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सोनम वांगचुक ने ऐसा क्यों कहा- 2047 तक विकसित भारत का सपना मौजूदा व्यवस्था में मुश्किल, उन्होंने किन अहम बदलावों की बात की…
नई दिल्ली। एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधार के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक ने भारत के विकास को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर देश में मौजूदा व्यवस्था इसी तरह चलती रही तो 2047 तक भारत के विकसित देश बनने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा। वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि कई ऐसे देश, जो कभी भारत से पीछे या बराबरी पर थे, आज उससे काफी आगे निकल चुके हैं।
दरअसल, सोनम वांगचुक ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने देश की मौजूद व्यवस्था और कुछ अहम सुधारों के बारे में बताया है। वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसी दौरान उन्होंने देश, उसकी व्यवस्था और भविष्य को लेकर काफी विचार किया। इसके बाद उन्होंने लोगों के सामने अपनी चिंताएं और कुछ सुझाव रखे। उनका जोर केवल सरकार बदलने पर नहीं, बल्कि शिक्षा, राजनीतिक नेतृत्व और व्यवस्था में व्यापक बदलाव पर रहा।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा
वांगचुक के मुताबिक देश की प्रगति का सीधा संबंध उसकी शिक्षा व्यवस्था से है। जब तक शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा, तब तक आर्थिक और सामाजिक विकास को स्थायी गति देना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी ठोस शिक्षा नीति और व्यवस्था की जरूरत है, जो बच्चों और युवाओं को बेहतर भविष्य दे सके।
उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री या रोजगार तक सीमित करने के बजाय देश की सामर्थ्य बढ़ाने का आधार बताया। उनका कहना है कि अच्छे शिक्षक, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और दूरदर्शी नीति ही आने वाली पीढ़ी को मजबूत बना सकती है। शिक्षा पीछे रहेगी तो देश का भविष्य भी पीछे रह जाएगा। वांगचुक ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी नए नेतृत्व से बड़े बदलाव की उम्मीद को लेकर सवाल उठाया। उनका संकेत था कि केवल मंत्री या सरकार बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी खामियों को दूर नहीं किया जाता।
पड़ोसी देशों का उदाहरण देकर जताई चिंता
वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 50 साल पहले भारत से पीछे या बराबर रहने वाले कई पड़ोसी और एशियाई देश अब काफी आगे निकल चुके हैं। उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि अगर भारत को 2047 तक दुनिया में सम्मानित और विकसित देश के रूप में स्थापित होना है तो केवल आर्थिक आंकड़ों पर ध्यान देने से काम नहीं चलेगा। देश की शिक्षा, शासन व्यवस्था और नेतृत्व के तरीके में बड़े बदलाव करने होंगे।
भ्रष्टाचार अब नए रूप में पैर पसार रहा है
वांगचुक ने देश की शासन व्यवस्था की समस्याओं को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित करने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पार्टियों की सरकारों के दौरान भी विरोध की आवाजों को दबाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस आंदोलन के बाद राजनीतिक बदलाव जरूर आया, लेकिन सरकार बदलने के बावजूद भ्रष्टाचार और अन्याय पूरी तरह खत्म नहीं हुए। उनके मुताबिक समय के साथ ये समस्याएं खत्म होने के बजाय नए रूप में और गंभीर होती गईं। इसलिए उन्होंने राजनीतिक बदलाव से आगे बढ़कर व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई।
‘दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन’ शुरू करने की अपील
वांगचुक ने देशवासियों से दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा में सोचने की अपील की। उनके लिए इसका मतलब किसी हिंसक संघर्ष से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से देश के लिए बेहतर नेतृत्व और व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत है, जिसके जरिए देश के लिए सही नेतृत्व सामने आए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल राजनीतिक दलों या स्थापित चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय अपने आसपास ऐसे लोगों की पहचान करें, जो निस्वार्थ, निडर, चरित्रवान और सक्षम हों। वांगचुक ने देशभर के लोगों से अपने क्षेत्र और देश से कम से कम एक ऐसे व्यक्ति का नाम सुझाने को कहा है। उन्होंने कहा कि इन लोगों के नाम उनके लिए स्वतंत्रता दिवस का तोहफा होंगे। वह ऐसे लोगों से मिलना चाहते हैं, जो देश के भविष्य का नया नक्शा तैयार करने में योगदान दे सकें।
बदलाव की शुरुआत आम लोगों से करने की बात
वांगचुक का संदेश केवल सरकार या नेताओं के लिए नहीं था। उन्होंने नागरिकों से भी अपनी भूमिका तय करने की अपील की। उनका कहना है कि अगर देश के लोग अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर काम करने का फैसला करें तो बदलाव संभव है। उन्होंने अच्छे शिक्षकों, नेताओं और विचारकों को आगे लाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक देश में प्रतिभा और ईमानदार लोग मौजूद हैं, लेकिन जरूरत उन्हें पहचानने और नेतृत्व की भूमिका तक पहुंचाने की है।
नीट पेपर लीक को लेकर आंदोलन कर चुके हैं सोनम वांगचुक
इससे पहले शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के मुद्दे पर उनके आंदोलन ने भी इसी सोच को सामने रखा था। 28 जून को उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। यह कदम NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में उठाया गया था। लंबी भूख हड़ताल के दौरान तबीयत बिगड़ने पर 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। बाद में उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार से आश्वासन मिलने के बाद 24 जुलाई को उन्होंने 26 दिन का अनशन खत्म किया था।

