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सैटेलाइट तस्वीरों में बारिश के बादलों से घिरा भारत: मानसून फिर जम गया
देश में मानसून फिर एक बार जोर पकड़ता हुआ लग रहा है। सैटेलाइट द्वारा ली गई नई तस्वीरों में देश के विशाल हिस्सों पर बादलों की घनी पट्टियां फैली हुई दिखाई दे रही हैं। बंगाल की खाड़ी में बनी नई लो-प्रेशर सिस्टम ने पूर्व और मध्य भारत के मौसम को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
13 अगस्त के रोज EUMETSAT और ISRO के INSAT-3D/3DR सैटेलाइट्स से मिली तस्वीरों के अनुसार, अरब सागर से लेकर मध्य भारत, गंगा के मैदानी इलाकों और उत्तर-पूर्व भारत तक बादलों की विशाल चादर फैली हुई स्पष्ट दिखाई दे रही है। सबसे अधिक घने बादल उत्तरी बंगाल की खाड़ी, पूर्वी भारत, बांग्लादेश और आसपास के इलाकों पर केंद्रित हैं, जहां नई बनी लो-प्रेशर सिस्टम जमीन की ओर नमी खींच रही है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश के तट पर उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर लो-प्रेशर क्षेत्र बना है। इस सिस्टम के आगे बढ़कर जमीन पर प्रवेश करने और अगले कुछ दिनों तक ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में व्यापक बारिश बनाए रखने की संभावना है। सैटेलाइट इमेज में पूर्वी भारत के ऊपर ठंडे शीर्ष वाले घने बारिश के बादल दिखाई दे रहे हैं, जो गरज के साथ भारी बारिश होने का स्पष्ट संकेत है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों पर भी बादलों के बड़े समूह दिखाई दे रहे हैं, जो दर्शाते हैं कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में 'मानसून ट्रफ' अभी भी सक्रिय है। इस नई सिस्टम के मानसून की हवाओं के साथ मिलने से मौसम अधिकारियों ने कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। पूर्व और मध्य भारत के कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश हो सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर बाढ़ और जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।

बंगाल की खाड़ी में बनी यह नई सिस्टम मानसून के सीजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय पर आई है। अगस्त महीने में देश के अलग-अलग हिस्सों में असमान बारिश दर्ज की गई है। मौसम विज्ञानी अब इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि क्या एक के बाद एक आने वाली ये लो-प्रेशर सिस्टम्स सक्रिय हो रहे El Nino के प्रभाव को कम कर पाएंगी या नहीं। फिलहाल तो, अंतरिक्ष से मिले दृश्य यही संकेत देते हैं कि मानसून का इंजन पूरी तरह धधक रहा है।
भारत के अधिकांश इलाकों में छाए घने बादलों और जमीन की ओर आगे बढ़ रही नई बारिश की सिस्टम के कारण, अगस्त के दूसरे पखवाड़े में देश के पूर्व, मध्य और उत्तर भागों में बारिश में उल्लेखनीय वृद्धि होने की पूरी संभावना है।

