पान मसाला की प्लास्टिक पैकिंग पर देशभर में रोक, FSSAI ने जारी किए सख्त नियम

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देश में पर्यावरण सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले सभी प्रकार के प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। FSSAI ने 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026' का नोटिफिकेशन जारी किया है। 10 अगस्त 2026 को सरकारी गजट में प्रकाशित होते ही ये नए नियम तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू हो गए हैं।

नए नियमों के अनुसार, पान मसाला की पैकिंग में किसी भी प्रकार के प्लास्टिक, पॉलीथिन, PVC, पॉलिएस्टर या सिंथेटिक पॉलिमर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बनाए गए 'प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016' के प्रावधानों के तहत यह फैसला लिया गया है। प्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉयल वाले पाउच वर्षों तक नष्ट नहीं होते और जमीन तथा पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हैं, जिसे रोकने के लिए यह कड़ा आदेश दिया गया है।

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निर्माता कंपनियों को अब अनिवार्य रूप से इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाने होंगे। अब से पान मसाला के लिए केवल प्लास्टिक-मुक्त कागज, पेपरबोर्ड, सेलुलोज या अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाली सामग्री का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा FSSAI ने टिन के डिब्बे और कांच के कंटेनर के इस्तेमाल को भी मंजूरी दी है।

अक्सर कंपनियां बाहर कागज और अंदर से नमी रोकने के लिए प्लास्टिक या एल्युमिनियम की कोटिंग करती हैं, लेकिन FSSAI ने स्पष्ट किया है कि पैकेजिंग अंदर और बाहर—दोनों तरफ से पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त होना अनिवार्य है। यदि कोई कंपनी बाहर कागज का आवरण रखकर अंदर प्लास्टिक या चमकदार फॉयल का इस्तेमाल करेगी, तो उसे गैरकानूनी माना जाएगा।

पैकेजिंग के नियमों के संदर्भ में यह एक बड़ा बदलाव है। इसके लिए 2018 के 'खाद्य सुरक्षा और मानक नियमों' में संशोधन करके पान मसाला को 'शेड्यूल 4' के तहत एक नई एंट्री के रूप में शामिल किया गया है। इस शेड्यूल में सरकार ऐसे विशिष्ट खाद्य पदार्थों की सूची रखती है, जिनकी पैकेजिंग सामग्री के लिए विशेष नियम निर्धारित किए जाते हैं।

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FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यह नोटिफिकेशन केवल पैकेजिंग सामग्री के लिए है, उत्पाद के रूप में पान मसाला या गुटखा की बिक्री पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, प्लास्टिक पाउच की तुलना में कागज, टिन या कांच की पैकेजिंग काफी महंगी पड़ती है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियां यह बोझ ग्राहकों पर डालेंगी, जिससे आने वाले दिनों में पान मसाला की कीमतों में बढ़ोतरी होना तय है।

नियमों का उल्लंघन करने वाली निर्माता कंपनियों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट तथा 'प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स' के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाई जाने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने से लेकर उत्पादन पर रोक लगाने और फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द करने तक के कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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