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सावन शुक्ल पक्ष शुरू…दुर्लभ संयोग के साथ अगले 15 दिन रहेंगे खास; हरियाली तीज से रक्षाबंधन तक कई व्रत-पर्व
23 साल बाद ऐसा संयोग, 17 अगस्त को सावन सोमवार और नाग पंचमी एक साथ
सूरत। सावन महीने का शुक्ल पक्ष शुरू हो गया है। यह 28 अगस्त सावन पूर्णिमा तक रहेगा। सावन शुक्ल पक्ष की शुरुआत के साथ ही अब त्योहारों और व्रतों का सिलसिला तेज हो जाएगा। अगले कुछ दिनों में हरियाली तीज, दूर्वा गणपति चतुर्थी, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी, भौम प्रदोष और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं में सावन को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महीना माना गया है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाने की परंपरा है।
इस साल सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं। इनमें 17 अगस्त का तीसरा सोमवार विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन नाग पंचमी भी है। पंचांग गणना के अनुसार 17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पंचमी और तीसरा सावन सोमवार एक ही दिन पड़ रहे हैं। ये बड़ा ही दुर्लभ संयोग है। इससे पहले 2003 में भी नागपंचमी सोमवार को पड़ी थी।
आइए जानते हैं कि सावन शुक्ल पक्ष कौन-कौन से व्रत-त्योहार हैं और क्या यह माह इतना खास क्यों है…
15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस और हरियाली तीज
सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया 15 अगस्त, शनिवार को हरियाली तीज के रूप में मनाई जाएगी। इसी दिन पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस भी मनाया जाएगा। इसलिए इस बार का 15 अगस्त काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए काफी खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। पूजा में माता पार्वती को मेहंदी, लाल चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और सुहाग की अन्य वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है। भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं। कई जगह महिलाएं झूला झूलती हैं और तीज की कथा सुनती-पढ़ती हैं।
16 अगस्त को दूर्वा गणपति चतुर्थी, सारी बाधाएं दूर होंगी
16 अगस्त को दूर्वा गणपति चतुर्थी का व्रत रहेगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा कर उन्हें दूर्वा, फूल, मौसमी फल और मोदक अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा से बाधाएं दूर होती हैं और शुभ कार्यों में सफलता मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखकर गणेश मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
17 अगस्त को नाग पंचमी और सावन सोमवार
17 अगस्त का दिन इस पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन रहेगा। इस दिन नाग पंचमी के साथ सावन का तीसरा सोमवार भी है। पंचांग के अनुसार 17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पंचमी और तीसरा श्रावण सोमवार है। इसी दिन सिंह संक्रांति भी रहेगी। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल आदि चढ़ाए जा सकते हैं। नाग देवता की प्रतिमा का पूजन किया जाता है।
रक्षा बंधन से पहले पुत्रदा एकादशी भी मनाई जाएगी
सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 23-24 अगस्त को होगी। पंचांगों में सामान्य श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त और वैष्णव पुत्रदा एकादशी 24 अगस्त दर्ज है। इसलिए व्रत रखने वाले अपने क्षेत्र के पंचांग और स्थानीय परंपरा के अनुसार तिथि तय कर सकते हैं। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान संबंधी मनोकामनाओं के लिए फलदायी होता है। भक्त फलाहार करते हुए भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
28 अगस्त को रक्षाबंधन और सावन पूर्णिमा
28 अगस्त शुक्रवार को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। भाई भी बहन की रक्षा और सुख-समृद्धि का संकल्प लेता है। परिवार में पूजा-अर्चना के बाद राखी बांधने और मिठाई खिलाने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ श्रावण पूर्णिमा, राखी और गायत्री जयंती जैसे पर्व भी दर्ज हैं।
सावन शुक्ल पक्ष में क्या करें?
इस पूरे पक्ष में श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। शिव पूजा में जल और बेलपत्र चढ़ाना, मंत्र जाप, ध्यान और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करें। अलग-अलग क्षेत्रों में तिथि और पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत की सही तिथि और पूजा का समय स्थानीय पंचांग से मिलाना बेहतर रहेगा।

