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आगरा: डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, लेकिन शीला देवी अंतिम संस्कार से पहले ही उठ बैठीं! 9 दिन बाद...
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में 65 वर्षीय शीला देवी की कहानी ने सभी को चौंका दिया है। परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। इस दौरान, शीला देवी के शरीर में हलचल महसूस हुई। परिवार का दावा है कि उन्होंने बात की और पूछा कि, सभी उन्हें कहाँ ले जा रहे हैं। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और इलाज किया गया। इस घटना के लगभग 9 दिन बाद, रविवार, 9 अगस्त को शीला देवी की मृत्यु हो गई।
एक मीडिया चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, शीला देवी अपने बेटे सुनील महोर के साथ आगरा की ट्रांस यमुना कॉलोनी के श्रीनगर इलाके में रहती थीं। वह सांस की बीमारी से पीड़ित थीं और बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में उनका इलाज चल रहा था। 30 जुलाई को, डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार उनके शव को आगरा लाया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं।
परिवार के अनुसार, अंतिम संस्कार के लिए कपड़े और फूलों की माला भी मंगाई गई थी। इस दौरान, शीला देवी के दामाद ने उनके पैर छुए। परिवार का दावा है कि उन्हें उनके शरीर में हलचल महसूस हुई। इसके बाद, शीला देवी ने बात भी की और पूछा कि सभी क्यों रो रहे हैं और वे उन्हें कहाँ ले जा रहे हैं।
शीला देवी के जीवित होने का पता चलने के बाद, परिवार उन्हें तुरंत अस्पताल ले गया। इसके बाद उनका इलाज आगरा के पार्क अस्पताल में किया गया। परिवार को उम्मीद थी कि इस बार शीला देवी स्वस्थ होकर घर लौटेंगी, लेकिन 9 दिन बाद, रविवार, 9 अगस्त को, इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
शीला देवी की मृत्यु के बाद, उनके बेटे संजीव ने पार्क अस्पताल में इलाज और व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। संजीव बदायूं के एक निजी अस्पताल में काम करते हैं। संजीव ने आरोप लगाया है कि पार्क अस्पताल में मरीजों को अस्पताल की अपनी कंपनी और स्थानीय ब्रांड की दवाएं दी जाती हैं। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ पर मरीजों की उचित देखभाल न करने का भी आरोप लगाया है।
परिवार का दावा है कि, अस्पताल ने शीला देवी के इलाज के लिए लगभग 5 लाख रुपये का बिल दिया था। अपनी मां की मृत्यु के बाद संजीव ने पूरे मामले की जांच और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संजीव कहते हैं कि, वे जिला मजिस्ट्रेट और CM से शिकायत करेंगे। वे इलाज से संबंधित दस्तावेजों की जांच की भी मांग करेंगे।
पार्क अस्पताल के प्रशासन ने इस मामले में कोई जानकारी नहीं दी है। इसलिए, जांच और मेडिकल रिकॉर्ड ही बताएंगे कि इलाज के दौरान कोई लापरवाही हुई है या नहीं। शीला देवी के कथित रूप से जीवित होने से परिवार को नई उम्मीद मिली थी। हालांकि, 9 दिन बाद उनकी मृत्यु ने उनकी उम्मीद को गहरे दुख में बदल दिया है।

