सूरत के सबसे बड़े अस्पताल में प्रताड़ना का मामला: जानिए रैगिंग को लेकर देश में कितने सख्त नियम और कानून हैं, सजा का क्या प्रावधान है?

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सूरत। जिले के सबसे बड़े अस्पताल न्यू सिविल में अपने सीनियर्स की रैगिंग से परेशान होकर एक डॉक्टर ने सुसाइड कर लिया। हॉस्टल में 30 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या की आत्महत्या के मामले में एंटी-रैगिंग कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट और जांच के आधार पर चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को 6 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। कॉलेज के चार सीनियर अनुज महेश्वरी, दीक्षित धेवरिया, निराली वसावे और हिनाबेन भूत पर रैगिंग का आरोप लगा है। साथ ही उन्हें हॉस्टल खाली करने का भी आदेश दिया गया है। वहीं, चार फैकल्टी सदस्यों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 

बड़ा सवाल यह है कि देश में रैगिंग को लेकर सख्त कानून हैं, कड़े नियम हैं, इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने क्यों आ रही है? खासकर बड़े-बड़े संस्थाओं जैसे मेडिकल कॉलेज, इंजीनियर कॉलेज और देश के जाने-माने यूनिवर्सिटीज में इस तरह के मामले ज्यादा आते हैं। क्या इसको लेकर छात्रों में जागरूकता की कमी है या नए सिरे से फिर इस पर विचार करना होगा?

दावा: 10 रेजिडेंट डॉक्टर सीनियर्स के प्रताड़ना से परेशान थे

इधर, कमेटी की जांच में सामने आया है कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रथम वर्ष के करीब 10 रेजिडेंट डॉक्टर कथित तौर पर सीनियर्स के मानसिक दबाव और प्रताड़ना से परेशान थे। जांच में सीनियर महिला डॉक्टर दीक्षिता घेवड़िया की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

क्या एचओडी को इस बारे में जानकारी थी…

हर्ष की आत्महत्या से दो दिन पहले ही जूनियर डॉक्टरों ने विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. सुमैया मुल्ला से सीनियर्स की ओर से कथित मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की थी। बताया गया कि जूनियर डॉक्टर एकजुट होकर डीन से शिकायत करने जाने वाले थे, लेकिन इससे पहले हर्ष ने आत्महत्या कर ली। मामले में हॉस्टल और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के 24 घंटे बाद तक पुलिस को फुटेज उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात सामने आई है। हॉस्टल और विभाग के सर्वर में मेंटेनेंस का हवाला देकर उन्हें बंद किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद जांच की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठे हैं।

इन 4 फैकल्टी को कारण बताओ नोटिस

डॉ. सुमैया मुल्ला: एचओडी रहते हुए कथित रैगिंग की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई नहीं करने का आरोप।
डॉ. संगीता राजदेव: एसोसिएट प्रोफेसर होने के बावजूद रैगिंग के मामले पर पर्याप्त ध्यान नहीं देने को लेकर नोटिस।
डॉ. योगिता: असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में छात्रों की कथित प्रताड़ना पर निगरानी नहीं रखने को लेकर जवाब मांगा गया।
डॉ. लतिका शाह: छात्रों के साथ कथित रैगिंग की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने के आरोप में नोटिस।

परिवार में इकलौता बेटा था हर्ष, पिता भी सर्जन रह चुके

हर्ष पंड्या अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके पिता डॉ. सुभाषभाई पंड्या सर्जन के पद से रिटायर हो चुके हैं। परिवार में मां और एक बहन हैं। हर्ष ने फिलीपींस से एमबीबीएस किया था और नीट-पीजी पास करने के बाद माइक्रोबायोलॉजी में पीजी की पढ़ाई के लिए करीब छह महीने पहले सूरत सिविल अस्पताल में दाखिला लिया था। कुछ समय पहले ही उनकी सगाई भी हुई थी। हर्ष के पिता ने बताया कि घटना वाले दिन सुबह करीब साढ़े आठ बजे उनके बेटे के दोस्त का फोन आया और तत्काल अस्पताल पहुंचने को कहा गया। 

दोस्त से बताई थी परेशानी, लेकिन 40 लाख रुपए का बॉन्ड थी मजबूरी

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि हर्ष ने आत्महत्या से एक दिन पहले एक साथी डॉक्टर से कहा था कि अगर 40 लाख रुपए का बॉन्ड भरने की बाध्यता नहीं होती तो वह काफी पहले विभाग छोड़ चुके होते। सरकारी पीजी सीट बीच में छोड़ने पर लागू बॉन्ड की वजह से वे आर्थिक और मानसिक दबाव में होने की बात कही जा रही है।  बताया गया है कि सूरत सिविल कैंपस में पिछले सात वर्षों में रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े मामलों के बीच डॉ. धवल (2018) और डॉ. लोकेश (2024) समेत चार रेजिडेंट डॉक्टर आत्महत्या कर चुके हैं।

आइए जानते हैं कि भारत में रैगिंग पर कितनी सख्त व्यवस्था है?

भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए रैगिंग को लेकर यूजीसी की गाइडलाइन बनी हुई है। 
इनमें किसी जूनियर या अन्य छात्र को अपमानित करना, डराना, मानसिक नुकसान पहुंचाना, शर्मिंदगी महसूस कराने वाला काम करवाना या दबाव डालना भी रैगिंग के दायरे में आ सकता है। 2016 के संशोधन में बुलिंग और बहिष्कार जैसे मानसिक उत्पीड़न को भी स्पष्ट रूप से दायरे में शामिल किया गया है।

मेडिकल कॉलेजों के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल के अलग नियम

मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में रैगिंग रोकने के लिए एनएमसी के अलग गाइडलाइन बने हुए हैं। इसी के अनुसार रैगिंग पर संस्थान को रोकथाम और कार्रवाई की व्यवस्था करनी होती है।

दोष साबित होने पर कॉलेज ये सजा दे सकता है

यूजीसी के नियमों के तहत मामले की गंभीरता के अनुसार एक या एक से अधिक कार्रवाई की जा सकती है

  • कक्षाओं और अकादमिक गतिविधियों से निलंबन
  • छात्रवृत्ति/फेलोशिप और अन्य सुविधाएं रोकना
  • परीक्षा देने से रोकना
  • रिजल्ट रोकना
  • कॉलेज की टीम या प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व से रोकना
  • हॉस्टल से निलंबन या निष्कासन
  • एडमिशन रद्द करना
  • संस्थान से निष्कासन और निश्चित अवधि तक दूसरे संस्थान में प्रवेश पर रोक
  • नियमों के तहत 25,000 से 1 लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

अपराध गंभीर हो तो पुलिस केस भी संभव

रैगिंग के दौरान मारपीट, चोट पहुंचाना, गलत तरीके से रोकना, धमकी देना, यौन अपराध, जबरन वसूली, संपत्ति को नुकसान या अन्य आपराधिक कृत्य हुए हों तो मामला केवल कॉलेज की अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहता। संबंधित आपराधिक कानून के तहत पुलिस कार्रवाई और एफआईआर हो सकती है। 

कॉलेज और यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी भी तय

रैगिंग रोकना केवल एंटी-रैगिंग कमेटी की जिम्मेदारी नहीं है। संस्थान को एंटी-रैगिंग कमेटी और स्क्वाड, शिकायत व्यवस्था, जागरूकता कार्यक्रम, निगरानी और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की व्यवस्था करनी होती है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई में लापरवाही करने वाले संस्थान प्रमुख या प्रशासनिक/फैकल्टी अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
अगर किसी छात्रा को परेशान किया जा रहा है या रैगिंग को लेकर शिकायत है तो इस नंबर पर सहायता ले सकता है…

 राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन: 1800-180-5522 (24x7)

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