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लोकसभा में युवाओ से सम्बंधित सवाल न पूछे जाने पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने केंद्र पर साधा निशाना
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संस्थापक और प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि संसद के हालिया मानसून सत्र में लोकसभा में युवाओं के विरोध प्रदर्शन और NEET-UG 2026 से जुड़े कई अहम सवाल पूछने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इसे संसदीय जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
सौरव दास के मुताबिक, लोकसभा सांसद मैथेश्वरन वीएस ने केंद्र सरकार से जवाब मांगने के लिए तीन बार सवाल भेजे थे। ये सवाल गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय से संबंधित थे। इन सवालों के नोटिस नंबर 101799 और 101801 थे।
इनमें पूछा गया था कि NEET-UG 2026 की आवेदन फीस वापस करने को लेकर सरकार ने क्या फैसला लिया है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि लोगों का सरकार पर भरोसा क्यों कम हो रहा है।
इसके अलावा दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं उपलब्ध कराई गईं, इस पर भी जवाब मांगा गया था। प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ सरकार ने क्या बातचीत की, यह सवाल भी शामिल था।
सवालों में छात्रों की समस्याओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी गई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के साथ सरकार ने कैसा व्यवहार किया, यह भी पूछा गया था।
सौरव दास का दावा है कि इन सभी सवालों को लोकसभा में पूछने की अनुमति नहीं दी गई। इसके लिए लोकसभा के नियम 41(2) की धाराओं (I), (IV), (V), (XVIII) और (XXII) का हवाला दिया गया।
दास ने सवाल उठाया कि अगर ये सवाल संसद में नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार की जवाबदेही आखिर कहां तय होगी? उन्होंने पूछा कि क्या सरकार से जवाब मांगने के लिए लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा?
उन्होंने यह भी सवाल किया कि इन महत्वपूर्ण हफ्तों के दौरान गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब संसद में क्यों नहीं दिया गया।

सौरव दास ने कहा कि सांसदों का सरकार से सवाल पूछना महज संसद की औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि संसदीय लोकतंत्र का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, प्रश्नकाल इसलिए होता है ताकि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि उन मंत्रियों से जवाब मांग सकें, जिनके पास जनता से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि अगर संसद में सवालों के जवाब नहीं मिलेंगे, तो लोगों के पास सड़कों पर उतरकर सरकार से जवाब मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
CJP प्रवक्ता ने आगे आरोप लगाया कि संसद की आवाज को दबाकर उसे सरकार की अधूरी नीतियों पर सिर्फ मुहर लगाने वाली जगह नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और यही भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं है।

