलासा हुआ है कि, वे सार्वजनिक तौर पर सरकार के E20 ईंधन के कार्यान्वयन का समर्थन करते हुए भी, निजी तौर पर E20 में क्लोराइड और नमी जैसे तत्वों की मौजूदगी से वाहनों को होने वाले नुकसान को लेकर बेहद चिंतित हैं।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने ईंधन में संदूषण को लेकर अपना 28 जुलाई का पत्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र में उठे विवाद के बाद वापस ले लिया था, और कहा था कि कुछ आंकड़ों के प्रमाणीकरण की जरूरत है।

लेकिन, पहले सामने न आए उद्योग के डेटा और ईमेल दर्शाते हैं कि कई ऑटो निर्माताओं ने एक साल के दौरान भारत के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 21 राज्यों के पेट्रोल पंपों से 250 से अधिक ईंधन के सैंपल इकट्ठा करके व्यापक परीक्षण किया था। उन्होंने 18 राज्यों के सैंपल में क्लोराइड की उच्च मात्रा और नमी का स्तर अधिक पाया था। अधिकारियों के ईमेल में डेटा की सत्यता को लेकर कोई आशंका व्यक्त नहीं की गई थी।

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इन निजी ईमेल्स के बारे में पूछे जाने पर SIAM ने रॉयटर्स को बताया कि, यह डेटा केवल आंतरिक उपयोग, चर्चा और सत्यापन के लिए था और ये सैंपल बहुत कम ऑटो निर्माता कंपनियों द्वारा एकत्र किए गए थे। उल्लेखनीय है कि, इस ईमेल चर्चा का हिस्सा बनी मारुति, टाटा और महिंद्रा की भारतीय कार बाजार में 67% हिस्सेदारी है।

SIAM ने जोड़ा कि परीक्षण का आधार और सैंपल साइज किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अपर्याप्त था, इसलिए गलती से भेजे गए संवाद को वापस ले लिया गया था। संगठन ने अब इस संबंध में उचित वैज्ञानिक अध्ययन करने का इरादा व्यक्त किया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि SIAM का पत्र मिलने से दो सप्ताह पहले ही देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता जांचने के लिए कड़ी जांच शुरू कर दी थी। उन्होंने जोड़ा कि केवल 4 मामलों में ही खामियां मिली थीं। सरकारी तेल कंपनियों ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि व्यापक जांच में चिंता करने का कोई कारण नहीं मिला है।

दूसरी ओर, महिंद्रा ने स्पष्ट किया है कि उसके अधिकारी के ईमेल के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष पूरी तरह निराधार और गलत हैं, और यह डेटा सीमित तथा प्रारंभिक था। कंपनी को E20 से कोई समस्या नजर नहीं आती। मारुति और टाटा ने कोई टिप्पणी नहीं की थी।

E20 ईंधन के कारण वाहन चालकों में भी असंतोष है। सैकड़ों वाहन चालकों का आरोप है कि इस ईंधन से वाहन का माइलेज घट गया है और इंजन में घिसाव बढ़ गया है। यह मुद्दा अदालत तक भी पहुंच चुका है। SIAM ने पहले बताया था कि क्लोराइड की उच्च मात्रा ऑटो पार्ट्स में जंग लगाती है, जबकि ईंधन में नमी का उच्च स्तर वाहन में पेट्रोल भरवाने के बाद उसे तुरंत बंद कर सकता है।

मारुति, टाटा, महिंद्रा और SIAM के बीच हुई ईमेल बातचीत में मारुति के वरिष्ठ अधिकारी अनूप भट्ट ने क्लोराइड की उच्च मात्रा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि 26 जुलाई को पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ निजी तौर पर इस पर चर्चा की गई थी।

समूह ईमेल में साझा किए गए राज्यवार आंकड़े दर्शाते हैं कि:

 राजस्थान: क्लोराइड की मात्रा 6 से 570 ppm (पार्ट्स पर मिलियन) दर्ज की गई।
 नई दिल्ली: 1.4 से 420 ppm दर्ज की गई।
 महाराष्ट्र: 10 से 357 ppm दर्ज की गई।

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जबकि भारत सरकार के नियम के अनुसार इसकी स्वीकार्य सीमा केवल 3 ppm है। इस डेटा टेबल में नमी का स्तर आंध्र प्रदेश में 13000 ppm और उत्तर प्रदेश में 12500 ppm तक पहुंचा हुआ देखा गया था, जबकि सरकारी मानक के अनुसार इसकी सीमा 3000 ppm की है।

ईंधन के दूषित होने का सटीक कारण ज्ञात नहीं हो सका है, लेकिन SIAM ने अपने वापस लिए गए पत्र में दर्ज किया था कि E20 के कार्यान्वयन के बाद क्लोराइड की मात्रा बढ़ी है और तेल कंपनियों को इसका मुख्य कारण खोजने का निर्देश देने के लिए सरकार से अनुरोध किया था। नमी के स्तर के लिए पेट्रोल पंप पर मौजूद अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन के उचित रखरखाव की कमी जिम्मेदार हो सकती है।

मारुति के अधिकारी अनूप भट्ट ने २६ जुलाई के ईमेल में लिखा था कि, मौजूदा फ्यूल इंजेक्टर (जो इंजन तक ईंधन पहुंचाते हैं) केवल 1 ppm क्लोराइड ही सहन कर सकते हैं। E20 में 1 ppm से कम मात्रा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार है और मंत्रालय के साथ हुई चर्चा के अनुसार भी है।

महिंद्रा के फ्लूइड टेक्नोलॉजी के सीनियर प्रिंसिपल इंजीनियर आर. रामप्रभु ने ईमेल में बताया था कि, 'ऑर्गेनिक क्लोराइड' ऐसा तत्व है जो वाहनों को बहुत तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है और यह केवल 200 किलोमीटर के भीतर इंजन खराब कर सकता है।

उन्होंने लिखा था कि, पेट्रोल भरवाने के तुरंत बाद सामने आने वाले अधिकांश मामले ऑर्गेनिक क्लोराइड के कारण हैं, और महिंद्रा के पास पेट्रोल पंप से लिए गए ईंधन के सैंपल के मजबूत सबूत हैं।

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